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CID से कॉनफिडेंशियल रिपोर्ट मंगवा लूं तो पुलिस वाले पड़ जाएंगे मुश्किल में: जस्टिस रावल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 17 Nov 2018 03:08 PM IST
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चंडीगढ़ की फुटपाथ पर वेंडिंग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रवैया अपनाते हुए यूटी प्रशासन और एमसी चंडीगढ़ को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि शहर में लोगों के घरों से ताला तोड़कर चोरी हो जाती है लेकिन इन वेंडरों का सामान पूरी रात पड़ा रहता है फिर भी चोरी नहीं होता। निश्चित है कि यह पुलिस की शह और हफ्ता पहुंचने के कारण होता है। कोर्ट ने कहा कि यदि वह सीआईडी से कॉनफिडेंशियल रिपोर्ट मंगवा लें तो पूरा महकमा मुश्किल में पड़ जाएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि फुटपाथ लोगों के चलने के लिए है न की वेंडिंग करने के लिए। ऐसे में तुरंत फुटपाथ से वेंडरों को हटाया जाए।
याचिका पर सुनवाई आरंभ होते ही सड़क किनारे फुटपाथ पर स्ट्रीट वेंडरों की मौजूदगी का मुद्दा उठाया गया। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि कैसे इन स्ट्रीट वेंडरों को फुटपाथ पर वेंडिंग की अनुमति दी जा सकती है। एमसी और प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत कई केस दाखिल किए गए थे, जिसके बाद एमसी और प्रशासन ने अंडरटेकिंग दी थी कि जब तक वेंडिंग जोन बनाने, सर्वे पूरा होने और रजिस्ट्रेशन के कार्य पूरे नहीं हो जाते तब तक उन्हें नहीं हटाया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर स्ट्रीट पर समझ में आता है लेकिन फुटपाथ पर कैसे स्ट्रीट वेंडर हो सकते हैं। फुटपाथ लोगों के चलने के लिए है न कि वेंडिंग के लिए।
यदि यहां वेंडिंग की अनुमति दी जाएगी तो लोग सड़क पर चलने को मजबूर होंगे । इससे हादसों की संख्या बढ़ेगी। इस पर कोर्ट को बताया गया कि केंद्रीय स्ट्रीट वेंडर एक्ट के अनुसार ही फुटपाथ पर सामान लगाने वालों को वेंडिंग की श्रेणी में डाला गया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अब वे खुद इस मामले में संज्ञान लेकर इस मुद्दे का हल करवाएंगे। उन्होंने इस मामले का संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका पर सुनने का निवेदन करते हुए चीफ जस्टिस को भेज दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को किसी भी तरह के हादसे से बचाने के लिए कोर्ट यह निर्देश जारी करता है कि तुरंत स्ट्रीट वेंडरों को फुटपाथ से हटाया जाए ताकि लोग सुरक्षित पैदल सफर कर सकें। कोर्ट ने कहा कि आज यदि इस दिशा में काम नहीं किया गया तो एक ऐसा दिन आएगा कि हर पब्लिक प्लेस पर स्ट्रीट वेंडरों का कब्जा होगा।
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वेंडरों को न हटा सकने की दलील पर हाईकोर्ट ने की खिंचाई
एमसी द्वारा वेंडरों को हटाने में असमर्थता जताने पर जस्टिस अमित रावल ने जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि अगर पब्लिक प्लेस से हटा नहीं सकते तो रोज गार्डन में बिठा दो, वेंडिंग भी करेंगे और उन्हें वहां अच्छा भी लगेगा। इमारत के बाहर से नहीं हटा सकते तो कोर्ट के बाहर या हमारे घर के बाहर भी बैठा दोगे क्या?
