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रैलियों में इस्तेमाल न हों स्कूल बसें, केस में हाईकोर्ट के सरकार को निर्देश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Oct 2016 09:28 AM IST
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पंचकूला में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
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सियासी रैलियों में निजी स्कूल बसों का प्रयोग रोकने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं।
मामले में हाईकोर्ट ने याचिका दायर करने वाले संगठन को हरियाणा सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव और वित्तायुक्त को इस मुद्दे पर तीन हफ्ते में रिप्रेजेंटेशन देने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकार के उक्त दोनों अधिकारियों को अधिकतम छह हफ्ते में इस मुद्दे पर कानून सम्मत फैसला लेने का भी आदेश दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस रामेश्वर सिंह मलिक ने वीरवार को इस आदेश के साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया।
फेडरेशन आफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा की ओर से एडवोकेट पंकज मैनी के मार्फत दायर याचिका में कहा गया कि हरियाणा सरकार से संबंधित राजनीतिक दल की तरफ से जनता को अपनी ताकत दिखाने के लिए आयोजित रैलियों में निजी स्कूलों की बसें हायर कर ली जाती हैं। तब इन स्कूली बसों का उपयोग आम लोगों को रैली स्थल तक लाने-ले जाने के लिए किया जाता है।
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मामले में हाईकोर्ट ने याचिका दायर करने वाले संगठन को हरियाणा सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव और वित्तायुक्त को इस मुद्दे पर तीन हफ्ते में रिप्रेजेंटेशन देने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकार के उक्त दोनों अधिकारियों को अधिकतम छह हफ्ते में इस मुद्दे पर कानून सम्मत फैसला लेने का भी आदेश दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस रामेश्वर सिंह मलिक ने वीरवार को इस आदेश के साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया।
फेडरेशन आफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा की ओर से एडवोकेट पंकज मैनी के मार्फत दायर याचिका में कहा गया कि हरियाणा सरकार से संबंधित राजनीतिक दल की तरफ से जनता को अपनी ताकत दिखाने के लिए आयोजित रैलियों में निजी स्कूलों की बसें हायर कर ली जाती हैं। तब इन स्कूली बसों का उपयोग आम लोगों को रैली स्थल तक लाने-ले जाने के लिए किया जाता है।
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स्कूल प्रबंधकों पर बसें भेजने के लिए डाला जाता दबाव
डेमो पिक
याचिका में कहा गया है कि कई बार इन स्कूली बसों को ऐसे रैली स्थलों तक ले जाया जाता है, जिस क्षेत्र के लिए स्कूली बसों के पास परमिट भी नहीं होता।
याचिका में बताया गया है कि प्रदेश की स्कूली बसों को मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के प्रावधानों के तहत हरियाणा परिवहन विभाग द्वारा परमिट जारी किए जाते हैं। रैलियों के लिए कई बार स्कूली बसों को राज्य से बाहर ले जाया जाता है।
रैली के आयोजक स्कूलों की बसों और उसके स्टाफ का इस्तेमाल करते हैं। स्कूल प्रबंधकों को अपनी बसें भेजने के लिए उन पर दबाव डाला जाता है। यदि ऐसे मामले में अगर कोई स्कूली बस दुर्घटना का शिकार हो जाती है तो उसके लिए स्कूल प्रबंधन व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाते हैं।
इसके अलावा परमिट क्षेत्र से बाहर दुर्घटना की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी किसी तरह का क्लेम देने को भी तैयार नहीं होतीं। याचिका में मांग की गई थी कि हरियाणा सरकार को सियासी रैलियों के लिए स्कूली बसों का इस्तेमाल न करने के आदेश जारी किए जाएं।
याचिका में बताया गया है कि प्रदेश की स्कूली बसों को मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के प्रावधानों के तहत हरियाणा परिवहन विभाग द्वारा परमिट जारी किए जाते हैं। रैलियों के लिए कई बार स्कूली बसों को राज्य से बाहर ले जाया जाता है।
रैली के आयोजक स्कूलों की बसों और उसके स्टाफ का इस्तेमाल करते हैं। स्कूल प्रबंधकों को अपनी बसें भेजने के लिए उन पर दबाव डाला जाता है। यदि ऐसे मामले में अगर कोई स्कूली बस दुर्घटना का शिकार हो जाती है तो उसके लिए स्कूल प्रबंधन व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाते हैं।
इसके अलावा परमिट क्षेत्र से बाहर दुर्घटना की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी किसी तरह का क्लेम देने को भी तैयार नहीं होतीं। याचिका में मांग की गई थी कि हरियाणा सरकार को सियासी रैलियों के लिए स्कूली बसों का इस्तेमाल न करने के आदेश जारी किए जाएं।