पंजाब: पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी ने ली अदालत की शरण, जमानत पर आज होगा फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
29 साल पहले 1991 में एक आईएएस अधिकारी के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के किडनैपिंग के आरोप में पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी पर गत गुरुवार को केस दर्ज किया गया था। इस पर शुक्रवार को सुमेध सिंह सैनी ने मोहाली जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। अदालत ने इस मामले में पुलिस को शनिवार तक के लिए को-नोटिस जारी किया है। अदालत में दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जमानत पर फैसला लिया जाएगा।
यह केस मृतक बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह की शिकायत पर पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी समेत 8 लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है। आरोपियों में तत्कालीन चंडीगढ़ पुलिस के मुलाजिम और अधिकारी समेत एक अज्ञात व्यक्ति शामिल है। शुक्रवार को सुमेध सिंह सैनी की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट सतनाम सिंह कलेर पेश हुए। वह कई बड़े मामलों की पैरवी कर चुके हैं।
यह है पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 1991 में जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे तो उस समय उनके ऊपर एक आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात चार मुलाजिम मारे गए थे। इसके बाद पुलिस के जवान पलविंदर के भाई बलवंत सिंह मुल्तानी को मोहाली फेज-7 स्थित घर से उठाकर सेक्टर-17 चंडीगढ़ के थाने ले आए थे।
सैनी की दहशत और प्रभाव के कारण बलवंत की रिहाई के लिए किए सभी प्रयासों के बावजूद उसका परिवार उसे वापस लाने में असफल रहा था। इसके बाद परिवार ने बेटे बलवंत मुल्तानी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले की काफी लंबी जंग चली। आखिरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों के अंतर्गत एक प्राथमिक जांच की गई और इसके बाद सीबीआई द्वारा 2 जुलाई 2008 को मामला दर्ज किया गया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि हाईकोर्ट बेंच के पास केस का निपटारा करने के लिए अधिकार क्षेत्र की कमी है। नतीजे के तौर पर सीबीआई की तरफ से इन आदेशों के आधार पर दर्ज एफआईआर को केवल तकनीकी आधार पर रद्द किया गया था।
शिकायतकर्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को नए सिरे से कार्रवाई की आजादी दी थी। इस मामले की योग्यता पर कोई टिप्पणी या चर्चा भी नहीं की थी। इसके बाद वर्ष 2014 में परिवार को कुछ नई जानकारियां मिली, जिसके बाद केस दर्ज करवाया गया है।
वकील सतनाम सिंह ने केस लड़ने से किया इनकार
जब उन्हें पता चला कि सोशल मीडिया पर कुछ सिख वीरों और जत्थेबंदियों की ओर से इसका विरोध किया जा रहा है। तो मैंने इस केस को लड़ने से साफ मना कर दिया है। इसके साथ ही अपने आपको इस केस से पूरी तरह अलग कर लिया है। वहीं, केस से जुड़े सभी दस्तावेज उन्होंने सुमेध सिंह सैनी को सौंप दिए हैं। एडवोकेट कलेर ने कहा है कि सिख कौम ने उन्हें बहुत मान दिया है। यदि उनके चलते किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो इसके लिए मैं दिल से माफी मांगता हूं।