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पादरी के 6.5 करोड़ के गबन मामले में आरोपियों के खिलाफ जुड़ी डकैती की धारा, मुखबिर के परिजन बोले...
Sat, 20 Apr 2019 01:53 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापपुरा(जालंधर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापपुरा(जालंधर)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 20 Apr 2019 01:53 PM IST
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फादर एंथनी के घर से मिले 6.5 करोड़ से ज्यादा रुपये गायब करने के मामले में अब डकैती की धारा भी जोड़ दी गई है। वहीं आरोपी मुखबिर के परिजन भी सामने आए हैं। आईजी क्राइम प्रवीण कुमार सिन्हा की तरफ से यह कहते हुए नई धारा जोड़ी गई कि मामला एक सुनयोजित डकैती थी। वहीं एआईजी क्राइम राकेश कौशल ने बताया कि पुलिस टीम की तरफ से दोनों एएसआई के खिलाफ अदालत से वारंट हासिल कर लिए गए हैं। दोनों मुलाजिमों ने अपनी अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है, जिस पर शनिवार को सुनवाई होगी।
खन्ना पुलिस ने जिस दिन जालंधर के प्रतापपुरा में छापेमारी की, उस दिन टीम में दो एएसआई जोगिंदर व राजप्रीत थे। उनके साथ पुलिस का मुखबिर सुरिंदर भी था। ये लोग वरना कार से आए थे। जब ग्राउंड फ्लोर पर 9.60 करोड़ रुपये जब्त कर खन्ना पुलिस की पहली पार्टी निकल गई तो वरना कार वाले मुलाजिम पहली मंजिल पर पहुंच गए। वहां पर 6.5 करोड़ रुपये थे और उन्होंने उस राशि को समेटा और कार में रख लिया। यह पुलिस टीम प्रतापपुरा से पहली पार्टी के निकलने के करीब 15 मिनट बाद निकली और काफी समय बाद खन्ना पहुंची। टीम ने खन्ना जाने लिए अलग रूट का इस्तेमाल किया। जांच में सामने आया कि 70 फीसदी बड़े नोट गायब थे।
डीजीपी दिनकर गुप्ता के आदेश पर आईजी क्राइम प्रवीण कुमार सिन्हा ने केस की जांच की। उन्होंने पाया कि पादरी का 6.5 करोड़ रुपये गायब हुआ था। पुलिस ने वरना कार सवार दोनों एएसआई के अलावा मुखबिर सुरिंदर पर धोखाधड़ी व करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया था। दोनों पुलिस मुलाजिम तो फरार हो गए लेकिन पुलिस ने मुखबिर को काबू कर लिया। एएसआई राजप्रीत व जोगिंदर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है। इससे पहले की जमानत की अर्जी पर फैसला हो पाता, शुक्रवार को केस में डकैती की धारा को जोड़ दिया गया है।
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खन्ना पुलिस ने जिस दिन जालंधर के प्रतापपुरा में छापेमारी की, उस दिन टीम में दो एएसआई जोगिंदर व राजप्रीत थे। उनके साथ पुलिस का मुखबिर सुरिंदर भी था। ये लोग वरना कार से आए थे। जब ग्राउंड फ्लोर पर 9.60 करोड़ रुपये जब्त कर खन्ना पुलिस की पहली पार्टी निकल गई तो वरना कार वाले मुलाजिम पहली मंजिल पर पहुंच गए। वहां पर 6.5 करोड़ रुपये थे और उन्होंने उस राशि को समेटा और कार में रख लिया। यह पुलिस टीम प्रतापपुरा से पहली पार्टी के निकलने के करीब 15 मिनट बाद निकली और काफी समय बाद खन्ना पहुंची। टीम ने खन्ना जाने लिए अलग रूट का इस्तेमाल किया। जांच में सामने आया कि 70 फीसदी बड़े नोट गायब थे।
