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हाईकोर्ट ने कहा- नाबालिगों को नशा परोसने वाले बख्शे न जाएं, कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए

Wed, 04 Sep 2019 11:18 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 04 Sep 2019 11:18 AM IST
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Punjab Haryana High Court Statement on Drugs Smuggling to Minors in Punjab Haryana
कोर्ट
नाबालिगों को नशा परोसने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब के डीजपी से कहा कि ऐसा करने वालों को कुचल दिया जाना चाहिए। उनको बख्शा न जाए और कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। नाबालिगों को शराब परोसने वाले होटल, रेस्टोरेंट और बार आदि को एक्साइज विभाग सील करे। हाईकोर्ट द्वारा ड्रग मामले में संज्ञान लेकर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब के सभी डी-एडिक्शन सेंटरों को तीन महीने में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट- 2010 और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट-2017 के तहत रजिस्टर करने के आदेश दिए हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों कानूनों के तहत इलाज के लिए सुविधा दी जाए। फिलहाल राज्य के सभी डी-एडिक्शन सेंटर एनडीपीएस एक्ट के तहत चल रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो सभी सेंटरों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। सुनवाई के दौरान पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता और ड्रग रैकेट के मामलों की जांच कर रही एसटीएफ के मुखिया एचएस सिद्धू भी मौजूद रहे।
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सेंटर पर आने वाले कैदी नहीं मरीज
सुनवाई के दौरान डा. आदित्य कौशिक ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य के डी-एडिक्शन केंद्र एनडीपीएस एक्ट के तहत चलाए जाते हैं जिसके तहत रोगियों को मेडिकल प्रोटोकॉल में रखा जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि डी-एडिक्शन केंद्रों में इलाज करवाने वाले कैदी नहीं हैं बल्कि वे मरीज हैं। उनका एक रोगी की तरह इलाज किया जाना चाहिए जो एनडीपीएस एक्ट सुनिश्चित नहीं करता बल्कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट- 2010 और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट-2017 सुनिश्चित करते हैं।  लिहाजा सरकार इन दोनों एक्ट के तहत नियम तय करे और डी-एडिक्शन केंद्रों को रजिस्टर करे।
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ईडी के खाली पदों के कारण नशे के खिलाफ मुहिम प्रभावित, जल्द भरिए

हाईकोर्ट ने इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट को आदेश दिए हैं कि वह जालंधर रीजनल ऑफिस में खाली पड़े पदों पर 12 सप्ताह में नियुक्तियां करे। हाईकोर्ट ने कहा कि इन खाली पदों के कारण नशे के खिलाफ पूरी मुहिम प्रभावित हो रही है। ड्रग रैकेट के मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को आदेश दिए हैं कि वे इस पूरे मामले में एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) के साथ सहयोग के लिए एआईजी रैंक के अधिकारी को नोडल अफसर नियुक्त करे।

ऐसा इसलिए जरूरी है कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आरोपियों की संपत्ति जब्त करने में आसानी हो। इससे पहले पंजाब पुलिस ने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में वह करवाई नहीं कर सकते हैं। इस दौरान जब नशे को रोकने के लिए प्रत्येक शिक्षण संस्थान के बाहर सादी वर्दी में पुलिस तैनात करने के आदेश का पालन करने के बारे में पूछा गया तो डीजीपी ने मजबूरी बताते हुए कहा कि राज्य में 16065 शिक्षण संस्थान हैं।

अगर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक इन सभी के बाहर पुलिस कर्मियों को तैनात करना पड़ा तो करीब 32 हजार अतिरिक्त पुलिस कर्मियों की जरूरत पड़ेगी जो मुश्किल है। बावजूद इसके शिक्षण संस्थानों के बाहर निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही बताया गया कि ड्रग्स के दुष्प्रभावों के प्रति युवाओं और छात्रों को जागरूक करने के लिए कई प्रोग्राम चलाए गए हैं । इन पर अब तक 2 करोड़ 37 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।  अब तक 38 लाख छात्रों को इस प्रोग्राम में शामिल किया गया है।
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