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बेरोजगारों को साढ़े छप्पन लाख की सब्सिडी दी
अमर उजाला संगरूर
Updated Wed, 19 Nov 2014 10:26 PM IST
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गांवों के बेरोजगार नौजवानों को स्वरोजगार मुहैया करवाने के उद्देश्य के तहत पंजाब सरकार के सहयोग से पंजाब खादी तथा ग्राम उद्योग बोर्ड की तरफ से सब्सिडी पर कर्ज मुहैया करवाए जा रहे हैं।
डिप्टी कमिश्नर डिप्टी कमिश्नर अर्शदीप सिंह थिंद ने बताया कि खादी बोर्ड की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना केवीआईसी के तहत 2013-14 दौरान जिले के 44 नौजवानों को 220.80 लाख रुपये के कर्ज दिए और 56.63 लाख रुपये की सब्सिडी भी मुहैया करवाई गई है।
इस योजना के तहत कोई भी अठारह साल से अधिक आयु का व्यक्ति औद्योगिक, सेवा इकाई स्थापित करने के लिए अकेले तौर पर सेल्फ हेल्प ग्रुप, कोआपरेटिव सोसाइटी, चैरिटेबल ट्रस्ट अथवा समिति बनाकर 25 लाख रुपये तक के कर्ज प्राप्त कर सकता है। उत्पादन क्षेत्र में दस लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट लागत और सर्विस क्षेत्र में पांच लाख से अधिक प्रोजेक्ट लागत वाले लाभार्थी को कम से कम आठवीं पास होना जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि प्रमाणित प्रोजेक्ट रिपोर्ट मुताबिक कुल लागत की नब्बे प्रतिशत रकम बैंक द्वारा लाभार्थी को कर्ज के रूप में अदा करनी होती है। जनरल कैटेगरी लाभार्थियों द्वारा लगाया जाना जरूरी है। अनुसूचित जाति, पिछड़ी श्रेणियों, शारीरिक अपंग, महिलाओं, पूर्व सैनिकों, सरहदी क्षेत्रों के लोगों, अल्पसंख्यकों के प्रोजेक्ट लागत का पांच प्रतिशत हिस्सा स्वयं लगाने की जरूरत है।
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डिप्टी कमिश्नर डिप्टी कमिश्नर अर्शदीप सिंह थिंद ने बताया कि खादी बोर्ड की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना केवीआईसी के तहत 2013-14 दौरान जिले के 44 नौजवानों को 220.80 लाख रुपये के कर्ज दिए और 56.63 लाख रुपये की सब्सिडी भी मुहैया करवाई गई है।
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इस योजना के तहत कोई भी अठारह साल से अधिक आयु का व्यक्ति औद्योगिक, सेवा इकाई स्थापित करने के लिए अकेले तौर पर सेल्फ हेल्प ग्रुप, कोआपरेटिव सोसाइटी, चैरिटेबल ट्रस्ट अथवा समिति बनाकर 25 लाख रुपये तक के कर्ज प्राप्त कर सकता है। उत्पादन क्षेत्र में दस लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट लागत और सर्विस क्षेत्र में पांच लाख से अधिक प्रोजेक्ट लागत वाले लाभार्थी को कम से कम आठवीं पास होना जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि प्रमाणित प्रोजेक्ट रिपोर्ट मुताबिक कुल लागत की नब्बे प्रतिशत रकम बैंक द्वारा लाभार्थी को कर्ज के रूप में अदा करनी होती है। जनरल कैटेगरी लाभार्थियों द्वारा लगाया जाना जरूरी है। अनुसूचित जाति, पिछड़ी श्रेणियों, शारीरिक अपंग, महिलाओं, पूर्व सैनिकों, सरहदी क्षेत्रों के लोगों, अल्पसंख्यकों के प्रोजेक्ट लागत का पांच प्रतिशत हिस्सा स्वयं लगाने की जरूरत है।