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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court says interim bail necessary for pregnant prisoners but this should not become trend

अहम आदेश: 'गर्भवती कैदी को अंतरिम जमानत जरूरी, लेकिन यह चलन न बने', हाईकोर्ट ने यह शर्त भी रखी

Thu, 13 Jun 2024 08:12 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 13 Jun 2024 08:12 AM IST
सार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गर्भवती कैदी को अंतरिम जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने कहा कि गर्भवती कैदी को अंतरिम जमानत जरूरी है, लेकिन यह चलन नहीं बनना चाहिए।

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Punjab-Haryana High Court says interim bail necessary for pregnant prisoners but this should not become trend
pregnant woman - फोटो : FreePik

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए एनडीपीएस के मामले में पांच माह की गर्भवती महिला को प्रसव के एक वर्ष बाद तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत के लिए गर्भ धारण का चलन न बन जाए इस बात पर विचार जरूरी है। 
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ऐसे में हाईकोर्ट ने शर्त लगाई है कि यदि जमानत की अवधि के दौरान वह फिर से गर्भवती हो जाती है तो उसे फिर यह लाभ नहीं मिलेगा। अगर दुर्भाग्यवश महिला का गर्भपात होता है तो उसे 30 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा।
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याचिकाकर्ता 24 वर्ष की एक युवा महिला है और बुरी संगति में रहती थी। हाईकोर्ट ने कहा कि याची के बार-बार अपराध करने से ज्यादा अहम यह है कि वह गर्भवती है। गर्भावस्था के दौरान जेल में बंद गर्भवती मां को जमानत पर निर्णय के समय सहानुभूति और करुणा के साथ विचार करने की आवश्यकता है। 
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मातृत्व के पालने और सभ्यता की नर्सरी घास के मैदानों में होती है, पिंजरों में नहीं। महिला का गर्भवती होना एक विशेष परिस्थिति है, जिसे समझना जरूरी है। हिरासत में बच्चे को जन्म देने से मां और बच्चे दोनों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नुकसान हो सकता है, क्योंकि जेलों को मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं या छोटे बच्चों वाली महिलाओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है।

कहा-कैद एक दिन खत्म हो जाएगी, कलंक हमेशा रहेगा
मां की कैद की अवधि तो एक दिन खत्म हो जाएगी, लेकिन बच्चे के जन्म और पालन-पोषण के स्थान के बारे में पूछे जाने पर उस पर जो कलंक लगेगा, वह हमेशा बना रहेगा। इससे जीवन के प्रति बच्चे का नजरिया बदल जाएगा, समाज में बच्चे के बारे में जो धारणा बनेगी और जेल की चारदीवारी से बाहर जिस तरह से बच्चा बाहरी दुनिया को देखेगा, उस पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 
 

मां बरी हाे गई तो... 
अदालत ने कहा कि अगर बाद में मां को आरोपों से मुक्त कर दिया जाता है या उसे बरी कर दिया जाता है, तो यह दर्दनाक होगा। एक उदार और गतिशील संविधान वाले प्रगतिशील समाज के रूप में, नवजात शिशु को कैद करना अंतत: गंभीर अन्याय को होगा।
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