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पंजाब कला भवन में गूंजे बुल्लेशाह के सुर
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 19 Dec 2013 12:18 PM IST
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पंजाब कला भवन में बुधवार की शाम गजलों के नाम रही। यहां सजी अनिल सागर की महफिल। फिर शुरू हुआ बुल्लेशाह का वो जलवा जिसे सुनने के बाद तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी।
अनिल सागर की इस महफिल में मुख्य मेहमान थे हरियाणा के इनफॉरमेशन कमिश्नर समीर माथुर। इस मौके पर पंजाब आर्ट काउंसिल की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर भी मौजूद थीं और सचिव सुदेश शर्मा और महासचिव निर्मल दत्त भी।
अनिल सागर ने बुल्लेशाह के कलाम से गजलों की शुरुआत की। उन्होंने पहले सुनाया मैं तेरे कुर्बान... फिर दाच्छी वाल्या मोर निहार वे... सुनाई। इस मौके पर उन्होंने निर्मल दत्त के लिखे टप्पे सुनाए।
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जिसमें मन फकीरी कित्ता मुंदरा दी लोड न पई... ने सबका मन मोह लिया। इस मौके पर मंच संचालन किया विजय वशिष्ठ ने।
अनिल सागर को तबले पर संगत दी अमरजीत और नरेंद्र संधू ने, जबकि हारमोनियम पर शिबू तलवार ने।
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अनिल सागर की इस महफिल में मुख्य मेहमान थे हरियाणा के इनफॉरमेशन कमिश्नर समीर माथुर। इस मौके पर पंजाब आर्ट काउंसिल की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर भी मौजूद थीं और सचिव सुदेश शर्मा और महासचिव निर्मल दत्त भी।
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अनिल सागर ने बुल्लेशाह के कलाम से गजलों की शुरुआत की। उन्होंने पहले सुनाया मैं तेरे कुर्बान... फिर दाच्छी वाल्या मोर निहार वे... सुनाई। इस मौके पर उन्होंने निर्मल दत्त के लिखे टप्पे सुनाए।
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जिसमें मन फकीरी कित्ता मुंदरा दी लोड न पई... ने सबका मन मोह लिया। इस मौके पर मंच संचालन किया विजय वशिष्ठ ने।
अनिल सागर को तबले पर संगत दी अमरजीत और नरेंद्र संधू ने, जबकि हारमोनियम पर शिबू तलवार ने।