फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana High Court Rejected Future Maker Life Care Private Limited Bail Petition

10 लाख से हुई शुरू कंपनी तीन साल में 3 हजार करोड़ की हुई, जो जांच का विषय है: उच्च न्यायालय

Tue, 29 Sep 2020 12:54 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 29 Sep 2020 12:54 PM IST
विज्ञापन
Punjab Haryana High Court Rejected Future Maker Life Care Private Limited Bail Petition
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
फ्यूचर मेकर लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी राधे श्याम की जमानत याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अस्तित्व विहीन उत्पाद बेच कर तीन साल में 10 लाख से 2956 करोड़ की कंपनी बनाने वालों को जमानत नहीं दी जा सकती। याचिका दाखिल करते हुए कंपनी के सीएमडी व अन्य की ओर से उच्च्च न्यायालय से जमानत की मांग की गई थी।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया कि उक्त घोटाले में उसकी कोई भूमिका नहीं है। उसे निचली अदालत ने 6 फरवरी 2019 को नियमित जमानत का लाभ दिया था, जिसे 20 मई को वापस ले लिया गया। इस फैसले के खिलाफ याची ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद याची ने 20 अक्तूबर को यह याचिका वापिस ले ली थी।
विज्ञापन


सरकार की ओर से उच्च न्यायालय को बताया गया कि कंपनी के 14 चीफ प्रमोटर हैं और 100 मेन प्रमोटर हैं। यह सभी याचिकाकर्ता के आधीन काम करते थे। कंपनी रोजाना हिसार से करीब 10 करोड़ और पूरे देश से 40 करोड़ का निवेश ले रही थी। कंपनी के पास न तो अपना कोई प्रोडक्ट था और न ही कोई मैन्युफैक्चिरंग युनिट। यह सब फर्जीवाड़ा किया जा रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


उच्च न्यायालय को यह भी बताया गया कि कंपनी पर जीएसटी का 398 करोड़ रुपये बकाया है, जिसका भुगतान नहीं किया गया है। कंपनी पर कुल 28 एफआईआर हैं और इनमें से 24 में याचिकाकर्ता का नाम शामिल हैं। यह एफआईआर हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र में दर्ज हैं। इस मामले में 31 आरोपी हैं जिनमें से 10 अभी पुलिस की गिरफ्त के बाहर हैं।

उच्च न्यायालय को बताया गया कि कंपनी के रिकार्ड के अनुसार, 2956 करोड़ में से 1904 करोड़ रुपये को वैरीफाई किया जा चुका है, जबकि बाकी 1053 करोड़ को अभी किया जाना बाकी है। कंपनी के विभिन्न खातों से याची के खाते में करीब 1 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं।

उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि याची ने कंपनी से मोटी राशि कमाई है और ऐसे में वह खुद को निर्दोष कैसे बता सकता है। जांच अभी जारी है और इस मामले के 10 आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं। यदि ऐसी स्थिति में याची को जमानत का लाभ दिया गया तो वह जांच को प्रभावित कर सकता है।

उच्च न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक कंपनी जो 26 फरवरी 2015 को याची और बंसी लाल ने 10 लाख रुपये से आरंभ की थी, वह कैसे केवल तीन साल में 2956 करोड़ रुपये की हो गई, यह जांच करना बेहद आवश्यक है। उच्च न्यायालय ने कहा कि वर्तमान में इतनी बड़ी संख्या में निवेश करने वालों का हित देखते हुए यह आवश्यक है कि याची को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए। ऐसे में याची समेत अन्य की जमानत याचिका को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed