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हरियाणा के एक्सटेंशन लेक्चरर्स को हाईकोर्ट का बड़ा झटका, नौकरी चाहिए तो यूजीसी नेट अनिवार्य

Wed, 23 Sep 2020 11:06 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 23 Sep 2020 11:06 AM IST
सार

  • प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज हुईं
  • सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए नेट अनिवार्य कर दिया था
  • दलील- नियुक्ति के बावजूद पद खाली रह गए, उन्हें बना रहने दें

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Punjab Haryana High Court Rejects Haryana Extension Lecturers Petition
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक्सटेंशन लेक्चरारों को बड़ा झटका दिया है। उच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर एक्सटेंशन लेक्चरार का कोई अधिकार नहीं है।
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सरकार ने उन्हें सिर्फ इसलिए नियुक्त किया है, क्योकि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली थे। सरकार ने पॉलिसी बनाते हुए इन पदों पर अब नेट पास होना अनिवार्य कर दिया है। एक्सटेंशन लेक्चरार यह योग्यता पूरी नहीं करते हैं। ऐसे में वह कैसे इन पदों पर योग्य माने जा सकते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार द्वारा इन पदों पर नियुक्ति के बावजूद पद खाली रह गए हैं। ऐसे में उन्हें कार्यरत रहने दिया जाए।
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सरकार के पास योग्य आवेदकों की कमी है ऐसे में इन पदों पर याचिकाकर्ताओं को ही रहने दिया जाए और नेट की परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। न्यायालय ने कहा कि समय-समय इस विषय में अदालत आदेश देती आई है कि केवल योग्य आवेदकों की ही नियुक्ति हो और यूजीसी के भी यही प्रावधान हैं।  याचिकाकर्ता भले ही एक्सटेंशन लेक्चरार के पद पर कार्यरत रहे हैं, लेकिन इस दौरान भी वे अनिवार्य योग्यता पूरी नहीं कर पाए।
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वह चाहते तो नेट की परीक्षा पास कर सकते थे। ऐसे में अब सरकार द्वारा बनाई गई 4 मार्च की पॉलिसी को चुनौती देना उचित नहीं है। यह टिप्पणी करते हुए उच्च न्यायालय ने याचिकाओं को खारिज कर दिया।
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