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‘काके नूं जो वी दयो, कैमरे तों बचा के देणा’
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 12 Apr 2014 10:01 AM IST
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पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जालंधर से प्रत्याशी पवन टीनू के लिए चुनाव प्रचार करते हुए कहा कि टीनू को जिताकर संसद में भेजें, ताकि वे पंजाब के मुद्दों को वहां उठाएं। इसी दौरान बादल ने यह भी कहा कि आज चुनाव लड़ने पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। प्रत्याशियों के लिए यह आसान नहीं है।
बादल ने इशारों-इशारों में उद्यमियों से अपील की कि ‘टीनू नू वोट दिओ अते जिन्नी हो सके मदद करो।’ इसके साथ ही बादल ने यह भी कहा- ‘जो कुछ वी दिओ, उस बारे ख्याल रखो, कैमरे दे सामणे न देओ, चुनाव आयोग दी नजर से बचाके दिओ।’ मुख्यमंत्री के इस बयान पर प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जालंधर से उम्मीदवार पवन टीनू की मदद के लिए उद्यमियों से चंदा देने को कहा है, जोकि आचार संहिता का उल्लंघन है। खैहरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
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खैहरा ने शिकायत में कहा है कि विभिन्न समाचार चैनलों में प्रसारित रिपोर्ट में सीएम को टीनू के लिए उद्यमियों से फंड देने के लिए कहते हुए दिखाया गया है। बादल यूनिसन इंडस्ट्री जालंधर में उद्यमियों के एक ग्रुप को संबोधित कर रहे थे।
आरोप लगाया है कि इस मौके पर बादल ने कहा कि चुनाव महंगे हो गए हैं, इसलिए उद्यमी पवन टीनू की चुनाव मुहिम के लिए फंड दें। साथ ही कहा कि फंड चुपचाप दिया जाए, किसी को पता न चले।
खैहरा ने अकाली दल पर विधानसभा और पंचायत चुनाव में वोट खरीदने का आरोप भी लगाया। खैहरा ने आयोग से मांग की कि बादल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि चुनाव निष्पक्ष और आजाद हो सकें।
70 लाख की सीमा पड़ गई कम
खैहरा ने कहा कि चुनाव आयोग ने उम्मीदवार के लिए खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपये निर्धारित की है। ऐसे में बादल के फरमान से स्पष्ट होता है कि उनके उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए 70 लाख रुपये से ज्यादा की जरूरत है। गुपचुप फंड मांगने से साबित होता है कि आयोग द्वारा तय की गई सीमा उनके लिए बेमानी है। खैहरा ने आरोप लगाया कि पंजाब में चुनावी प्रणाली को प्रदूषित करने का जिम्मेदार बादल परिवार ही है। करोड़ों रुपये खर्च करके वे अपने हलकों में जीतते रहे हैं।
खैहरा फंड रेजिंग और भ्रष्टाचार में अंतर समझें : शिअद
चंडीगढ़। पीपीसीसी प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा की ओर से सीएम प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ उद्योगपतियों से फंड मांगने के संबंध में चुनाव आयोग से की गई शिकायत पर शिअद महासचिव एचएस बैंस ने कहा है कि खैहरा को भ्रष्टाचार और फंड रेजिंग में अंतर समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बादल ने ऐसा कुछ नहीं कहा जो कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो। खैहरा को तो शिकायतबाजी की आदत पड़ गई है।
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बादल ने इशारों-इशारों में उद्यमियों से अपील की कि ‘टीनू नू वोट दिओ अते जिन्नी हो सके मदद करो।’ इसके साथ ही बादल ने यह भी कहा- ‘जो कुछ वी दिओ, उस बारे ख्याल रखो, कैमरे दे सामणे न देओ, चुनाव आयोग दी नजर से बचाके दिओ।’ मुख्यमंत्री के इस बयान पर प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है।
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प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जालंधर से उम्मीदवार पवन टीनू की मदद के लिए उद्यमियों से चंदा देने को कहा है, जोकि आचार संहिता का उल्लंघन है। खैहरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
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खैहरा ने शिकायत में कहा है कि विभिन्न समाचार चैनलों में प्रसारित रिपोर्ट में सीएम को टीनू के लिए उद्यमियों से फंड देने के लिए कहते हुए दिखाया गया है। बादल यूनिसन इंडस्ट्री जालंधर में उद्यमियों के एक ग्रुप को संबोधित कर रहे थे।
आरोप लगाया है कि इस मौके पर बादल ने कहा कि चुनाव महंगे हो गए हैं, इसलिए उद्यमी पवन टीनू की चुनाव मुहिम के लिए फंड दें। साथ ही कहा कि फंड चुपचाप दिया जाए, किसी को पता न चले।
खैहरा ने अकाली दल पर विधानसभा और पंचायत चुनाव में वोट खरीदने का आरोप भी लगाया। खैहरा ने आयोग से मांग की कि बादल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि चुनाव निष्पक्ष और आजाद हो सकें।
70 लाख की सीमा पड़ गई कम
खैहरा ने कहा कि चुनाव आयोग ने उम्मीदवार के लिए खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपये निर्धारित की है। ऐसे में बादल के फरमान से स्पष्ट होता है कि उनके उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए 70 लाख रुपये से ज्यादा की जरूरत है। गुपचुप फंड मांगने से साबित होता है कि आयोग द्वारा तय की गई सीमा उनके लिए बेमानी है। खैहरा ने आरोप लगाया कि पंजाब में चुनावी प्रणाली को प्रदूषित करने का जिम्मेदार बादल परिवार ही है। करोड़ों रुपये खर्च करके वे अपने हलकों में जीतते रहे हैं।
खैहरा फंड रेजिंग और भ्रष्टाचार में अंतर समझें : शिअद
चंडीगढ़। पीपीसीसी प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा की ओर से सीएम प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ उद्योगपतियों से फंड मांगने के संबंध में चुनाव आयोग से की गई शिकायत पर शिअद महासचिव एचएस बैंस ने कहा है कि खैहरा को भ्रष्टाचार और फंड रेजिंग में अंतर समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बादल ने ऐसा कुछ नहीं कहा जो कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो। खैहरा को तो शिकायतबाजी की आदत पड़ गई है।