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निकाय चुनाव में कांग्रेस की जीत : पंजाब में अभेद कैप्टन का किला, सिद्धू को झटका दे सकते हैं ये नतीजे

Thu, 18 Feb 2021 02:25 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 18 Feb 2021 02:25 AM IST
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Punjab Municipal Election 2021 Result: Capt Amarinder singh is real hero of Congress victory in Punjab Municipal Election
कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो)

पंजाब के निकाय चुनाव में कांग्रेस की जोरदार जीत ने एक बार फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह को न सिर्फ सूबे की सियासत में किंग साबित कर दिया, बल्कि कांग्रेस आलाकमान की गुडबुक में कैप्टन सबसे ऊपर आ गए हैं। कैप्टन की ऐसी ही छवि बीते 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उभर कर सामने आई थी, जब लोकसभा चुनाव में पूरे देश में कांग्रेस का प्रदर्शन केवल पंजाब में ही बेहतर रहा था। 

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ठीक उसी तरह 2017 के चुनाव में भी कैप्टन के नेतृत्व में कांग्रेस बहुमत हासिल करने में सफल रही थी। निकाय चुनाव में शानदार जीत ने प्रदेश में कांग्रेस को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साह से भर दिया है। इन चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत का सेहरा कैप्टन द्वारा तीन केंद्रीय कृषि कानूनों पर लिए गए कड़े स्टैंड को दिया जा रहा है।
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दरअसल, कैप्टन ने ही तीन कृषि कानूनों का सबसे पहले विरोध किया था। उन्होंने खामियां गिनाई तो पंजाब समेत देशभर के किसानों ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया। कैप्टन ने तीनों कृषि कानूनों का विरोध करते हुए पंजाब विधानसभा में विधेयक पारित कर साबित कर दिया कि वे आंदोलन कर रहे किसानों के साथ डटकर खड़े हैं। 

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विधानसभा में विधेयक पारित करने के बाद हालात ऐसे भी दिखाई दिए कि कैप्टन ने केंद्र को खुली चुनौती दी कि केंद्र चाहे तो उनकी सरकार गिरा दे। इसी मजबूत कदमों ने कैप्टन को पंजाब में किसानों, मजदूरों के साथ-साथ उन सभी लोगों की नजर में हीरो बना दिया है, जो किसान आंदोलन को सही मानते हुए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही निकाय चुनाव में मिली जीत का एक असर यह भी दिखाई दिया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा किसान आंदोलन को लेकर गंभीर चिंतन में जुट गई है। 

भाजपा को पंजाब में अपने खराब प्रदर्शन से अब यह लगने लगा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर भारत के किसानों की नाराजगी उसे जोरदार झटका दे सकती है। हालांकि भाजपा शासित राज्यों में किसानों का आंदोलन कमजोर रहा लेकिन केंद्रीय भंडार में सबसे ज्यादा अनाज का योगदान देने वाले पंजाब के किसान सड़कों पर उतर आए हैं।

कैप्टन का ही प्रभाव था कि किसानों ने अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखा। 26 जनवरी को लाल किला हिंसा के समय भी कैप्टन सबसे पहले ऐसे नेता रहे, जिन्होंने हिंसा की निंदा करते हुए यहां तक कहा कि पाकिस्तान ऐसी ही हिंसा चाहता था। 

सिद्धू का कद बढ़ाने की कवायद फिर ठंडे बस्ते में
निकाय चुनाव में कैप्टन के नेतृत्व में कांग्रेस की जोरदार जीत ने उस कवायद को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है, जिसके तहत नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस में कैप्टन के बराबर कोई ओहदा देने की कोशिशें तेज हुई थीं। पार्टी के प्रदेश मामलों के प्रभारी हरीश रावत तो सिद्धू को सोनिया गांधी से मिलाने के बाद पंजाब लौटकर कैप्टन से भी मिले और उन्हें सिद्धू को लेकर सोनिया गांधी का संदेश सुनाया। 

माना जा रहा था कि हरीश रावत सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या उप मुख्यमंत्री का पद दिलाना चाह रहे थे, जबकि कैप्टन सिद्धू को फिर से कैबिनेट में लेने के ही पक्ष में रहे। आलाकमान के जरिये कैप्टन पर बनाए जा रहे दबाव को निकाय चुनाव में पार्टी की जीत ने लगभग बेअसर कर दिया है, क्योंकि आलाकमान के सामने कैप्टन का कद इतना बढ़ा है कि वे अपनी बात मनवा सकते हैं।

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