{"_id":"5b7288c29dd1e5cc9ddd8c322b5810cf","slug":"punjab-milling-policy-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब ने तैयार की नई मिलिंग पॉलिसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब ने तैयार की नई मिलिंग पॉलिसी
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Tue, 19 Aug 2014 10:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार ने इस बार कई बदलावों के साथ नई मिलिंग पॉलिसी तैयार की है। इस नई पॉलिसी के तहत राइस मिलों को उनकी मिलिंग क्षमता के हिसाब से धान अलॉट नहीं होगा बल्कि उनकी डिलीवरी स्टेट्स के मुताबिक ही उन्हें इस बार धान की अलॉटमेंट होगी। राइस मिल मालिकों को अलॉटमेंट के हिसाब से कार्ड भी जारी होंगे जो अलॉटमेंट के आंकड़ों तक ही चालू रहेंगे। इस नई पॉलिसी को आगामी दिनों में लांच कर दिया जाएगा।
पंजाब में स्थिति यह है कि यहां पर 2700 के करीब राइस मिलें चल रही हैं। इन मिलों को हर साल औसतन 130 लाख टन गेहूं मिलिंग के लिए अलॉट किया जाता है। हालांकि इस बार संभावना जताई जा रही है कि पंजाब में बासमती के अधीन रकबा बढ़ने से साधारण धान के उत्पादन में 10 से 20 लाख टन की कमी आ सकती है। ऐसे में धान के मंडियों में पहुंचने से पहले इस बार समय रहते ही विभाग ने अपनी मिलिंग पॉलिसी को अंतिम रूप दे दिया है। जिसमें कई तरह के बदलाव किए गए हैं। इस बार अच्छे ढंग से समय रहते चावल की डिलीवरी करने वाली मिलों को फायदा होगा जबकि ढिलाई बरतने वाली मिलों को धान की कम अलॉटमेंट की जाएगी।
फूड एंड सप्लाई विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को पंजाब सरकार ने नई मिलिंग पॉलिसी तैयार कर ली है। इस पॉलिसी में बताया गया है कि इस बार यह राइस मिलों को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि मंडियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। हर मिल को धान की अलॉटमेंट नजदीक की मंडियों के हिसाब से की गई है। लिहाजा जिस मंडी के पास जो मिलें होंगी उन्हें वहीं से धान अलॉट की जाएगी।
विज्ञापन
जिन राइस मिलों ने अपनी अलॉट धान के चावल की डिलीवरी जनवरी में कर दी थी उन्हें इस बार 20 फीसदी ज्यादा धान मिलिंग के लिए दिया जाएगा। वहीं फरवरी में चावल डिलीवरी करने वाली मिलों को 15 फीसदी, मार्च में डिलीवरी करने वालों को 10 फीसदी और अप्रैल में डिलीवरी करने वालों को पांच फीसदी ज्यादा धान दिया जाएगा। इसके बाद चावल डिलीवरी करने वाली राइस मिलों को उतना ही धान दिया जाएगा जितना चावल तैयार कर उन्होंने डिलीवर किया है।
वहीं हर राइस मिल मालिक को इस बार अलॉटमेंट रिकॉर्ड के मुताबिक एक कार्ड इश्यू किया जाएगा। जितनी बार भी वो मंडियों से धान उठाएगा उसे यह कार्ड स्वाइप करना होगा। जब उसकी अलॉटमेंट के मुताबिक उठान हो जाएगा, यह कार्ड काम करना बंद कर देगा। फूड एंड सप्लाई विभाग के सचिव डीएस ग्रेवाल ने नई पॉलिसी बनने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह पॉलिसी सही आवंटन में काफी फायदेमंद साबित होगी।
विज्ञापन
पंजाब में स्थिति यह है कि यहां पर 2700 के करीब राइस मिलें चल रही हैं। इन मिलों को हर साल औसतन 130 लाख टन गेहूं मिलिंग के लिए अलॉट किया जाता है। हालांकि इस बार संभावना जताई जा रही है कि पंजाब में बासमती के अधीन रकबा बढ़ने से साधारण धान के उत्पादन में 10 से 20 लाख टन की कमी आ सकती है। ऐसे में धान के मंडियों में पहुंचने से पहले इस बार समय रहते ही विभाग ने अपनी मिलिंग पॉलिसी को अंतिम रूप दे दिया है। जिसमें कई तरह के बदलाव किए गए हैं। इस बार अच्छे ढंग से समय रहते चावल की डिलीवरी करने वाली मिलों को फायदा होगा जबकि ढिलाई बरतने वाली मिलों को धान की कम अलॉटमेंट की जाएगी।
विज्ञापन
फूड एंड सप्लाई विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को पंजाब सरकार ने नई मिलिंग पॉलिसी तैयार कर ली है। इस पॉलिसी में बताया गया है कि इस बार यह राइस मिलों को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि मंडियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। हर मिल को धान की अलॉटमेंट नजदीक की मंडियों के हिसाब से की गई है। लिहाजा जिस मंडी के पास जो मिलें होंगी उन्हें वहीं से धान अलॉट की जाएगी।
विज्ञापन
जिन राइस मिलों ने अपनी अलॉट धान के चावल की डिलीवरी जनवरी में कर दी थी उन्हें इस बार 20 फीसदी ज्यादा धान मिलिंग के लिए दिया जाएगा। वहीं फरवरी में चावल डिलीवरी करने वाली मिलों को 15 फीसदी, मार्च में डिलीवरी करने वालों को 10 फीसदी और अप्रैल में डिलीवरी करने वालों को पांच फीसदी ज्यादा धान दिया जाएगा। इसके बाद चावल डिलीवरी करने वाली राइस मिलों को उतना ही धान दिया जाएगा जितना चावल तैयार कर उन्होंने डिलीवर किया है।
वहीं हर राइस मिल मालिक को इस बार अलॉटमेंट रिकॉर्ड के मुताबिक एक कार्ड इश्यू किया जाएगा। जितनी बार भी वो मंडियों से धान उठाएगा उसे यह कार्ड स्वाइप करना होगा। जब उसकी अलॉटमेंट के मुताबिक उठान हो जाएगा, यह कार्ड काम करना बंद कर देगा। फूड एंड सप्लाई विभाग के सचिव डीएस ग्रेवाल ने नई पॉलिसी बनने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह पॉलिसी सही आवंटन में काफी फायदेमंद साबित होगी।