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बाल मजदूरी की समस्या पर ऐसा नाटक जो सोचने पर मजबूर कर देगा!
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 17 May 2017 10:15 AM IST
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Punjab kala Bhawan
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पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में अलंकार थिएटर ग्रुप द्वारा चिल्ड्रन थिएटर फेस्ट के दौरान संस्कार भारती चंडीगढ़ और हरियाणा कला परिषद के सौजन्य से ‘जी आया साहब’ नाटक पेश किया। इस नाटक की कहानी बाल मजदूरी पर आधारित थी।
यह नाटक एक छोटे बच्चे पर केंद्रित है। जोकि एक परिवार में नौकरी करता है। उससे वहां काफी ज्यादा काम लिए जाने से बच्चा परेशान रहता है। एक दिन गलती से उसका हाथ चाकू से कट जाता है, जिसकी वजह से उसे काम से एक दिन की छुट्टी मिल जाती है। बच्चे को लगता है कि काम करने से अच्छा तो हाथ का कट जाना है।
चोट ठीक होने पर वो चाकू से दोबारा अपना हाथ काट लेता है। तीसरी बार हाथ काटने पर उसका हाथ ज्यादा गहरा कट जाता है और उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। तकलीफ बढ़ने पर उसको अस्पताल जाना पड़ता है जहां उसे ये पता लगता है कि घाव गहरा होने के कारण उसका हाथ काटना पड़ेगा।
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यह नाटक देश में प्रचलित बाल मजदूरी को दर्शाता है और ये भी बताता है कि उस में फंसे नासमझ बच्चे बिना सोचे समझे खुद के लिए ऐसे हालात पैदा कर लेते हैं जो पूरी उम्र के लिए उनकी समस्या बन जाती है। इस मौके पर दर्शकों द्वारा करतल ध्वनि से कलाकारों का स्वागत किया गया।
इस नाटक का निर्देशन चक्रेश कुमार ने किया। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन और जाने माने नाट्यकर्मी कमल अरोड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को सुशोभित किया। इस मौके पर संस्कार भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सौभाग्य वर्धन बृहस्पति, कांति मोहन, मनोज कुमार सिंह और गौरव पाठक मौजूद रहे।
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यह नाटक एक छोटे बच्चे पर केंद्रित है। जोकि एक परिवार में नौकरी करता है। उससे वहां काफी ज्यादा काम लिए जाने से बच्चा परेशान रहता है। एक दिन गलती से उसका हाथ चाकू से कट जाता है, जिसकी वजह से उसे काम से एक दिन की छुट्टी मिल जाती है। बच्चे को लगता है कि काम करने से अच्छा तो हाथ का कट जाना है।
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चोट ठीक होने पर वो चाकू से दोबारा अपना हाथ काट लेता है। तीसरी बार हाथ काटने पर उसका हाथ ज्यादा गहरा कट जाता है और उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। तकलीफ बढ़ने पर उसको अस्पताल जाना पड़ता है जहां उसे ये पता लगता है कि घाव गहरा होने के कारण उसका हाथ काटना पड़ेगा।
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यह नाटक देश में प्रचलित बाल मजदूरी को दर्शाता है और ये भी बताता है कि उस में फंसे नासमझ बच्चे बिना सोचे समझे खुद के लिए ऐसे हालात पैदा कर लेते हैं जो पूरी उम्र के लिए उनकी समस्या बन जाती है। इस मौके पर दर्शकों द्वारा करतल ध्वनि से कलाकारों का स्वागत किया गया।
इस नाटक का निर्देशन चक्रेश कुमार ने किया। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन और जाने माने नाट्यकर्मी कमल अरोड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को सुशोभित किया। इस मौके पर संस्कार भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सौभाग्य वर्धन बृहस्पति, कांति मोहन, मनोज कुमार सिंह और गौरव पाठक मौजूद रहे।