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Highcourt: केवल पुलिसकर्मी होने के चलते अहम बयान को नहीं कर सकते नजरंदाज, बनाया जा सकता है सजा के लिए आधार

Tue, 14 Nov 2023 03:01 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 Nov 2023 03:01 PM IST
सार

याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि याची को पुलिस ने 1997 में तीन अन्य के साथ पकड़ा था। तलाशी के दौरान उनके पास से 38.5 किलोग्राम पोस्त भूसी बरामद हुई थी। कोर्ट में दलील दी गई कि इस मामले में स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया केवल पुलिस अधिकारियों को गवाह के रूप में शामिल किया गया था। 

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Punjab Haryana High Court said that statement of Policeman cannot be rejected in crime
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo

विस्तार

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि अपराध में गवाह पुलिस अधिकारी है, केवल इस आधार पर उसके बयान को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि उसकी गवाही विश्वास पैदा करने वाली है तो इसे आरोपी को दोषी करार देने का आधार बनाया जा सकता है। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष ने अपना मामला उचित संदेह से परे साबित कर दिया है, याचिका खारिज कर दी। 
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फतेहाबाद निवासी जोगेंद्र सिंह की सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। याची को नशा तस्करी का दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई थी। याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि याची को पुलिस ने 1997 में तीन अन्य के साथ पकड़ा था। तलाशी के दौरान उनके पास से 38.5 किलोग्राम पोस्त भूसी बरामद हुई थी। कोर्ट में दलील दी गई कि इस मामले में स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया केवल पुलिस अधिकारियों को गवाह के रूप में शामिल किया गया था। 
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यह भी पढ़ें: Highcourt: गुरमीत राम रहीम पर दर्ज केस रद्द, गुरु रविदास व कबीर जी पर टिप्पणियों के मामले में कोर्ट का आदेश
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह निर्विवाद है कि जांचकर्ता और उसके वरिष्ठ अधिकारी ने किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया। ऐसी चूक जांच को प्रभावित करती है और अदालत में अभियोजन का केस कमजोर करती है। लेकिन यह तर्क देना अनुचित है कि सरकारी गवाहों द्वारा दिए गए साक्ष्य को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया जाना चाहिए कि यह पक्षपात पूर्ण होंगे। 

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की गवाही में यदि कोई कमजोरी नहीं है, तो सिर्फ इसलिए कि वे पुलिस बल से संबंधित हैं उनकी गवाही को कमजोर नहीं माना जा सकता। ऐसा कोई कानून नहीं है कि विश्वसनीय पाए जाने पर पुलिस अधिकारियों के बयान पर दोष सिद्धि नहीं की जा सकती।
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