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जहां पढ़े पीएम से लेकर विदेश मंत्री, उस यूनिवर्सिटी के हैं बुरे हाल

Wed, 05 Apr 2017 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 05 Apr 2017 09:17 AM IST
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Punjab university  Slipped from the 12th rank to 33rd
पंजाब यूनिवर्सिटी
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मौजूदा सांसद किरण खेर जैसी हस्तियों को तालीम देने वाली पंजाब यूनिवर्सिटी अपना अस्तित्व खो रही है।  देश की पहली चार यूनिवर्सिटी में से एक पीयू मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रैंकिंग में पिछड़कर महज एक साल के अंदर 12वें रैंक से खिसक कर 33वें पर पहुंच गई है। पिछले कई महीनों से पीयू वित्तीय संकट के जाल में फंसी है।
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हालांकि सिर्फ यही एक कारण रैंकिंग गिरने का नहीं है। टीचिंग एंड लर्निंग रिसोर्सेस, रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रेक्टिस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरिच एंड इनक्ल्यूसिविटी और अनुभव के पैमाने पर पीयू खरा नहीं उतर पाई। पीयू के इतिहास में ऐसा पहली बार हो पाया है जब स्टाफ तक की सैलरी रुक गई हो।
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एग्जामिनेशन कंडक्ट करवाने के लिए जुटी फीस से सैलरी जारी की गई। एक साथ 11 गुना तक फीस बढ़ोतरी ने भी पीयू की साख को नुकसान पहुंचाया है। सवाल यह है कि पीयू की इस बदतर होती हालत पर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है।
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पीयू मेरी मां के समान है। इसकी खराब हालत से मुझे भी दर्द होता है। इसी वजह से मैंने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से आग्रह कर 140 करोड़ रुपये की इमरजेंसी ग्रांट जारी करवाई है। इससे पीयू को काफी राहत मिलेगी। रैंकिंग गिरने के कारणों पर पीयू प्रशासन को अपने स्तर पर विश्लेषण करना चाहिए। सिर्फ वित्तीय संकट ही रैंकिंग गिरने की वजह नहीं हो सकता।
- किरण खेर, सांसद, चंडीगढ़।
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