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Punjab: सीसीटीवी कैमरों से ड्रोन पर नजर रखेगी पुलिस, नशा व हथियार तस्करी पर नकेल कसने की तैयारी
Tue, 13 Jun 2023 08:03 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 13 Jun 2023 08:03 AM IST
सार
एक साल में जम्मू-कश्मीर साइड में सख्ती ज्यादा होने से नशा तस्करों ने पंजाब को नशा तस्करी के लिए चुना है। खास बात यह है कि यहां पर पहाड़ आदि नहीं हैं, ऐसे में ड्रोन सीधे लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं।
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ड्रोन।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब के सीमावर्ती जिलों में ड्रोन के जरिये हथियारों और नशे की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए अब सरकार तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की मदद लेगी। इस प्रोजेक्ट पर 20 करोड़ रुपये की लागत से काम किया जाएगा।
इसके अलावा ड्रोन के जरिये हथियार और नशे संबंधी उचित सूचना देने वाले को पंजाब पुलिस एक लाख रुपये की अदायगी करेगी। यह फैसला पंजाब पुलिस की तरफ से ले लिया गया है। डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने इस संबंधी आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। पुलिस की कोशिश पंजाब को नशा मुक्त बनाना है।
पंजाब की 557 किलोमीटर सीमा पड़ोसी देश पाकिस्तान से लगती है। इस सीमा के साथ पंजाब के छह जिले तरनतारन, अमृतसर, पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का और फिरोजपुर लगते हैं। इनमें करीब 27 प्वाइंट ऐसे हैं, जो कि ड्रोन के जरिये हथियार और नशा तस्करी का गेटवे बन गए हैं। तस्कर यहां की परिस्थितियों का फायदा उठाते हैं। इस पर नकेल कसने के लिए पंजाब पुलिस व सीमा सुरक्षा बल के उच्च अधिकारियों की अहम मीटिंग में रणनीति बनी है। इसमें यह भी बात सामने आई कि अमृतसर, गुरदासपुर और बटाला एरिया इन दिनों हॉट स्पॉट बन रहे हैं। इन पर अंकुश लगाने की दिशा में कार्रवाई जाए।
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वहीं, इससे पहले पंजाब पुलिस की तरफ से इमरजेंसी ड्रोन रिस्पांस सिस्टम गठित किया गया। इसमें बॉर्डर से सटे गांवों में 400 अधिक विलेज पुलिस आफिसर तैनात किए गए हैं। उन्हें गांवों की हर गली से लेकर चौराहे तक जानकारी हाेती है। यह गांवों की चौकस कमेटियों के साथ मिलकर काम करते हैं। जैसे ही उनके पास कोई सूचना होती है उसे तुरंत शेयर की जाती है।
याद रहे कि गत एक साल में जम्मू-कश्मीर साइड में सख्ती ज्यादा होने से नशा तस्करों ने पंजाब को नशा तस्करी के लिए चुना है। खास बात यह है कि यहां पर पहाड़ आदि नहीं हैं, ऐसे में ड्रोन सीधे लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं। गत साल 244 ड्रोन एक्टिविटी हुई थीं, जबकि 23 ड्रोन मार गिराए गए हैं।
तस्करों द्वारा प्रयोग किए जा रहे हैं ड्रोन वाले मैप
नशा तस्करों की तरफ से अब अति आधुनिक तकनीक वाले ड्रोन प्रयोग किए जा रहे हैं। इन ड्रोन में यूएस और चाइना मेड ड्रोन प्रमुख हैं। यह ड्रोन काफी महंगे हैं। ऐसे में जो भी ड्रोन पुलिस पकड़ती है उन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा जाता है। इस दौरान पता लगाया जाता है कि आखिर यह ड्रोन कहां से उड़ा था, साथ ही इसे कहा जाना होगा।
20 करोड़ से खरीदेंगे ड्रोन, गाड़ियां भी मिलेंगी
ड्रोन से नशा तस्करी पर नकेल कसने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। 20 करोड़ की लागत से बॉर्डर एरिया में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही नशा तस्करों का पीछा करने के लिए बढि़या गाड़ियां पुलिस को मुहैया करवाई जा रही हैं। - सुखचैन सिंह गिल, आईजी हेडक्वार्टर पंजाब पुलिस।
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इसके अलावा ड्रोन के जरिये हथियार और नशे संबंधी उचित सूचना देने वाले को पंजाब पुलिस एक लाख रुपये की अदायगी करेगी। यह फैसला पंजाब पुलिस की तरफ से ले लिया गया है। डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने इस संबंधी आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। पुलिस की कोशिश पंजाब को नशा मुक्त बनाना है।
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पंजाब की 557 किलोमीटर सीमा पड़ोसी देश पाकिस्तान से लगती है। इस सीमा के साथ पंजाब के छह जिले तरनतारन, अमृतसर, पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का और फिरोजपुर लगते हैं। इनमें करीब 27 प्वाइंट ऐसे हैं, जो कि ड्रोन के जरिये हथियार और नशा तस्करी का गेटवे बन गए हैं। तस्कर यहां की परिस्थितियों का फायदा उठाते हैं। इस पर नकेल कसने के लिए पंजाब पुलिस व सीमा सुरक्षा बल के उच्च अधिकारियों की अहम मीटिंग में रणनीति बनी है। इसमें यह भी बात सामने आई कि अमृतसर, गुरदासपुर और बटाला एरिया इन दिनों हॉट स्पॉट बन रहे हैं। इन पर अंकुश लगाने की दिशा में कार्रवाई जाए।
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वहीं, इससे पहले पंजाब पुलिस की तरफ से इमरजेंसी ड्रोन रिस्पांस सिस्टम गठित किया गया। इसमें बॉर्डर से सटे गांवों में 400 अधिक विलेज पुलिस आफिसर तैनात किए गए हैं। उन्हें गांवों की हर गली से लेकर चौराहे तक जानकारी हाेती है। यह गांवों की चौकस कमेटियों के साथ मिलकर काम करते हैं। जैसे ही उनके पास कोई सूचना होती है उसे तुरंत शेयर की जाती है।
याद रहे कि गत एक साल में जम्मू-कश्मीर साइड में सख्ती ज्यादा होने से नशा तस्करों ने पंजाब को नशा तस्करी के लिए चुना है। खास बात यह है कि यहां पर पहाड़ आदि नहीं हैं, ऐसे में ड्रोन सीधे लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं। गत साल 244 ड्रोन एक्टिविटी हुई थीं, जबकि 23 ड्रोन मार गिराए गए हैं।
तस्करों द्वारा प्रयोग किए जा रहे हैं ड्रोन वाले मैप
नशा तस्करों की तरफ से अब अति आधुनिक तकनीक वाले ड्रोन प्रयोग किए जा रहे हैं। इन ड्रोन में यूएस और चाइना मेड ड्रोन प्रमुख हैं। यह ड्रोन काफी महंगे हैं। ऐसे में जो भी ड्रोन पुलिस पकड़ती है उन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा जाता है। इस दौरान पता लगाया जाता है कि आखिर यह ड्रोन कहां से उड़ा था, साथ ही इसे कहा जाना होगा।
20 करोड़ से खरीदेंगे ड्रोन, गाड़ियां भी मिलेंगी
ड्रोन से नशा तस्करी पर नकेल कसने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। 20 करोड़ की लागत से बॉर्डर एरिया में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही नशा तस्करों का पीछा करने के लिए बढि़या गाड़ियां पुलिस को मुहैया करवाई जा रही हैं। - सुखचैन सिंह गिल, आईजी हेडक्वार्टर पंजाब पुलिस।