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पति से अलग रहने के बाद मिले तलाक पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Apr 2016 05:49 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo pics
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दो बार पति से अलग रहने का बयान देने से मिले तलाक के केस में बेहद अहम फैसले सुनाया। जस्टिस के कानन की बेंच ने कहा कि इस तलाक को इस दलील से रद्द नहीं किया जा सकता कि पति को विदेश भेजने के लिए यह महज कागजी कार्रवाई थी। यह भी नहीं माना जा सकता कि पति ने धोखे से तलाक ले लिया।
बेंच ने कहा है कि महिला ने पति से अलग रहने की बात स्वयं दो बार कोर्ट में कह कर अपने लिए निराशा पैदा की है। बेंच ने इस ऑब्जर्वेशन के साथ सोनीपत की एक महिला की ओर से एडिशनल सेशन जज सोनीपत के उस फैसले को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें तलाक रद्द करने की मांग खारिज की गई थी। बेंच ने कहा है कि अदालती प्रक्रिया को मजाक नहीं बनाया जा सकता।
यह है मामला
सोनीपत जिले में एक महिला की शादी मई 2011 में हुई थी। उसने जिला अदालत में पति से यह कहते हुए तलाक की मांग की कि दोनों के बीच वैचारिक मतभेद होने के कारण वह इकट्ठे नहीं रह सकते। कोर्ट ने पहले मई 2012 में और फिर दिसंबर 2012 में महिला के बयान दर्ज किए, जिसमें उसने कहा कि वह पति से अलग रह रही है। दहेज वापस ले लिया गया है और पति से लेनदेन मुकम्मल हो चुका है और अब कुछ बकाया नहीं रहा।
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इस आधार पर एक दिसंबर 2012 को दोनों में तलाक हो गया और कोर्ट ने डिक्री पास कर दी। बाद में महिला ने तलाक रद्द करने की अर्जी दाखिल कर दी। इस बार उसने कहा कि उसका पति व ससुरालिए और दहेज मांग रहे थे, जब फैसले की बारी आई तो पति ने पैसे देने में असमर्थता जताई और उसके व्यवहार में नरमी आ गई और तलाक लेते वक्त जिस अवधि में उसने पति से अलग रहने का कोर्ट में बयान दिया, उस दौरान वह अपने पति के साथ ससुराल में ही रही।
उसने अर्जी में कहा कि पति ने उससे कहा था कि वह अमेरिका जाकर पैसे कमाएगा और उसे खुश रखेगा, लेकिन इसके लिए तलाक लेना जरूरी है, क्योंकि अमेरिका के लिए शादीशुदा का वीजा आसानी से नहीं लग पाता। पत्नी ने अर्जी में कहा कि तलाक की प्रक्रियाएं उसके पति ने ही मुकम्मल कराईं और पति की खुशी के लिए ही उसने कोर्ट में बयान दिया कि वह पति से अलग रह रही है।
यह भी कहा कि जब तलाक हो गया तो उसका पति उसे मायके छोड़ आया और दो-तीन दिन बाद वापस लाने की बात कही, लेकिन फोन पर साफ मना कर दिया कि अब उससे कोई लेन देन नहीं है। इसे धोखे से लिया तलाक बताते हुए पत्नी ने तलाक रद्द करने की मांग की थी, लेकिन जिला अदालत ने उसकी यह मांग रद्द कर दी। जिला अदालत ने माना था कि महज महिला का मौखिक बयान उसकी मांग के समर्थन में नाकाफी है और वैसे भी तलाक के लिए अदालती प्रक्रिया अपनाई गई है।
दूसरे यह साबित भी नहीं हो सका कि महिला के पति के पास कोई पासपोर्ट भी है या नहीं। जिला अदालत ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की एक जजमेंट का हवाला भी दिया, जिसमें एक महिला ने पहले पति को तलाक दे दिया। पति दूसरी शादी करके विदेश चला गया और बाद में पहली पत्नी से फिर शादी रचाकर उसे भी विदेश ले गया।
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बेंच ने कहा है कि महिला ने पति से अलग रहने की बात स्वयं दो बार कोर्ट में कह कर अपने लिए निराशा पैदा की है। बेंच ने इस ऑब्जर्वेशन के साथ सोनीपत की एक महिला की ओर से एडिशनल सेशन जज सोनीपत के उस फैसले को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें तलाक रद्द करने की मांग खारिज की गई थी। बेंच ने कहा है कि अदालती प्रक्रिया को मजाक नहीं बनाया जा सकता।
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यह है मामला
सोनीपत जिले में एक महिला की शादी मई 2011 में हुई थी। उसने जिला अदालत में पति से यह कहते हुए तलाक की मांग की कि दोनों के बीच वैचारिक मतभेद होने के कारण वह इकट्ठे नहीं रह सकते। कोर्ट ने पहले मई 2012 में और फिर दिसंबर 2012 में महिला के बयान दर्ज किए, जिसमें उसने कहा कि वह पति से अलग रह रही है। दहेज वापस ले लिया गया है और पति से लेनदेन मुकम्मल हो चुका है और अब कुछ बकाया नहीं रहा।
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इस आधार पर एक दिसंबर 2012 को दोनों में तलाक हो गया और कोर्ट ने डिक्री पास कर दी। बाद में महिला ने तलाक रद्द करने की अर्जी दाखिल कर दी। इस बार उसने कहा कि उसका पति व ससुरालिए और दहेज मांग रहे थे, जब फैसले की बारी आई तो पति ने पैसे देने में असमर्थता जताई और उसके व्यवहार में नरमी आ गई और तलाक लेते वक्त जिस अवधि में उसने पति से अलग रहने का कोर्ट में बयान दिया, उस दौरान वह अपने पति के साथ ससुराल में ही रही।
उसने अर्जी में कहा कि पति ने उससे कहा था कि वह अमेरिका जाकर पैसे कमाएगा और उसे खुश रखेगा, लेकिन इसके लिए तलाक लेना जरूरी है, क्योंकि अमेरिका के लिए शादीशुदा का वीजा आसानी से नहीं लग पाता। पत्नी ने अर्जी में कहा कि तलाक की प्रक्रियाएं उसके पति ने ही मुकम्मल कराईं और पति की खुशी के लिए ही उसने कोर्ट में बयान दिया कि वह पति से अलग रह रही है।
यह भी कहा कि जब तलाक हो गया तो उसका पति उसे मायके छोड़ आया और दो-तीन दिन बाद वापस लाने की बात कही, लेकिन फोन पर साफ मना कर दिया कि अब उससे कोई लेन देन नहीं है। इसे धोखे से लिया तलाक बताते हुए पत्नी ने तलाक रद्द करने की मांग की थी, लेकिन जिला अदालत ने उसकी यह मांग रद्द कर दी। जिला अदालत ने माना था कि महज महिला का मौखिक बयान उसकी मांग के समर्थन में नाकाफी है और वैसे भी तलाक के लिए अदालती प्रक्रिया अपनाई गई है।
दूसरे यह साबित भी नहीं हो सका कि महिला के पति के पास कोई पासपोर्ट भी है या नहीं। जिला अदालत ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की एक जजमेंट का हवाला भी दिया, जिसमें एक महिला ने पहले पति को तलाक दे दिया। पति दूसरी शादी करके विदेश चला गया और बाद में पहली पत्नी से फिर शादी रचाकर उसे भी विदेश ले गया।