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उम्मीदें: वादों को पूरा करने में ताकत झोंकेगी सरकार, विपक्ष भी मोर्चाबंदी कर खोजेगा जनाधार

Sat, 02 Jan 2021 03:50 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 02 Jan 2021 03:50 AM IST
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Punjab News in Hindi: Politics will be heat up in Punjab in 2021
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

पंजाब के लिए नववर्ष 2021 चुनावी साल के रूप में आया है। मार्च-अप्रैल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्ताधारी कांग्रेस समेत सभी सियासी दल इस साल खुद को तैयार करने में पूरी ताकत झोंक देंगे। कांग्रेस के लिए जहां 2021 जनता से किए वादे पूरे कर अपनी पैठ को मजबूत करने का रहेगा तो वहीं विपक्षी दलों में जनता का विश्वास जीतने की होड़ लगेगी।

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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार इस साल रोजगार, मुलाजिमों के लिए नए वेतनमान, किसानों की कर्ज माफी के बकाया मामले, युवाओं को मुफ्त स्मार्टफोन और अपने पिछले वादों पूरे करने पर खूब खर्च करेगी। वहीं इस साल के बजट में आम लोगों को कुछ और राहत मिलेगी। जिनमें पेट्रोल-डीजल, एक्साइज दरों और बिजली दरों में इजाफा न किया जाना भी शामिल है। 
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बीते पांच साल से लंबित छठे वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे राज्य सरकार इसी साल हर हाल में लागू करेगी। हालांकि फंड की कमी से जूझती सरकार मुलाजिमों के डीए की बकाया राशि चुकाने को लेकर टालमटोल की स्थिति बन सकती है। फिर भी इस साल राज्य सरकार एक लाख सरकारी नौकरियों के अवसर आम जनता के सामने पेश करेगी।
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खास बात यह है कि नई नौकरियों में वेतनमान केंद्र के सातवें वेतन आयोग के समान दिया जाएगा। पंजाब सरकार के मौजूदा वेतनमानों से कुछ कम रहेगा। युवाओं को मुफ्त स्मार्टफोन बांटने के पहले चरण में सरकार ने 2020 में एक लाख से अधिक फोन वितरित कर दिए हैं और नए साल में इस वादे के तहत 12वीं के सभी विद्यार्थियों को मोबाइल फोन दिए जाएंगे।

दूसरी ओर, विपक्षी दल भी विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों के रूप में इस साल राज्य सरकार को हर मोर्चे पर घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाले। अकाली दल पर बरगाड़ी और बहिबल कलां कांड के सबसे बड़े आरोप हैं। पार्टी के लिए ये आरोप सिरदर्द बने हैं। जिनसे निकलकर सूबे के किसानों का समर्थन हासिल करना पार्टी की नैया पार करा सकता।

वहीं अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा ने पंजाब की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का बिगुल बजा दिया है। लेकिन किसान आंदोलन ने उसकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। अब तक पार्टी राज्य के तीन-चार जिलों तक ही सीमित रही थी और ग्रामीण इलाकों में वैसे ही भाजपा की कोई पैठ नहीं है। 

आंदोलन के कारण बदले समीकरणों में भाजपा पंजाब में इस साल वजूद की लड़ाई लड़ेगी। मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी इस साल फिर से जनसंपर्क अभियान शुरू करेगी लेकिन पार्टी की मुश्किल ऐसे कद्दावर नेता की कमी है, जो राज्य में अपने बूते पर पार्टी को मजबूती से स्थापित कर सके। वैसे किसान आंदोलन के दौरान आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को घेरने और खुद को किसानों की प्रमुख हिमायती पार्टी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

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