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लॉकडाउन से पंजाब में पैदा हुआ आर्थिक संकट, उबरने को केंद्र से मांगी 51,102 करोड़ की मदद

Thu, 28 May 2020 01:16 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 28 May 2020 01:16 AM IST
सार

  • पंजाब मंत्रिमंडल ने केंद्र को भेजे जाने वाले मांग पत्र को दी मंजूरी
  • प्रस्तावित पैकेज में 21,500 करोड़ रुपये की सीधी मदद की मांग
  • सीसीएल कर्ज माफी, केंद्रीय स्कीमों में 100 फीसदी फंडिंग की मांग

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Punjab seeks financial help from Center to overcome economic crisis
पंजाब कैबिनेट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोविड महामारी और लंबे लॉकडाउन के कारण पैदा हुए वित्तीय संकट और बढ़ रही आर्थिक मुश्किलों से राज्य को बाहर निकालने के लिए पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से 51,102 करोड़ की वित्तीय सहायता लेने का फैसला किया है। इस संबंधी तैयार मांग पत्र को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की मीटिंग में मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट द्वारा केंद्र सरकार को सौंपे जाने से पहले इस मांग पत्र में संशोधन के अधिकार मुख्यमंत्री को दिए गए हैं।

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इसके अलावा 21,500 करोड़ की सीधी वित्तीय सहायता के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा लंबे समय के सीसीएल कर्जे को खत्म करने की मांग रखी गई है जोकि राज्य सरकार को वित्तीय पक्ष को मजबूत करने के लिए जरूरी है। इसके अलावा मांग पत्र के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 दौरान सभी केंद्रीय स्कीमों के अंतर्गत सौ प्रतिशत फंड केंद्र सरकार द्वारा मुहैया करवाए जाने के लिए कहा गया है।
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इन मदों और योजनाओं के लिए मांगी वित्तीय सहायता

  • मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार, कोविड के बाद स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को प्रमुखता की सूची में रखते हुए राज्य द्वारा 6603 करोड़ की प्रस्तावित मांग रखी गई है, जिससे लंबे समय के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार लाया जा सके। इसमें राज्य में 650 करोड़ की लागत के साथ वायरोलॉजी का आधुनिक केंद्र स्थापित करने के लिए मंजूरी दिए जाने को भी शामिल किया गया है, जिसके लिए पंजाब सरकार द्वारा अपेक्षित जमीन मुफ्त मुहैया करने की पहले ही पेशकश की जा चुकी है। 
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  • ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 को फैलाने से रोकने के लिए गांवों में तरल और ठोस कूड़े के प्रबंधन के लिए 5,068 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की गई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लिए मनरेगा लक्ष्यों और पूंजीगत लागत को बढ़ाने की भी मांग की गई है।
  • कृषि और फार्मिंग क्षेत्र के लिए करीब 12,560 करोड़ की मांग की गई है। खासतौर पर इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आय को उत्साहित करने और ब्याज वित्तीय सहायता आदि के लिए। इसी तरह कुल 1,161 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग पशु पालन और डेयरी क्षेत्र के लिए की गई है।
  • शहरी विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी एक्ट (एनयूईजीए) को प्रस्तावित किया गया है ताकि इन क्षेत्रों में रोजगार मुहैया हो सके। इसके साथ ही कुछ रियायतों समेत अमरुत, स्मार्ट सिटी, पीएमएवाई आदि स्कीमों के अंतर्गत 2,302 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वित्तीय ढांचे की मांग की गई है। इसके अलावा आय घाटे के एवज में 1,137 करोड़ के अनुदान की मांग की गई है।
  • मानव संसाधनों के विकास को मांग पत्र में प्रमुखता देते हुए राज्य सरकार द्वारा 3,073 करोड़ की मांग की गई है।
  • औद्योगिक क्षेत्रों खासकर मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्योगों, ब्याज माफी, अधिक ईएसआई /ईपीएफ योगदान, अधिक ब्याज वित्तीय सहायता, जल्द जीएसटी रिफंडों के लिए सहायता की मांग की गई है।

पंजाब पर है कर्ज का सबसे ज्यादा बोझ

सामान्य वर्ग की श्रेणी के राज्यों में पंजाब ऐसा राज्य है जिस पर कर्ज का भार सबसे ज्यादा है। पंजाब पर राज्य की सकल घरेलू उत्पाद की 40.7 फीसदी रेशो के हिसाब से कर्ज बकाया है, जोकि महाराष्ट्र (17.9 फीसदी), कर्नाटक (18.2 फीसदी), गुजरात (20.2 फीसदी), तामिलनाडु (22.3 फीसदी), आंध्रप्रदेश (28.9 फीसदी), केरल (30.9 फीसदी) और पश्चिमी बंगाल (37.1 फीसदी) राज्यों की अपेक्षा काफी ज्यादा है। 

राज्य द्वारा पिछले तीन सालों के दौरान कर्ज /सकल घरेलू उत्पाद की रेशो घटाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। यह 2016-17 में 42.75 फीसदी था जो 2017-18 में 40.77 फीसदी रह गया और 2018-19 में घटकर 40.61 पर पहुंच गया और 2019-20 में घटकर 39.83 फीसदी रह गया। उम्मीद है कि राज्य की यह रेशो घटने की प्रवृत्ति जारी रहेगी और कर्ज /जीएसडीपी की मौजूदा रेशो दर घटकर साल 2020-21 में 38.53 फीसदी रह जाएगी। लेकिन कोविड-19 के कारण पैदा हुए हालातों ने इन प्रयासों को बड़ा झटका दिया है।

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