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Hindi News ›   Chandigarh ›   punjab haryana highcourt big decision in case of custody and financial help of children

‘अगर पिता आर्थिक सहायता नहीं देते हैं तो मां ही मुआवजे की हकदार होगी’

Fri, 14 Apr 2017 12:16 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 14 Apr 2017 12:16 PM IST
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punjab haryana highcourt big decision in case of custody and financial help of children
कोर्ट
बच्चा मां की कस्टडी में है और पिता से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलती तो ऐसे में मां ही मुआवजे की सही हकदार है, ताकि दूसरे बच्चे का पोषण कर सके। 11 वर्षीय बच्चे की हादसे में हुई मौत के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के खिलाफ दाखिल मृतक की मां की याचिका को मंजूर करते हुए ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज कर दिया है। मामला यमुनानगर के छछरौली का है।
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3 अगस्त 2011 को अनुज (11) स्कूल की तरफ जा रहा था। अचानक सामने से अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्राली ने उसे टक्कर मार दी, इस हादसे में वह घायल हो गया। अनुज के पीछे आ रहे रिश्तेदार ने हादसा होते हुए देखा और जख्मी हालत में उसे अस्पताल ले गए।
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इस बीच अनुज की मौत हो गई। इसके बाद अनुज की मां और पिता ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के सामने मुआवजे के लिए दावा पेश किया। ट्रिब्यूनल ने 2.25 लाख मुआवजा राशि निर्धारित करते हुए माता-पिता में बराबर बांटने के आदेश दिए। इन आदेशों को चुनौती देते हुए मां कमलेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
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याची ने अपनी दलील में ये सब कहा

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
याची ने कहा कि वह पति से अलग रह रही थी। उनके दो बच्चे थे और उसके पास ही रहते थे। याची ही बच्चों की पढ़ाई से लेकर अन्य खर्चा उठा रही थी, ऐसे में क्लेम की असली हकदार वह है। याचिका पर याची के हक में फैसला सुनाते हुए जस्टिस हरीपाल वर्मा ने कहा कि मृतक बच्चे के माता-पिता अलग रहते थे और बच्चों की कस्टोडियन मां थी।

ऐसे में ट्रिब्यूनल का क्लेम बांटने का फैसला सही नहीं है। हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मां को मुआवजे का सही अधिकारी करार दिया। इसके साथ ही मुआवजे की ट्रिब्यूनल द्वारा आंकी गई राशि को भी नाकाफी करार देते हुए इसे 2.25 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस राशि से मां दूसरे बच्चे को बेहतर परवरिश दे सकेगी, इसलिए इस राशि को उन्हें दिया जाना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जब पिता की ओर से कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं करवाई जा रही थी तो ऐसे में वह मुआवजे का हकदार नहीं है।
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