पंजाब में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कैदियों की पेशी की तैयारी, रोजाना होगी 45 लाख की बचत
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प्रदेश की जेलों को हाईटेक करने की दिशा में पंजाब सरकार ने एक और फैसला लिया है। कैदियों की कोर्ट में पेशी के दौरान होने होने वाले खर्च पर अंकुश लगाने के लिए कैदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी कराने की तैयारी की जा रही है। सरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सहयोग से इस कार्य के ट्रायल के लिए नियम जारी करेगी। इससे सरकार को रोजाना 45 लाख रुपये की बचत होगी।
पंजाब की जेलों को हाईटेक करने और खर्च कम करने की दिशा में तेलंगाना मॉडल को अपनाने का निर्णय किया है। इसके लिए पंजाब सरकार ने जेल बोर्ड का भी गठन किया है। जेलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने राज्य की 12 जेलों में ही इंडियन ऑयल के सहयोग से पेट्रोल पंप स्थापित करने का निर्णय किया है। साथ ही अपराधियों की कोर्ट में पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करवाकर 45 लाख रुपये बचाने की तैयारी की जा रही है। इससे तेलंगाना के बाद पंजाब देश का दूसरा ऐसा राज्य हो जाएगा, जहां कैदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी।
तैयार हो रहे 105 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग स्टूडियो
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अपराधियों की पेशी के लिए पंजाब की 12 जेलों में 105 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग स्टूडियो तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 13 जेलों कपूरथला, होशियारपुर, अमृतसर, बठिंडा, लुधियाना, पटियाला, फरीदकोट, फिरोजपुर, संगरूर, रोपड़, मुक्तसर, न्यू जेल नाभा और उच्च सुरक्षा जेल नाभा में उच्च सुरक्षा जोन बनाए गए हैं, जिनमें गैंगस्टरों और ए कैटेगरी के कैदियों की गैर कानूनी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
राज्य की जेलों के ढांचे को मजबूत करने और जेलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई रूपरेखा तैयार की गई है। तेलंगाना राज्य में इस समय जेलों का बेहतर मॉडल है, जिस कारण पंजाब की जेलों में भी तेलंगाना मॉडल को अपनाया जाएगा। तेलंगाना की तर्ज पर ही जेलों के सुधारीकरण को लेकर कार्य किए जा रहे हैं। - सुखजिंदर सिंह रंधावा, जेल मंत्री, पंजाब सरकार।