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पंजाब कला भवन: ‘वेलकम जिंदगी’ में दिखा पिता-पुत्र का मतभेद
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 18 Jan 2017 01:07 AM IST
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‘वेलकम जिंदगी’ में दिखा पिता-पुत्र का मतभेद
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर - 16 स्थित पंजाब कला भवन में मंगलवार को ‘वेलकम जिंदगी’ नाटक का मंचन किया गया। यह नाटक आकार कला संगम थिएटर ग्रुप की ओर से किया गया। गुजराती भाषा के लेखक एवं निर्देशक राहील भारद्वाज के लिखे नाटक का हिंदी रूपांतरण बेहतरीन मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन सुरेश भारद्वाज ने किया।
नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि आज केदौर में पिता- पुत्र केबीच किस तरह से वैचारिक मतभेद होते हैं। इसमें दिखाया गया कि अरुण गनात्रा नाम का व्यक्ति अपनी नौकरी केअंतिम दिन ऑफिस जाता है। वह नौकरी के अंतिम दिन अपने बेटे विवेक गनात्रा को साथ आने को बोलता है। लेकिन उसका बेटा अपने बिजनेस केकारण नहीं आ पाता है। इस कारण वह बहुत दुखी होते हैं।
दोनों बाप बेटों में वैचारिक मतभेद के चलते बहस होती है। पति और पुत्र केबीच माहौल ठीक रहे, इसके लिए अरुण गनात्रा की पत्नी भानु गनात्रा कोशिश करती है। उसे भी शांति नहीं मिलती है। नाटक मे दिखाया गया कि बाप के बताए रास्ते पर बेटा चलने को तैयार नहीं होता है। इस कारण उनके बीच सही तरीकेका व्यवहार नहीं होता है। नाटक में कलाकारों ने बखूबी दर्शाया कि आज के समय में युवा अपने माता- पिता की कोई बात नहीं सुनते हैं। इसी कारण उन्हें परेशानी होती है। नाटक में तीन कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय किया है।
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नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि आज केदौर में पिता- पुत्र केबीच किस तरह से वैचारिक मतभेद होते हैं। इसमें दिखाया गया कि अरुण गनात्रा नाम का व्यक्ति अपनी नौकरी केअंतिम दिन ऑफिस जाता है। वह नौकरी के अंतिम दिन अपने बेटे विवेक गनात्रा को साथ आने को बोलता है। लेकिन उसका बेटा अपने बिजनेस केकारण नहीं आ पाता है। इस कारण वह बहुत दुखी होते हैं।
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दोनों बाप बेटों में वैचारिक मतभेद के चलते बहस होती है। पति और पुत्र केबीच माहौल ठीक रहे, इसके लिए अरुण गनात्रा की पत्नी भानु गनात्रा कोशिश करती है। उसे भी शांति नहीं मिलती है। नाटक मे दिखाया गया कि बाप के बताए रास्ते पर बेटा चलने को तैयार नहीं होता है। इस कारण उनके बीच सही तरीकेका व्यवहार नहीं होता है। नाटक में कलाकारों ने बखूबी दर्शाया कि आज के समय में युवा अपने माता- पिता की कोई बात नहीं सुनते हैं। इसी कारण उन्हें परेशानी होती है। नाटक में तीन कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय किया है।
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