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याची को समन जारी करके बुलाया, एक घंटे से भी अधिक थाने में बैठाया, हाईकोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान
Sat, 15 Feb 2020 10:00 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 15 Feb 2020 10:00 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया डीजीपी को भारी पड़ रहा है, क्योंकि एक मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। एक मामले में याचिकाकर्ता को थाने में बुलाकर 1 घंटे से भी अधिक बैठाए रखने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीजीपी से जवाब तलब कर लिया है। चंडीगढ़ में कैंसिलेशन या अनट्रेस रिपोर्ट का पुलिस के पास रिकार्ड न होने पर हाईकोर्ट के वकील एच सी अरोड़ा ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी।
अरोड़ा ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया था कि चंडीगढ़ के सेक्टर-19 पुलिस थाने से अब तक कितनी केस में कैंसिलेशन रिपोर्ट तैयार कर सीनियर अधिकारी को भेजी गई है, उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। अरोड़ा ने कोर्ट को बताया था कि इससे पूर्व उसने चंडीगढ़ के गृह सचिव को लीगल नोटिस भेज कार्रवाई की मांग की थी। उनके इस नोटिस को गृह सचिव ने एसएसपी को भेज दिया था, जिस पर अभी तक किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
अरोड़ा ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ के डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हुआ है और मामले में सुनवाई 12 मार्च को होनी है। अरोड़ा ने शुक्रवार को एक अर्जी देकर कोर्ट को बताया कि इस बीच चंडीगढ़ के सेक्टर 19 पुलिस स्टेशन से याची को एक समन मिला जिसमें उसको थाने में पेश होकर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया गया।
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जिस पुलिस कर्मी ने थाने में बुलाया, वह नहीं रही मौजूद
याची को यह समन देखकर हैरानी हुई लेकिन वो समन का पालन करते हुए थाने में पंहुचा लेकिन जिस जांच अधिकारी एसआई कुलविंद्र कौर ने उसे दस बजे तलब किया था वो वहां मौजूद नहीं थी। याची 1 घंटे तक वहां बैठा रहा इसके बाद किसी अन्य पुलिस कर्मी ने उसकी स्टेटमेंट दर्ज की। याची ने पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठाया कि एक जनहित याचिका दायर करने पर उसे इस तरह थाने में बुलाया गया। अरोड़ा ने इस मामले में डीजीपी चंडीगढ़ व अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने भी पुलिस के इस रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए डीजीपी को जवाब दायर करने का निर्देश दिया।
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अरोड़ा ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया था कि चंडीगढ़ के सेक्टर-19 पुलिस थाने से अब तक कितनी केस में कैंसिलेशन रिपोर्ट तैयार कर सीनियर अधिकारी को भेजी गई है, उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। अरोड़ा ने कोर्ट को बताया था कि इससे पूर्व उसने चंडीगढ़ के गृह सचिव को लीगल नोटिस भेज कार्रवाई की मांग की थी। उनके इस नोटिस को गृह सचिव ने एसएसपी को भेज दिया था, जिस पर अभी तक किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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अरोड़ा ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ के डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हुआ है और मामले में सुनवाई 12 मार्च को होनी है। अरोड़ा ने शुक्रवार को एक अर्जी देकर कोर्ट को बताया कि इस बीच चंडीगढ़ के सेक्टर 19 पुलिस स्टेशन से याची को एक समन मिला जिसमें उसको थाने में पेश होकर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया गया।
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जिस पुलिस कर्मी ने थाने में बुलाया, वह नहीं रही मौजूद
याची को यह समन देखकर हैरानी हुई लेकिन वो समन का पालन करते हुए थाने में पंहुचा लेकिन जिस जांच अधिकारी एसआई कुलविंद्र कौर ने उसे दस बजे तलब किया था वो वहां मौजूद नहीं थी। याची 1 घंटे तक वहां बैठा रहा इसके बाद किसी अन्य पुलिस कर्मी ने उसकी स्टेटमेंट दर्ज की। याची ने पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठाया कि एक जनहित याचिका दायर करने पर उसे इस तरह थाने में बुलाया गया। अरोड़ा ने इस मामले में डीजीपी चंडीगढ़ व अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने भी पुलिस के इस रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए डीजीपी को जवाब दायर करने का निर्देश दिया।