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विदेश भेजने के नाम पर ठगी: हाईकोर्ट ने कहा-ऐसे मामलों में नरमी की गुंजाइश नहीं, आरोपी की जमानत याचिका खारिज

Sat, 29 Aug 2026 10:38 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 29 Aug 2026 10:38 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों को ऐसे संगठित गिरोहों के प्रति सतर्क रहना होगा और शुरुआती अवस्था में राहत देकर उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर और स्पष्ट हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

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Fraud under guise of sending people abroad High Court accused bail plea rejected
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने विदेश भेजने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ऐंठने वाले गिरोहों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि इमिग्रेशन संबंधी सलाह के नाम पर होने वाली मानव तस्करी एक गंभीर और लगातार बढ़ती समस्या है। ऐसे गिरोह विदेश जाने का सपना देखने वाले भोले-भाले लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
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सतपाल सिंह ने संगरूर में 30 जून 2025 को दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत मांगी थी। उन पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और पंजाब मानव तस्करी के तहत आरोप हैं। शिकायतकर्ता महिला को कनाडा भेजने का भरोसा देकर 5.80 लाख रुपये लिए गए थे।
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जांच में सामने आया कि करीब 5.50 लाख रुपये आरोपी के खाते में जमा हुए थे। महिला को कनाडा नहीं भेजा गया और पूरी रकम भी वापस नहीं की गई। पुलिस ने अदालत को बताया कि रकम की बरामदगी और मामले की पूरी साजिश का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
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आरोपी की दलीलें और अदालत का रुख  
आरोपी ने दलील दी कि यह मामला मूल रूप से पैसों के लेन-देन का विवाद है। उसने खुद को झूठा फंसाया जाने का दावा किया। बचाव पक्ष ने कहा कि बैंक अभिलेख, चेक, यूपीआई और व्हाट्सएप बातचीत जैसे दस्तावेज जांच एजेंसी के पास पहले से मौजूद हैं। इस वजह से हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल पैसों की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। 


गंभीर आरोप और न्यायिक सतर्कता  
हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें मानव तस्करी और सीमा पार अवैध प्रवासन जैसे गंभीर पहलू जुड़े हुए हैं। ऐसी गतिविधियां पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचातीं हैं। ये कानूनी तरीके से विदेश जाने की पूरी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करती हैं। अदालतों को ऐसे संगठित गिरोहों के प्रति सतर्क रहना होगा और शुरुआती अवस्था में राहत देकर उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर और स्पष्ट हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
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