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कभी ओलंपिक में भाग लेने वाले भारतीय दल में पंजाबियों का होता दबदबा, ऐसे गिरता गया ग्राफ

Sun, 30 Aug 2020 11:50 AM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 30 Aug 2020 11:50 AM IST
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Punjab News in Hindi: Punjab's dominance in sports is decreasing
परगट सिंह, सुरिंदर सिंह सोढी - फोटो : अमर उजाला

पंजाब ने कभी खेलों में दुनिया भर में अपने नाम का जबरदस्त डंका बजा रखा था फिर चाहे वह हॉकी हो या कबड्डी। 1968 का एक दौर वह भी था, जब मैक्सिको ओलंपिक में भेजे गए भारतीय खिलाड़ियों के 25 सदस्यीय दल में 13 खिलाड़ी पंजाब से थे। हॉकी और एथलेटिक्स के सहारे खेलों में पंजाब का दबदबा कायम करने वाले पंजाब के खिलाड़ी आज सरकार की उदासीनता के चलते दूसरे राज्यों या देशों से खेलने को प्राथमिकता दे रहे हैं। 

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पंजाब के ओलंपियन गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं। पंजाब ने खेल के मामले में एक समय ऐसा भी देखा है, जब हरियाणा के खिलाड़ियों में पंजाब से खेलने की होड़ लगी रहती थी। तेजी से नशा और विदेश जाने का क्रेज युवाओं पर इस कदर हावी हुआ कि पंजाब खेलों में पिछड़ता ही गया।
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स्कूली स्तर से हालात खराब
जनवरी में पुणे में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की ओर से करवाई गए खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पंजाब के खिलाड़ियों का प्रदर्शन एकदम निराशाजनक रहा। महाराष्ट्र मेडल तालिका में पहले स्थान, दिल्ली दूसरे व हरियाणा ने तीसरे स्थान पर जगह बनाई। पंजाब छह स्वर्ण पदक के साथ आठवें स्थान पर रहा। हालांकि खेल विभाग दावा कर रहा था कि खेलो इंडिया गेम्स में पंजाब दूसरे या तीसरे नंबर पर काबिज रहेगा। खेलो इंडिया गेम्स में देशभर से 9000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। 432 खिलाड़ी पंजाब के थे।

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रिकार्ड गोल करने वाला 1980 का हीरो जी रहा गुमनाम जिंदगी

1980 में भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसमें पंजाब के सुरिंदर सिंह सोढी ने सबसे अधिक गोल कर रिकॉर्ड कायम किया था। 1956 में ऊधम सिंह ने 15 गोल दागे थे और सुरिंदर सोढी ने 1980 में ओलंपिक में 15 गोल दागकर रिकॉर्ड बराबर किया था। अब सोढी पंजाब के आईजी पद से रिटायर होकर गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं। 

वह बताते हैं कि एक बार दिल्ली में इंदिरा गांधी गोल्ड कप का आयोजन किया गया था और केंद्रीय खेल मंत्रालय ने तमाम ओलंपियन का सम्मान करने के लिए बुलाया था। हमें अलग सीटों पर बैठाया गया जो स्टेडियम से दूर थीं। जब तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव वहां पहुंचे तो खुद हमें आकर मिले और कहा कि आप देश के रोल मॉडल हैं। इसलिए मैं खुद चलकर आपसे मिलने आ रहा हूं। यही रोल मॉडल अब घरों में बैठे हुए हैं, उन्हें किसी सरकारी समारोह में नहीं बुलाया जाता। 

किसी भी जिले के डीसी को इतना पूछ लो कि आपके जिले में कितने ओलंपियन है तो वह उत्तर नहीं दे पाएगा। जब गेम्स के हीरो की हालत यह है तो युवाओं में क्या क्रेज पैदा होगा। वैसे पंजाब में अब इंफ्रास्ट्रकचर, नए कोच की कमी है। कई छोटे-छोटे देशों में 300 एस्टर्फ हैं लेकिन भारत में गिनती के होंगे। जमीनी हकीकत यह है कि नशे को सिर्फ खेल खत्म कर सकता है। खेलों में मैदान फतेह कर चुके लोगों को स्कूलों में विजिट करवाना चाहिए, बच्चों में उत्सुकता पैदा होगी तो वह खुद खेल की तरफ आकर्षित होंगे।

एक जुराब का टेंडर तक नहीं किया सरकार ने, खेलों में कैसे बढ़ेगा पंजाब 
हॉकी खिलाड़ी और कांग्रेस विधायक पद्मश्री परगट सिंह का कहना है कि मौजूदा सरकार ने एक जुराब तक का टेंडर नहीं किया है तो हम खेलों में कैसे उठ सकते हैं? सरकार खेल खिलाड़ियों के प्रति उदासीन है। यही वजह है कि पंजाब अब खेलों में काफी पिछड़ चुका है। मैदानों की कमी है। इसलिए बच्चों के रोल मॉडल अब खिलाड़ी नहीं बल्कि बंदूक-गंडासी की बात करने वाले गायक हैं। यह पंजाब की असली तस्वीर है। बेशक मैं सत्ताधारी पार्टी से हूं लेकिन विधानसभा में भी मैंने साफ कहा था कि पंजाब में खेल और खिलाड़ियों की हालत बदतर हो चुकी है। इसी कारण आज हरियाणा पंजाब से आगे निकल चुका है।

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