Highcourt: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल इंटरव्यू पर हाईकोर्ट सख्त, एडीजीपी जेल को रिपोर्ट के साथ किया तलब
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने कुछ नहीं किया है, इसलिए अब एडीजीपी जेल आएं और जवाब दें। मामले में हाईकोर्ट को सहयोग दे रही एडवोकेट तनु बेदी ने कहा कि इस मामले में मार्च में जांच कमेटी बनी थी लेकिन आज तक जांच ही पूरी नहीं हुई।
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जेल में लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू के आठ महीने बाद भी जांच पूरी न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ कहा कि हम इस जांच और जांच में देरी के लिए दिए गए स्पष्टीकरण से बिलकुल संतुष्ट नहीं हैं। मंगलवार को पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर को अगली सुनवाई पर एडीजी जेल को हाजिर रहने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जेल परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा सौंपने का हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश जारी किया है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि इंटरव्यू मामले में जांच को लेकर सरकार ने एसटीएफ के स्पेशल डीजीपी और एडीजीपी जेल की दो सदस्यों वाली कमेटी गठित की थी। इस मामले में अभी जांच विचाराधीन है और इसे पूरा करने के लिए डेढ़ माह की मोहलत दी जाए।
हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि सिद्धू मूसेवाला की हत्या के आरोपी का जेल से इंटरव्यू होता है और इतना गंभीर मामला होने के बावजूद आठ माह में जांच तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में एडीजीपी जेल अगली सुनवाई पर खुद हाजिर होकर जवाब दें।
इसके साथ ही हरियाणा व चंडीगढ़ प्रशासन को भी जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाए कदमों का ब्योरा सौंपने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि लॉरेंस ने हाल ही में कनाडा में मौजूद गिप्पी ग्रेवाल के घर पर हमला करवाया था। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट ने दखल से इन्कार कर दिया।
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कुख्यात कैदियों के बैरक के सामने लगाएं सीसीटीवी कैमरे
हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को सुझाव दिया कि कुख्यात कैदियों की निगरानी के लिए उनके बैरक के सामने सीसीटीवी कैमरा लगाने का विकल्प अपनाया जा सकता है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जेल से भी गैंगस्टरों का मोबाइल फोन इस्तेमाल करना और फिरौती के लिए कॉल करना गंभीर विषय है। इसको रोकने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही इस प्रकार के कैदियों का नेटवर्क तोड़ने की दिशा में भी काम करने की जरूरत है ताकि ये जेल से अपने संदेश बाहर न भेज सकें। सरकार ने अगर इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया तो हम आदेश जारी करने को मजबूर हो जाएंगे।
दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग
याचिका में अर्जी दाखिल करते हुए एडवोकेट गौरव भइया ने मामले में उन्हें याचिका में पक्ष बनाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने अर्जी में इंटरव्यू के लिए दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की अपील की है। हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी पर सुनवाई करते हुए अब पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह था मामला
मामला संगरूर की जेल से जुड़ा है, जहां पर पॉक्सो एक्ट में विचाराधीन कैदी द्वारा पीड़ित को मोबाइल से जेल का वीडियो भेजने की अदालत को जानकारी दी गई थी। सिंगल बेंच के समक्ष कैदी की नियमित जमानत याचिका विचाराधीन थी। जेल में कैदियों के मोबाइल इस्तेमाल को बेहद गंभीर मामला बताते हुए सिंगल बेंच ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई आरंभ की तो इस दौरान लॉरेंस बिश्नोई के जेल से हुए इंटरव्यू का मुद्दा उठा और हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब कर लिया था।