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जाट आंदोलन के दौरान रेप, हाईकोर्ट ने डीजीपी से मांगी रिपोर्ट

Thu, 25 Feb 2016 04:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 25 Feb 2016 04:51 PM IST
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punjab haryana highcourt decision on rape during jat protest

जाट आरक्षण को लेकर हरियाणा में हुए आंदोलन के दौरान मुरथल ढाबे पर महिला दुर्व्यवहार की घटना पर हाईकोर्ट ने डीजीपी से रिपोर्ट तलब कर ली है। इसके साथ ही सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है।

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बेंच ने कहा है कि यौन शोषण में पीड़ित महिलाएं या प्रत्यक्षदर्शी सामने आए तो पहचान गुप्त रखी जाएगी, और ऐसी शिकायत की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने में भी परहेज नहीं होगा। डीजीपी से रिपोर्ट जस्टिस एनके सांघी द्वारा एक समाचार पत्र पर लिए गए स्व संज्ञान की सुनवाई करते हुए जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस एचएस सिद्धू की बेंच ने तलब की है।
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जस्टिस सांघी ने स्व संज्ञान लेते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस को भेजे पत्र में कहा था कि यह अति शर्मनाक घटना है और ऐसे हालात पर हाईकोर्ट मूक दर्शक नहीं बना रह सकता, लिहाजा जांच देश की प्रमुख एजेंसी से कराई जानी चाहिए और इस मामले में स्व संज्ञान लिया जाना चाहिए। इसी पर एक्टिंग चीफ जस्टिस ने इस पत्र को स्व संज्ञान के तौर पर चलाने के लिए मामला सुनवाई के लिए जस्टिस मित्तल की डिवीजन बेंच के पास भेज दिया था।

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यौन शोषण पर हाईकोर्ट आंखें नहीं मूंद सकता

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मामले में सुनवाई करते हुए वीरवार को डिवीजन बेंच ने एडवोकेट जनरल को निजी तौर पर पेश होने का निर्देश दिया। इसी दौरान हरियाणा ह्यूमन राईट्स ऑर्गेनाइजेशन की ओर से एडवोकेट उत्सव बैंस भी पेश हुए और कहा कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

हालांकि बेंच ने कहा कि किसी पीड़िता या प्रत्यक्षदर्शी की ओर से शिकायत आए तो स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने में परहेज नहीं होगा। एडवोकेट बैंस ने आशंका प्रगट की कि सामने आने पर शिकायतकर्ता या प्रत्यक्षदर्शी को खतरा हो सकता है। बहलहाल बेंच ने डीजीपी से मुरथल घटना पर रिपोर्ट तलब करते हुए सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।

बेंच ने हरियाणा के सभी जिलों में मौजूद जिला लीगल सर्विस अथॉरटी के सचिव (सीजेएम) को निर्देश दिया है कि वह हेल्प डेस्क स्थापित करें। यहां आंदोलन के दौरान प्रदेश भर से कहीं भी यौन शोषण की शिकायत आए तो तुरंत पुलिस को रेफर करें और इन शिकायतों की कार्रवाई को गंभीरता से सुपरवाईज करें।

यह भी साफ किया है कि यौन शोषण की शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जाए। इसके साथ ही इस डेस्क पर आंदोलन के दौरान संपत्ति नुकसान की शिकायतों पर भी गंभीरता से कार्रवाई करने का निर्देश लीगल सर्विस अथॉरटीज़ को दिया गया है।

साथ ही हरियाणा सरकार को कहा है कि वह समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी करके आम लोगों को जागरूक करें कि कोई भी पीड़ित अपने संबंधित जिला लीगल सर्विस अथॉरटी के हेल्प डेस्क पर सील लिफाफे, ईमेल या रिश्तेदार के माध्यम से शिकायत कर सकता है।

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