अतिक्रमण पर पंजाब सरकार बढ़ाए जुर्माना
हाईकोर्ट ने कहा कि मामूली फाइन होने के कारण ही वेंडरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और अतिक्रमण भी। कोर्ट ने यूटी प्रशासन को फाइन बढ़ाने को कहा तो प्रशासन ने कहा कि इसका निर्णय संसद ले सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार फाइन की राशि बढ़ाए और पंजाब सरकार के एक्ट को यूटी लागू करता है ऐसे में संसद की अनुमति की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कोर्ट ने कहा कि जब तक डंडा नहीं चलता तब तक नियमों का पालन नहीं होता।
अंधेरे में शहर, जल्द पूरा हो एलईडी लाइटों का काम
कोर्ट को बताया गया कि शहर में करीब 6 हजार डार्क स्पॉट हैं और इससे जुड़ी करीब साढ़े चार हजार शिकायतें प्रशासन के पास आई थीं और ज्यादातर का निपटारा कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आखिर क्यों अपना काम करने के लिए अधिकारियों को शिकायत का इंतजार करना पड़ता है। क्यों नहीं अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाती कि वे सुनिश्चित करें कि सब ठीक ठाक है। कोर्ट ने यूटी प्रशासन को जल्द से जल्द शहर की लाइटों को एलईडी में परिवर्तित करने के आदेश दिए हैं।
डीजीपी को किया था तलब
हाईकोर्ट ने वेंडरों की पुलिस से मिलीभगत को लेकर यूटी प्रशासन को फटकार लगाते हुए डीजीपी को तलब कर लिया था। इस पर यूटी प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल ने कोर्ट से अनुरोध किया जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें तलब तो नहीं किया लेकिन हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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याचिका पर सुनवाई आरंभ होते ही सड़क किनारे फुटपाथ पर स्ट्रीट वेंडरों की मौजूदगी का मुद्दा उठाया गया। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि कैसे इन स्ट्रीट वेंडरों को फुटपाथ पर वेंडिंग की अनुमति दी जा सकती है। एमसी और प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत कई केस दाखिल किए गए थे, जिसके बाद एमसी और प्रशासन ने अंडरटेकिंग दी थी कि जब तक वेंडिंग जोन बनाने, सर्वे पूरा होने और रजिस्ट्रेशन के कार्य पूरे नहीं हो जाते तब तक उन्हें नहीं हटाया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर स्ट्रीट पर समझ में आता है लेकिन फुटपाथ पर कैसे स्ट्रीट वेंडर हो सकते हैं। फुटपाथ लोगों के चलने के लिए है न कि वेंडिंग के लिए।
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यदि यहां वेंडिंग की अनुमति दी जाएगी तो लोग सड़क पर चलने को मजबूर होंगे । इससे हादसों की संख्या बढ़ेगी। इस पर कोर्ट को बताया गया कि केंद्रीय स्ट्रीट वेंडर एक्ट के अनुसार ही फुटपाथ पर सामान लगाने वालों को वेंडिंग की श्रेणी में डाला गया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अब वे खुद इस मामले में संज्ञान लेकर इस मुद्दे का हल करवाएंगे। उन्होंने इस मामले का संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका पर सुनने का निवेदन करते हुए चीफ जस्टिस को भेज दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को किसी भी तरह के हादसे से बचाने के लिए कोर्ट यह निर्देश जारी करता है कि तुरंत स्ट्रीट वेंडरों को फुटपाथ से हटाया जाए ताकि लोग सुरक्षित पैदल सफर कर सकें। कोर्ट ने कहा कि आज यदि इस दिशा में काम नहीं किया गया तो एक ऐसा दिन आएगा कि हर पब्लिक प्लेस पर स्ट्रीट वेंडरों का कब्जा होगा।
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वेंडरों को न हटा सकने की दलील पर हाईकोर्ट ने की खिंचाई
एमसी द्वारा वेंडरों को हटाने में असमर्थता जताने पर जस्टिस अमित रावल ने जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि अगर पब्लिक प्लेस से हटा नहीं सकते तो रोज गार्डन में बिठा दो, वेंडिंग भी करेंगे और उन्हें वहां अच्छा भी लगेगा। इमारत के बाहर से नहीं हटा सकते तो कोर्ट के बाहर या हमारे घर के बाहर भी बैठा दोगे क्या?
अतिक्रमण पर पंजाब सरकार बढ़ाए जुर्माना
हाईकोर्ट ने कहा कि मामूली फाइन होने के कारण ही वेंडरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और अतिक्रमण भी। कोर्ट ने यूटी प्रशासन को फाइन बढ़ाने को कहा तो प्रशासन ने कहा कि इसका निर्णय संसद ले सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार फाइन की राशि बढ़ाए और पंजाब सरकार के एक्ट को यूटी लागू करता है ऐसे में संसद की अनुमति की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कोर्ट ने कहा कि जब तक डंडा नहीं चलता तब तक नियमों का पालन नहीं होता।
अंधेरे में शहर, जल्द पूरा हो एलईडी लाइटों का काम
कोर्ट को बताया गया कि शहर में करीब 6 हजार डार्क स्पॉट हैं और इससे जुड़ी करीब साढ़े चार हजार शिकायतें प्रशासन के पास आई थीं और ज्यादातर का निपटारा कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आखिर क्यों अपना काम करने के लिए अधिकारियों को शिकायत का इंतजार करना पड़ता है। क्यों नहीं अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाती कि वे सुनिश्चित करें कि सब ठीक ठाक है। कोर्ट ने यूटी प्रशासन को जल्द से जल्द शहर की लाइटों को एलईडी में परिवर्तित करने के आदेश दिए हैं।
डीजीपी को किया था तलब
हाईकोर्ट ने वेंडरों की पुलिस से मिलीभगत को लेकर यूटी प्रशासन को फटकार लगाते हुए डीजीपी को तलब कर लिया था। इस पर यूटी प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल ने कोर्ट से अनुरोध किया जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें तलब तो नहीं किया लेकिन हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।