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डीजीपी दिनकर गुप्ता के आदेश पर आईजी क्राइम प्रवीण कुमार सिन्हा ने केस की जांच की। उन्होंने पाया कि पादरी का 6.5 करोड़ रुपये गायब हुआ था। पुलिस ने वरना कार सवार दोनों एएसआई के अलावा मुखबिर सुरिंदर पर धोखाधड़ी व करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया था। दोनों पुलिस मुलाजिम तो फरार हो गए लेकिन पुलिस ने मुखबिर को काबू कर लिया। एएसआई राजप्रीत व जोगिंदर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है। इससे पहले की जमानत की अर्जी पर फैसला हो पाता, शुक्रवार को केस में डकैती की धारा को जोड़ दिया गया है।
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‘खुद का बचाने के लिए मुखबिर को फंसा रही पुलिस’
जालंधर के पादरी एंथनी के घर से मिले 6 करोड़ रुपये के करीब रकम गायब होने के मामले में खन्ना पुलिस की ओर से गिरफ्तार मुखबिर सुरेंद्र सिंह निवासी नौशहरा खुर्द जिला पठानकोट की पत्नी और और पारिवारिक मेंबरों ने मामले में सुरेंद्र सिंह को बेकसूर बताया।
मुखबिर सुरिंद्र सिंह की पत्नी राजविंदर कौर ने बताया कि पुलिस अपने कर्मचारियों को बचाने के सुरिंद्र सिंह को फंसा रही है। उन्होंने बताया कि सुरिंद्र सिंह ने कुछ वर्ष पूर्व पठानकोट में कंप्यूटर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी खोली थी, जिसमें आनलाइन कंप्यूटर शिक्षा दी जाती थी, लेकिन कुछ समय बाद ही कंपनी बंद करनी पड़ी।
सुरेंद्र के पिता गुरनाम सिंह जो कि एक किसान हैं, पिता गुरनाम सिंह ने सुरेंद्र सिंह को कंपनी में घाटा पड़ने के बाद कहा कि खेतीबाड़ी में उनका हाथ बंटाए। सुरिंद्र सिंह की पत्नी ने कहा कि पुलिस के इल्जाम बेबुनियाद हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि मामले की बारीकी से जांच की जाए और जो दोषी हैं उन पर कार्रवाई हो।
14 अप्रैल को पता चला कि सुरिंद्र पर दर्ज है मामला
पत्नी राजविंदर कौर ने बताया कि कंपनी बंद होने के बाद सुरिंद्र ने प्राइवेट कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। उन्हें पूरे मामले की जानकारी 14 अप्रैल को मिली जब पुलिस उनके घर पहुंची। घर आकर पुलिस ने पैसों के संबंध में पूछताछ की। राजविंद्र ने दावा किया कि वह गरीब जरूर हैं लेकिन उनका पति ऐसे काम नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच की जाए तो सुरिंद्र को इंसाफ मिल सकता है।
मुखबिर सुरिंद्र सिंह की पत्नी राजविंदर कौर ने बताया कि पुलिस अपने कर्मचारियों को बचाने के सुरिंद्र सिंह को फंसा रही है। उन्होंने बताया कि सुरिंद्र सिंह ने कुछ वर्ष पूर्व पठानकोट में कंप्यूटर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी खोली थी, जिसमें आनलाइन कंप्यूटर शिक्षा दी जाती थी, लेकिन कुछ समय बाद ही कंपनी बंद करनी पड़ी।
सुरेंद्र के पिता गुरनाम सिंह जो कि एक किसान हैं, पिता गुरनाम सिंह ने सुरेंद्र सिंह को कंपनी में घाटा पड़ने के बाद कहा कि खेतीबाड़ी में उनका हाथ बंटाए। सुरिंद्र सिंह की पत्नी ने कहा कि पुलिस के इल्जाम बेबुनियाद हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि मामले की बारीकी से जांच की जाए और जो दोषी हैं उन पर कार्रवाई हो।
14 अप्रैल को पता चला कि सुरिंद्र पर दर्ज है मामला
पत्नी राजविंदर कौर ने बताया कि कंपनी बंद होने के बाद सुरिंद्र ने प्राइवेट कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। उन्हें पूरे मामले की जानकारी 14 अप्रैल को मिली जब पुलिस उनके घर पहुंची। घर आकर पुलिस ने पैसों के संबंध में पूछताछ की। राजविंद्र ने दावा किया कि वह गरीब जरूर हैं लेकिन उनका पति ऐसे काम नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच की जाए तो सुरिंद्र को इंसाफ मिल सकता है।