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जज की जिम्मेदारी है, वह कैसे भूल सकता है जजमेंट में ड्रग का नाम व मात्रा लिखवाना: हाईकोर्ट

Sun, 23 Sep 2018 10:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 23 Sep 2018 10:00 AM IST
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Punjab Haryana Highcourt Statement, How Judge Can Forgot to Writne Name of Drug in Judgement
हाईकोर्ट जज
एनडीपीएस की विशेष अदालत की जिम्मेदारी जिस जज पर हो, वह जजमेंट में ड्रग की मात्रा व ड्रग का नाम लिखना कैसे भूल सकता है? हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की। पंजाब सुपीरियर जूडीशियरी का हिस्सा रहे पूर्व जज केके बंसल की फुल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
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याचिका खारिज करते हुए कहा कि एनडीपीएस की विशेष अदालत की जिम्मेदारी जिस जज पर हो, वह जजमेंट में ड्रग की मात्रा व ड्रग का नाम लिखना कैसे भूल सकता है? याचिका दाखिल करते हुए केके बंसल ने कहा कि वह पंजाब की सुपिरियर जूडीशियरी के हिस्सा थे और एनडीपीएस की विशेष अदालत देख रहे थे।
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इस दौरान 2014-15 के प्रशासनिक जज ने उनके खिलाफ अपनी रिपोर्ट में टिप्पणी की थी। याची ने कहा कि 2013-14 तक उनको हमेशा एसीआर में बी प्लस व ए ही मिलता आया है और अचानक अब सी की सिफारिश कर दी गई। याची ने कहा कि सात आदेश में उन्होंने एनडीपीएस केस में न्यूनतम तय सजा से कम दी थी, लेकिन यह काम के दबाव के कारण था।
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बाद में इनको दोबारा सुनने का निर्णय लिया गया, लेकिन ये हाईकोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में इसे उनकी गलती नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता के 53 फैसलों की समीक्षा की गई। इनमें से 29 में लिखवाई गई जजमेंट में ड्रग की मात्रा का जिक्र नहीं किया गया है और 26 में ड्रग का नाम तक नहीं है।

ऐसा जज जिसे एनडीपीएस की स्पेशल कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई हो, वह एनडीपीएस केस की जजमेंट की जान कहे जाने वाली मात्रा व नाम को कैसे भूल सकता है। यदि भूल होती भी है तो वह एक या दो केस में हो सकती है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में इस प्रकार की गलती नहीं हो सकती है।


ऐसे में हाईकोर्ट ने फुल कोर्ट तथा पंजाब सरकार के फरवरी 2018 में जारी प्री-मेच्योर रिटायर करने के फैसले को सही करार देते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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