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हाईकोर्ट की टिप्पणी: संविधान में राज्य को कल्याणकारी दर्जा, कर्मियों के चिकित्सा दावे की पूर्ति करनी होगी
Tue, 08 Aug 2023 01:32 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 08 Aug 2023 01:32 PM IST
सार
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि 30 दिन की सीमा की शर्त को इतना सख्त नहीं माना जाना चाहिए खास तौर पर तब जब इसके लिए सफाई दी गई हो। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने छह माह में दावा प्रस्तुत कर दिया था।
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
विस्तार
संविधान में राज्य को कल्याणकारी राज्य का दर्जा दिया गया है और ऐसे में यह अपने कर्मचारियों/पेंशनभोगियों व उनके आश्रितों के चिकित्सा खर्च के दावे की प्रतिपूर्ति के लिए बाध्य है। कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू होने की दलील देकर राज्य इससे पीछे नहीं हट सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए सिंचाई विभाग को सहायक अभियंता रूप सिंह को 2016 में हुए बेटी के इलाज के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति करने का आदेश दिया है।
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याची के वकील रंजीवन सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने 27 अक्टूबर 2016 से 2 नवंबर 2016 तक लुधियाना के फोर्टिस अस्पताल में बेटी का इलाज करवाया था। इस दौरान हुए खर्च के संबंध में उसने विभाग को 24 मार्च 2017 को 241250 रुपये का दावा भेजा था। इसके बाद विभाग की ओर से इसे ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी (ओआईसी) को भेजा गया था। कंपनी से पंजाब सरकार ने वर्ष 2016 के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत समझौता किया था।
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बीमा कंपनी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि यह 30 दिन की तय अवधि के भीतर नहीं प्रस्तुत किया गया था। खंडपीठ ने कहा कि 30 दिन की सीमा की शर्त को इतना सख्त नहीं माना जाना चाहिए खास तौर पर तब जब इसके लिए सफाई दी गई हो। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने छह माह में दावा प्रस्तुत कर दिया था। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए विभाग को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए उनके दावे पर विचार करने और राज्य सेवा चिकित्सा परिचारक नियम, 1940 के अनुसार तीन महीने की अवधि के भीतर शीघ्रता से निपटाने का निर्देश दिया है।
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याची के वकील रंजीवन सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने 27 अक्टूबर 2016 से 2 नवंबर 2016 तक लुधियाना के फोर्टिस अस्पताल में बेटी का इलाज करवाया था। इस दौरान हुए खर्च के संबंध में उसने विभाग को 24 मार्च 2017 को 241250 रुपये का दावा भेजा था। इसके बाद विभाग की ओर से इसे ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी (ओआईसी) को भेजा गया था। कंपनी से पंजाब सरकार ने वर्ष 2016 के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत समझौता किया था।
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बीमा कंपनी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि यह 30 दिन की तय अवधि के भीतर नहीं प्रस्तुत किया गया था। खंडपीठ ने कहा कि 30 दिन की सीमा की शर्त को इतना सख्त नहीं माना जाना चाहिए खास तौर पर तब जब इसके लिए सफाई दी गई हो। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने छह माह में दावा प्रस्तुत कर दिया था। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए विभाग को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए उनके दावे पर विचार करने और राज्य सेवा चिकित्सा परिचारक नियम, 1940 के अनुसार तीन महीने की अवधि के भीतर शीघ्रता से निपटाने का निर्देश दिया है।