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हाईकोर्ट ने सुनाया फरमान, जज बोले- वेंडर हुए परेशान तो अफसरों को जेब से करना होगा भुगतान
Thu, 09 Jan 2020 11:22 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 09 Jan 2020 11:22 AM IST
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फाइल फोटो
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चंडीगढ़ के स्ट्रीट वेंडरों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वेंडरों से लाइसेंस फीस ली जा रही है तो उन्हें सभी सुविधाएं मिलना भी सुनिश्चित हो। यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में नाकाम रहे तो उन्हें इसके लिए अपनी जेब से भुगतान करने को तैयार रहना होगा। सुनवाई आरंभ होते ही निगम आयुक्त केके यादव ने हाईकोर्ट में वेंडरों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपी। यादव ने बताया कि वेंडरों को री लोकेट करने के लिए निगम तेजी से काम कर रहा है।
चार दिसंबर को वेंडरों को 1038 नई साइट अलॉट की गई हैं। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि अभी तक 4284 रजिस्टर्ड वेंडरों को वेंडिंग का स्थान दे दिया गया है। इनमें से 2845 को रीलोकेट कर भी दिया गया है। इसके साथ ही सेक्टर 15 निवासियों को होने वाली पार्किंग की समस्या के चलते वहां पर वेंडिंग के स्थानों को 1112 से घटा कर 936 कर दिया गया है। वेंडरों पर कार्रवाई का ब्योरा देते हुए बताया गया कि निगम ने 329 वेंडरों का चालान किया है और 17 रजिस्टर्ड वेंडरों के चालान नियमों के खिलाफ चलने के कारण किया गया है।
साथ ही इन वेंडरों से 194 ट्रक सामान जब्त किया गया है। निगम ने वेंडरों की मदद के लिए निगम कार्यालय में हेल्प डेस्क बनाया है। इस हेल्प डेस्क के अभी तक वेंडरों की 1200 शिकायतों का निपटारा किया है। कोर्ट ने कहा कि वेंडरों को रजिस्टर्ड कर उनसे फीस ली जा रही है तो उन्हें सुविधाएं मिले यह भी सुनिश्चित हो। उन्हें शौचालय, पीने का पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। इसके साथ ही यह भी कहा कि यदि अधिकारी जिम्मेदारी निभाने में नाकामयाब रहे तो उन्हें अपनी जेब से भुगतान करना होगा।
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सेक्टर 15 निवासियों ने वेंडरों को लेकर आपत्ति दर्ज की तो हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आपको इतनी ही आपत्ति है तो यहां से संपत्ति बेच कहीं बाहर जाकर रहो। एक्ट के प्रावधानों के तहत वेंडरों को नया स्थान दिया जा रहा है इसमें दखल की जरूरत नहीं है। हालांकि बाद में कोर्ट ने निगम को और वेंडिंग साइट खोजने का आदेश दिया जहां पर वेंडरों को शिफ्ट किया जा सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर वेंडरों को लेकर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के निगम को आदेश जारी किया है।
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चार दिसंबर को वेंडरों को 1038 नई साइट अलॉट की गई हैं। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि अभी तक 4284 रजिस्टर्ड वेंडरों को वेंडिंग का स्थान दे दिया गया है। इनमें से 2845 को रीलोकेट कर भी दिया गया है। इसके साथ ही सेक्टर 15 निवासियों को होने वाली पार्किंग की समस्या के चलते वहां पर वेंडिंग के स्थानों को 1112 से घटा कर 936 कर दिया गया है। वेंडरों पर कार्रवाई का ब्योरा देते हुए बताया गया कि निगम ने 329 वेंडरों का चालान किया है और 17 रजिस्टर्ड वेंडरों के चालान नियमों के खिलाफ चलने के कारण किया गया है।
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साथ ही इन वेंडरों से 194 ट्रक सामान जब्त किया गया है। निगम ने वेंडरों की मदद के लिए निगम कार्यालय में हेल्प डेस्क बनाया है। इस हेल्प डेस्क के अभी तक वेंडरों की 1200 शिकायतों का निपटारा किया है। कोर्ट ने कहा कि वेंडरों को रजिस्टर्ड कर उनसे फीस ली जा रही है तो उन्हें सुविधाएं मिले यह भी सुनिश्चित हो। उन्हें शौचालय, पीने का पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। इसके साथ ही यह भी कहा कि यदि अधिकारी जिम्मेदारी निभाने में नाकामयाब रहे तो उन्हें अपनी जेब से भुगतान करना होगा।
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सेक्टर 15 निवासियों ने वेंडरों को लेकर आपत्ति दर्ज की तो हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आपको इतनी ही आपत्ति है तो यहां से संपत्ति बेच कहीं बाहर जाकर रहो। एक्ट के प्रावधानों के तहत वेंडरों को नया स्थान दिया जा रहा है इसमें दखल की जरूरत नहीं है। हालांकि बाद में कोर्ट ने निगम को और वेंडिंग साइट खोजने का आदेश दिया जहां पर वेंडरों को शिफ्ट किया जा सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर वेंडरों को लेकर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के निगम को आदेश जारी किया है।