फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Loksabha Election Review

सबसे कद्दावर नेता बनकर उभरे कैप्टन अमरिंदर सिंह

Sat, 17 May 2014 09:06 AM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 17 May 2014 09:06 AM IST
विज्ञापन
Punjab Loksabha Election Review

लोक सभा चुनाव में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रदेश कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता बनकर उभरे हैं। इस चुनाव में देशभर में कांग्रेस की इतिहास की सबसे बुरी हार के बीच जहां अधिकांश राज्यों में कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया है, इस विरोधी लहर के बीच कैप्टन ने भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण जेटली को बड़े अंतर से हराया है।

विज्ञापन


पंजाब में कैप्टन के अलावा सिर्फ दो और कांग्रेसी नेता जीते, जिनमें लुधियाना सीट पर जीत का अंतर बहुत मामूली रहा है। अंबिका सोनी, सुनील जाखड़ जैसे नेता चुनाव हार गए हैं। उधर, प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के लिए यह चुनाव अच्छे नहीं रहे। वह खुद भी भारी अंतर से हारे और प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन भी काफी खराब रहा।
विज्ञापन


प्रदेश कांग्रेस में वर्चस्व के लिए कैप्टन अमरिंदर और प्रताप बाजवा के बीच जंग काफी समय से चलती आ रही है। कैप्टन जब मुख्यमंत्री थे, या फिर प्रदेश प्रधान थे, तभी से बाजवा उनकी मुखालफत करते आ रहे हैं। कैप्टन की अगुवाई में 2012 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस हार गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसके बाद बाजवा को प्रदेश प्रधान बनाया गया। फिर भी दोनों दिग्गजों के सुर कभी नहीं मिले। प्रदेश में ड्रग्स के मुद्दे पर बाजवा ने सीबीआई जांच की मांग की तो कैप्टन ने पंजाब पुलिस की पीठ ठोकी। कई बार तो दोनों के बीच बयानबाजी काफी तीखी भी हुई।

इस लोकसभा चुनाव में दोनों दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर थी। तय माना जा रहा था कि दोनों में से हारने वाले नेता की स्थिति पार्टी की प्रदेश इकाई में कमजोर हो जाएगी। अब बाजवा अपनी सीट नहीं बचा सके और भाजपा के विनोद खन्ना से 1.39 लाख के बड़े अंतर से हार गए हैं।

पंजाब में कांग्रेस सिर्फ तीन सीटें ही जीत सकी जबकि, पिछली बार कांग्रेस कैप्टन की अगुवाई में आठ सीटें जीती थी। बाजवा केलिए राहत की बात एक ही है कि हरियाणा, राजस्थान के भी प्रदेश प्रधान चुनाव हार गए हैं। कांग्रेस का प्रदर्शन पूरे देश में खराब रहा है। इसके बावजूद प्रदेश की सियासत में वह कमजोर हुए हैं।

बाजवा ने प्रचार के दौरान खुद को माझा से मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया था। चुनाव में हारने केबाद उनका यह दावा अब आगामी विधानसभा चुनाव में कमजोर रहेगा, वहीं कैप्टन को पहले से पंजाब का सबसे कद्दावर कांग्रेस नेता माना जाता रहा है। इस बार वह जेटली के साथ कड़े मुकाबले में थे।

फिर भी उन्होंने जेटली के खिलाफ एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। इससे पंजाब की सियासत में कैप्टन का कद और बढ़ेगा। माना जा रहा है कि चुनाव के बाद कुछ दिन की खामोशी के बाद प्रदेश प्रधान के पद को लेकर पंजाब कांग्रेस में जोर-आजमाइश शुरू हो जाएगी।


ये कहते हैं कैप्टन
यह जीत पंजाब के लोगों और गुरु महाराज की जीत है। लोगों ने पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार की गुंडागर्दी वाली नीतियों के खिलाफ फैसला देकर उनको जीत दिलाई है। लोगों ने अमृतसर में अकाली-भाजपा गठजोड़ के उम्मीदवार को पराजित करके यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर गुंडाराज सहन नहीं कर सकते। अगले विधानसभा चुनाव में भी पंजाब की जनता अकाली-भाजपा को परास्त करेगी।
- अमरिंदर सिंह, अमृतसर से कांग्रेसी के जीते उम्मीदवार

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed