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पंजाब: सभी दल चाहते हैं किसानों का साथ...क्योंकि सत्ता की चाबी अन्नदाता के हाथ

Wed, 23 Sep 2020 04:19 AM IST
ajay kumar अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 23 Sep 2020 04:19 AM IST
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Punjab News in Hindi: Many political parties in Punjab supported the farmer Protest
धरने पर बैठे किसान (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

कृषि अध्यादेश को लेकर हो रहे विरोध के बीच राजनीतिक दलों के लिए पंजाब के अन्नदाता का साथ छोड़ना आसान नहीं हैं। यह एक बड़ा वोट बैंक है। पूरे पंजाब में 65 फीसदी आबादी ऐसी है, जो खेती-किसानी के कार्य से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि किसानों के इस आंदोलन में सत्तासीन कांग्रेस सहित विपक्षी दल भी उनका साथ देने को मजबूर हैं। 

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117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में 66 सीटें ऐसी हैं, जिनका स्वरूप पूरी तरह से ग्रामीण हैं। 34 सीटें अर्धशहरी और 17 सीटें शहरी परिवेश की मानी जाती हैं। 66 विधानसभा सीटों में सूबे के कुल 1.90 करोड़ वोटरों में से 1.15 करोड़ से अधिक की संख्या ग्रामीण क्षेत्र में रहकर खेती का कार्य करती है। 
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30 लाख हैं खेत मजदूर 
सूबे में 17 लाख से अधिक काश्तकार हैं जो सिर्फ खेती करके ही अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। आंदोलनरत किसान संगठनों दावा किया है कि किसानों के साथ ही प्रदेश के 20 से 30 लाख खेत मजदूर भी कृषि विधेयक को लेकर सहमा हुआ है। खेती को होने वाले नुकसान के कारण उन्हें भी अपना भविष्य अंधेरे में ही नजर आ रहा है। यही कारण है कि खेत मजदूर भी किसान आंदोलन के समर्थन में है। 
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2017 में कांग्रेस में जीत में किसानों का बड़ा हाथ  
पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में किसानों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। 77 विधानसभा सीटों पर विजय हासिल करने वाली कांग्रेस ने 40 ऐसी सीटों पर जीत दर्ज की, जो पूरी तरह से ग्रामीण हैं या किसानों की हैं। पंजाब में मुख्य रूप से सिख आबादी है जो किसान के रूप में जानी जाती है। इन सभी 40 सीटों में आम आदमी पार्टी 30 पर तीसरे स्थान पर रही। इन चुनाव परिणामों के बाद शिअद और आप सहित भाजपा भी यह जान गई कि किसानों के साथ मिलकर ही सत्ता का रास्ता पकड़ा जा सकता है। 

तरनतारन में सबसे अधिक किसान

सूबे के तरनतारन जिले में सबसे अधिक किसान रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों मे इनका प्रतिशत 96.1 और शहरी क्षेत्रों में 73.9 फीसदी है। यहां की चारों सीटों खडूर साहिब, पट्टी, तरनतारन और खेमकरन पर कांग्रेस विजयी रही। यही हाल अमृतसर जिले का रहा। अमृतसर की छह ग्रामीण सीटों में से पांच पर कांग्रेस विजयी रही थी। अमृतसर जिले में 91.2 प्रतिशत किसान रहते हैं। इसके अलावा गुरदासपुर, फतेहगढ़ साहिब, मोगा में भी ग्रामीण आबादी है और यहां पर किसानों का ही दबदबा है।

हमारे लिए किसानों का साथ देना राजनीतिक मजबूरी नहीं है। जो पूरे देश का पेट भरता हो, वह मजबूरी कैसे हो सकता है। मोदी सरकार का हमेशा से यह ध्येय रहा है कि अन्नदाता का जीवन स्तर ऊंचा करना है। इसी के तहत सरकार यह बिल लाई है। यदि इन बिलों को अच्छी तरह से पढ़ा जाएगा तो सारे भ्रम टूट जाएंगे। - अश्वनी शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा 

जब पंजाब में पानी का संकट गहराया था तो मुख्यमंत्री ने पंजाब के पानी को बचाने के लिए वाटर टर्मिनेशन एक्ट को खत्म किया था। आज भी कांग्रेस ने कृषि विधेयक के अस्तित्व में आने के बाद ही स्पष्ट कर दिया था कि यह किसानों के भविष्य को रौंद कर रख देगा। किसानों के इस संकट में भी कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। - सुनील जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

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