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Election: वादों से बेवफाई पड़ रही भारी... वोटरों में नाराजगी; नशा खत्म न होना और रोजगार न मिलना बड़ा मुद्दा
Mon, 27 May 2024 02:44 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 27 May 2024 02:44 PM IST
सार
लोकसभा चुनाव में मतदाता अधूरे वादों से खफा हैं। नशा खत्म न होना और रोजगार न मिलना बड़ा मुद्दा है। ऐसे में वोटरों में नाराजगी है।
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Punjab Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अधूरे वादों को लेकर सियासी दलों के प्रति जनता की नाराजगी इन दिनों स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है। इस बार भी अधूरे वादों को लेकर मतदाता, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। साथ ही कुछ भावनात्मक मुद्दे और अतीत में किसी घटनाक्रम से जुड़े मुद्दों का असर भी दिखाई दे रहा है।
अधूरे वादों पर बोलने से नेता कन्नी काट रहे हैं और विपक्षी दलों को घेरने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सबसे दिलचस्प है कि सभी दल नए वादों की पिटारी खोलने में जरा भी हिचक नहीं दिखा रहे हैं।
सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने दिल खोल कर पंजाब की जनता से वादे किए थे। इनमें से कुछ वादे तो आप सरकार ने पूरे कर दिए हैं और इसका सकारात्मक असर भी दिख रहा है, लेकिन अधूरे वादे लोकसभा चुनाव में आप के गले की फांस बन रहे हैं।
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महिलाओं को हजार रुपये प्रति माह देने, नशा खत्म करने, रेत माफिया, वीआईपी कल्चर और गैंगस्टर माफिया को खत्म करने मुद्दों पर विपक्षी दल ही नहीं बल्कि जनता भी घेर रही है। हाल ही में हुए एक घटनाक्रम को लेकर महिला सशक्तीकरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार पर भी आप नेतृत्व पर अंगुली उठाई जा रही है।
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अधूरे वादों पर बोलने से नेता कन्नी काट रहे हैं और विपक्षी दलों को घेरने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सबसे दिलचस्प है कि सभी दल नए वादों की पिटारी खोलने में जरा भी हिचक नहीं दिखा रहे हैं।
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सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने दिल खोल कर पंजाब की जनता से वादे किए थे। इनमें से कुछ वादे तो आप सरकार ने पूरे कर दिए हैं और इसका सकारात्मक असर भी दिख रहा है, लेकिन अधूरे वादे लोकसभा चुनाव में आप के गले की फांस बन रहे हैं।
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महिलाओं को हजार रुपये प्रति माह देने, नशा खत्म करने, रेत माफिया, वीआईपी कल्चर और गैंगस्टर माफिया को खत्म करने मुद्दों पर विपक्षी दल ही नहीं बल्कि जनता भी घेर रही है। हाल ही में हुए एक घटनाक्रम को लेकर महिला सशक्तीकरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार पर भी आप नेतृत्व पर अंगुली उठाई जा रही है।
पिछले दस साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा को भी जनता कई मुद्दों और अधूरे वादों को लेकर कठघरे में खड़ा कर रही है। हालांकि, भाजपा सरकार के पक्ष में कुछ कल्याणकारी योजनाओं व मजबूत फैसलों का लाभ मिलता दिखाई दे रहा है।
फसलों के एमएसपी का वादा और कर्ज मुक्ति की मांग को लेकर किसान संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं। विपक्षी दल, भाजपा सरकार पर कुछ चुनिंदा काॅर्पोरेट घरानों को प्रोत्साहित करने के मुद्दे पर घेर रहे हैं। बेरोजगारी और महंगाई मुद्दे पर भी भाजपा विरोधियों के साथ लोगों के निशाने पर है।
परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर रोष
केंद्र और पंजाब की सत्ता से बाहर कांग्रेस पार्टी भी विरोधियों के निशाने पर है। परिवारवाद और भ्रष्टाचार का मुद्दा कांग्रेस को हर बार झेलना पड़ रहा है। ऑपरेशन ब्लू स्टार और सिख दंगों का मुद्दा कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा। पंजाब कांग्रेस को विरोधी दल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर रहे हैं। हालांकि, इंडी गठबंधन के जरिये कांग्रेस ने तमाम दलों को एकजुट करने की कोशिश की है और एनडीए को चुनौती मिल रही है।
केंद्र और पंजाब की सत्ता से बाहर कांग्रेस पार्टी भी विरोधियों के निशाने पर है। परिवारवाद और भ्रष्टाचार का मुद्दा कांग्रेस को हर बार झेलना पड़ रहा है। ऑपरेशन ब्लू स्टार और सिख दंगों का मुद्दा कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा। पंजाब कांग्रेस को विरोधी दल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर रहे हैं। हालांकि, इंडी गठबंधन के जरिये कांग्रेस ने तमाम दलों को एकजुट करने की कोशिश की है और एनडीए को चुनौती मिल रही है।
सबसे अहम कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मतदाताओं को भावनात्मक डोर में बांधने की कोशिश कर रहा है। पंजाब की सत्ता पर लंबे समय तक काबिज रहे अकाली दल के लिए भी यह चुनाव कड़ी चुनौती से कम नहीं है। अकाली दल के लिए पंजाबियों के टूटे भरोसे को जीतने की चुनौती सबसे बड़ी है।