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फरमानः 'योजनाएं गरीबों की भलाई के लिए हैं, लकीर के फकीर न बनें अफसर'
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 09 May 2017 02:48 PM IST
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झुग्गियां हटाकर वहां के निवासियों को छोटे फ्लैट देने की स्कीम पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए लकीर का फकीर न बनने की नसीहत दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि कल्याणकारी योजना का उद्देश्य पीड़ितों के पुनर्वास और उनकी स्थिति को बेहतर बनाना होता है। ऐसे में लोगों के लिए सुविधा हो ऐसा काम किया जाए, न कि तकनीकी अड़ंगा लगाकर उनकी परेशानी बढ़ाई जाए। एक तकनीकी अड़चन से किसी को लाभ से वंचित कैसे रख सकते हैं।
मामले में कृष्ण पाल व अन्य ने याचिका दाखिल कर लोक अदालत के उस फैसले को खारिज करने की अपील की थी, जिसके तहत याची को स्मॉल फ्लैट स्कीम के लिए अयोग्य करार दिया गया था। कृष्ण पाल की याचिका पर हाईकोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसके फ्लैट के दावे पर 3 माह में फैसला लेने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्रशासन की ओर से सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया कि कृष्णपाल को स्कीम का लाभ देने का फैसला गलत है।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने फैसला लिया है कि सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देने वाली अपील वापस ले लेगा। प्रशासन ने हाईकोर्ट से केस वापस लेने की छूट मांगी, जिसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अपने आदेशों में यह स्पष्ट कर दिया कि योजनाओं का उद्देश्य जनकल्याण होता है और केवल तकनीकी कारण इसके राह में रोड़ा नहीं बनने चाहिए, साथ ही अफसरों को लकीर का फकीर न बनने की नसीहत भी दी।
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यह है मामला
चंडीगढ़ प्रशासन ने झुग्गियों को हटाने का फैसला लिया था। इसके बाद वहां के निवासियों ने हाईकोर्ट में दस्तक दी थी। हाईकोर्ट के आदेशों पर प्रशासन ने स्मॉल फ्लैट स्कीम तैयार की थी, जिसका लाभ झुग्गियों से हटाए गए लोगों को दिया गया। कृष्ण पाल ने भी आवेदन किया था और उसका नाम 3 वोटर लिस्ट में भी मौजूद था। उसका आवेदन इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था, उसका नाम बायोमीट्रिक सर्वे में मौजूद नहीं। उसने कहा कि वह लंबे समय से झुग्गी में है और कई वोटर लिस्ट में उसका नाम भी है। यहां से ही विवाद आरंभ हुआ था।
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मामले में कृष्ण पाल व अन्य ने याचिका दाखिल कर लोक अदालत के उस फैसले को खारिज करने की अपील की थी, जिसके तहत याची को स्मॉल फ्लैट स्कीम के लिए अयोग्य करार दिया गया था। कृष्ण पाल की याचिका पर हाईकोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसके फ्लैट के दावे पर 3 माह में फैसला लेने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्रशासन की ओर से सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया कि कृष्णपाल को स्कीम का लाभ देने का फैसला गलत है।
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हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने फैसला लिया है कि सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देने वाली अपील वापस ले लेगा। प्रशासन ने हाईकोर्ट से केस वापस लेने की छूट मांगी, जिसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अपने आदेशों में यह स्पष्ट कर दिया कि योजनाओं का उद्देश्य जनकल्याण होता है और केवल तकनीकी कारण इसके राह में रोड़ा नहीं बनने चाहिए, साथ ही अफसरों को लकीर का फकीर न बनने की नसीहत भी दी।
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यह है मामला
चंडीगढ़ प्रशासन ने झुग्गियों को हटाने का फैसला लिया था। इसके बाद वहां के निवासियों ने हाईकोर्ट में दस्तक दी थी। हाईकोर्ट के आदेशों पर प्रशासन ने स्मॉल फ्लैट स्कीम तैयार की थी, जिसका लाभ झुग्गियों से हटाए गए लोगों को दिया गया। कृष्ण पाल ने भी आवेदन किया था और उसका नाम 3 वोटर लिस्ट में भी मौजूद था। उसका आवेदन इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था, उसका नाम बायोमीट्रिक सर्वे में मौजूद नहीं। उसने कहा कि वह लंबे समय से झुग्गी में है और कई वोटर लिस्ट में उसका नाम भी है। यहां से ही विवाद आरंभ हुआ था।