विज्ञापन
विज्ञापन

हाईकोर्ट की टिप्पणी, पंजाब का पानी हरियाणा, दिल्ली को देने पर हम कैसे लगा सकते हैं रोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 11 Sep 2018 10:49 AM IST
हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट
हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट
ख़बर सुनें
विभिन्न समझौतों द्वारा सतलुज, ब्यास और रावी का पानी अन्य राज्यों को देने के खिलाफ याचिका पर पंजाब सरकार ने अपना पक्ष रखा, हाईकोर्ट ने टिप्पणी की। पंजाब सरकार ने बताया कि हरियाणा व पंजाब दोनो का केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित है क्योंकि यह अंतरराज्यीय पानी विवाद है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह इंटर स्टेट वाटर डिस्प्यूट है और हम इसे कैसे सुन सकते हैं। यह मामला सुनना केवल सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है। हाईकोर्ट ने अब सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा व पंजाब के दाखिल सूट की स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए डा. धर्मवीर गांधी, रिटा. जस्टिस अजित सिंह बैंस, डा. जगजीत सिंह चीमा, सुखदेव सिंह, नरेंदर सिंह, सतनाम सिंह, गुरप्रीत गिल, डा. रौनकी राम, मानिक गोयल, हरदीप कुमार शर्मा, बलजीत सिंह, बावा सिंह, जगरूप सिंह, हरमीत कौर, सुखविंदर सिंह काहलों, सुमित सिंह भुल्लर, सुखदर्शन सिंह, डा. जीवनजोत कौर व डा. मलकीत सिंह सैनी ने पंजाब की नदियों के पानी का मुद्दा हाईकोर्ट के सामने उठाया है। याचिका में बताया गया कि 1955 में भारत सरकार ने निर्णय लिया था कि रावी और ब्यास का पानी पंजाब को 7.20 मिलियन एकड़ फुट, राजस्थान को 8.0 एमएएफ तथा जम्मू कश्मीर को 0.65 एमएएफ दिया जाएगा जो बिना किसी संविधानिक वैधता का था।

राजस्थान का इस पानी पर कोई हक नहीं बनता था। इसके बाद 1 नवंबर 1966 को पंजाब से हरियाणा व हिमाचल अलग हो गए और हरियाणा ने पंजाब से 4.8 एमएएफ पानी की मांग की। भारत सरकार ने मार्च 1976 में नाटिफिकेशन जारी कर हरियाणा को 3.5 एमएएफ देने का आदेश दिया जिससे पंजाब का नदियों के पानी में हिस्सा 45.42 प्रतिशत से घटकर 23.34 रह जाता और हरियाणा का 22.08 हो जाता। याची ने कहा कि जिस राज्य का नदी में वर्षा के जल का सहयोग है उसे 72.56 प्रतिशत पानी ऐसे राज्यों को देना पड़ रहा है जिनका इन नदियों में पानी का कोई सहयोग नहीं है और वह भी बिना किसी पैसे के।

1986 मे विवाद का निपटारा करने के लिए बने वी बालकृष्ण ट्रिब्यूनल ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट दी परंतु यह अपनी फाइनल रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सका और इसे समाप्त कर दिया गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट लागू कर दिया। इसको लेकर हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रेसिडेंट रेफरेंस के माध्यम से कानून की वैधता को चुनौती दी। 2007 में कांग्रेस हरियाणा में भी थी और केंद्र में भी परंतु प्रेसिडेंट रेफरेंस की सुनवाई के लिए अप्रोच नहीं किया गया। 2011 में हरियाणा सरकार ने नहर निर्माण पूरा करने के 2002 और 2004 में दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए याचिका दाखिल की।

2016 में प्रेसिडेंट रेफरेंस पर निर्णय के लिए 5 जजों की बेंच का सुप्रीम कोर्ट ने गठन किया। जिन्होंने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट को गैर कानूनी बताया। याची ने कहा कि पंजाब में हर साल 50 एमएएफ पानी की जरूरत होती है और इसकी जरूरत का केवल आधा हिस्सा ही नहर और वर्षा से प्राप्त होता है। बाकी के 25 एमएएफ के लिए भूजल का इस्तेमाल करना पड़ता है। इसके कारण लगातार भूजल स्तर नीचे जा रहा है और किसानों को ट्यूबवेल लगवाने पड़ रहे हैं। किसानों को इसके लिए कर्ज लेना पड़ता है और आर्थिक स्थिति बदतर होने के चलते वे आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते हैं। यदि नदियों के पानी पर निर्णय का अधिकार नहीं दिया गया तो पंजाब जल्द ही रेगिस्तान में बदल जाएगा। याची ने कहा कि यदि हरियाणा व राजस्थान जैसे राज्यों को पानी न देना हो तो पंजाब की स्थिति बेहतर हो सकता है।

Recommended

UP Board Class 10th & 12th 2019 की परीक्षाओं का सबसे तेज परिणाम देखने के लिए रजिस्टर करें।
UP Board 2019

UP Board Class 10th & 12th 2019 की परीक्षाओं का सबसे तेज परिणाम देखने के लिए रजिस्टर करें।

अक्षय तृतीया पर अपार धन-संपदा की प्राप्ति हेतु सामूहिक श्री लक्ष्मी कुबेर यज्ञ - 07 मई 2019
ज्योतिष समाधान

अक्षय तृतीया पर अपार धन-संपदा की प्राप्ति हेतु सामूहिक श्री लक्ष्मी कुबेर यज्ञ - 07 मई 2019

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

लोकसभा चुनाव में किस सीट पर बदल रहे समीकरण, कहां है दल बदल की सुगबुगाहट, राहुल गाँधी से लेकर नरेंद्र मोदी तक रैलियों का रेला, बयानों की बाढ़, मुद्दों की पड़ताल, लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़े हर लाइव अपडेट के लिए पढ़ते रहे अमर उजाला चुनाव समाचार।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Chandigarh

मुक्केबाज विजेंद्र सिंह का डीएसपी पद से इस्तीफा, दिल्ली से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी

हरियाणा पुलिस में डीएसपी पद पर तैनात पेशेवर मुक्केबाज विजेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार को ही गृह विभाग को अपना त्याग पत्र भेजा है।

23 अप्रैल 2019

विज्ञापन

118 साल की इस महिला की हुई हाई-हार्ट सर्जरी, पांच पीढ़ियां देख चुकी है महिला

118 साल की उम्र में हाई-हार्ट सर्जरी करके सही सलामत रहना किसी अचंभे से कम नहीं है। लेकिन ऐसा हुआ है। ये कारनामा लुधियाना के एक निजि अस्पताल में देखने को मिला।

8 मार्च 2019

Related

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election