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हरियाणा के वीरता पुरस्कार पर पंजाब को एतराज: पुलिस अफसरों को पुरस्कार पर विस स्पीकर को आपत्ति, PM को लिखा पत्र

Wed, 24 Jul 2024 09:17 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 24 Jul 2024 09:17 PM IST
सार

किसान प्रदर्शन के दौरान शंभू बॉर्डर पर किसानों को हरियाणा पुलिस ने रोका था। हरियाणा सरकार ने किसानों को रोकने वाले छह पुलिस अफसरों को बहादुरी पुरस्कार देने की सिफारिश की है। इस पर पंजाब ने आपत्ति जताई है। 

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Punjab Speaker Kultar Singh Sandhwan write latter to PM protests gallantry medals to Haryana police officers
पंजाब विस स्पीकर संधवां। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा के वीरता पुरस्कार पर पंजाब ने एतराज जताया है। शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने वाले हरियाणा के पुलिस अफसरों को बहादुरी पुरस्कार देने की सिफारिशों पर पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने आपत्ति जताई है।

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स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने प्रधानमंत्री को किसानों को शंभू बॉर्डर पर आगे बढ़ने से रोकने में शामिल पुलिस अधिकारियों के लिए बहादुरी के पुरस्कारों की सिफारिशों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में संधवां ने कहा कि वह हरियाणा के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) द्वारा हाल ही में शंभू बाॅर्डर पर किसानों के मार्च को रोकने में शामिल छह पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को बहादुरी के पुरस्कार देने की सिफारिश पर चिंता और निंदा करते हैं।
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किसानों का समर्थन करते हुए संधवां ने कहा कि देश के किसानों द्वारा दिए गए योगदान के लिए वह मान-सम्मान के हकदार है, इसके लिए उनके साथ किसी भी तरह की बेरुखी और बेइंसाफी न की जाए।
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पीएम को लिखे पत्र में बॉर्डर पर बने हालात का ध्यान रखने को कहा
स्पीकर संधवां ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा कि पंजाब और हरियाणा के बॉर्डर पर मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए कोई कदम उठाना चाहिए। हरियाणा के इन पुलिस अधिकारी व कर्मचारी को बहादुरी पुरस्कार देकर वह किसानों की मांगों के मान-सम्मान को ठोस पहुंचाने जैसा होगा, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं। वहीं, संधवां ने पंजाब पुलिस फोर्स की बॉर्डर पर किसान आंदोलन के बीच बहादुरी और समर्पण का सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस द्वारा निभाई गई शानदार सेवाओं के लिए मान-सम्मान देना बनता है। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री को हरियाणा सरकार के इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हैं। संधवां ने कहा कि भारत की सर्वोच्च सांविधानिक अथारिटी होने के नाते वह प्रधानमंत्री को इस सिफारिश पर फिर विचार करने की अपील करते हैं। ऐसे हालात में हमारे लिए लोकतंत्र, न्याय और मानवीय सिद्धांतों को बरकरार रखना बहुत जरूरी है।


फरवरी से किसान चल रहे हैं संघर्ष पर
फसलों की एमएसपी की लीगल गारंटी की मांग को लेकर किसान 13 फरवरी, 2024 से संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान हरियाणा पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया था। इस दौरान पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले तक भी छोड़ थे। कई किसान घायल हुए थे, जबकि एक किसान शुभकरण की मौत तक हो गई थी। यह मामला अभी तक गहराया हुआ है। वहीं, किसान अभी भी बॉर्डर पर डटे हुए हैं।

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