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तीन दिन बंधक बने रहे लोग, पंचकूला हिंसा में हुई 40 मौतों का दोषी कौन, बताए सरकार: हाईकोर्ट

Wed, 11 Dec 2019 10:04 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 11 Dec 2019 10:04 AM IST
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Punjab Haryana High Court Raised Questions on Panchkula Violence Case, Ram Rahim
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
तीन दिनों तक पंचकूला को समर्थकों द्वारा बंधक बनाया गया और फिर हिंसा होते ही गोली चला दी गई। इसमें 40 लोगों की जान गई है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है। हाईकोर्ट ने यह सवाल हरियाणा सरकार के समक्ष रखा है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि पूरे प्रदेश में जितना नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा इस पर ढाई दिन की सुनवाई के बाद फैसला लिया जाएगा। जस्टिस जैन ने कहा कि अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का सभी को अधिकार है, लेकिन उन तीन दिनों में यह समर्थक किस मांग को लेकर इकट्ठा हुए थे, सरकार को यह पता था।
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इसके बावजूद साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई अदालत द्वारा 25 अगस्त 2017 को डेरा मुखी को दोषी करार देने के बाद तीन दिनों तक पूरे पंचकूला को डेरा समर्थकों ने बंधक बनाए रखा। बाद में पुलिस को गोली चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसमे 40 लोगों की जान चली गई। आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है और उनके परिवारों को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी। इसके बाद पंचकूला सहित पूरे हरियाणा में हुए दंगों से नुकसान की भरपाई कौन करेगा हाईकोर्ट में इसको लेकर बहस आरंभ हुई।
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जस्टिस राजीव शर्मा, जस्टिस आरके जैन एवं जस्टिस एजी मसीह की फुल बेंच ने साफ कर दिया है कि अब इस केस को और लंबा नहीं खींचा जाएगा। कोर्ट के सहयोगी वकील सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता को हाईकोर्ट ने कहा कि वह डेढ़ दिन में अपनी दलीलें पूरी करें। वहीं हरियाणा सरकार और डेरे को पक्ष रखने के लिए आधा-आधा दिन का समय दिया गया। मंगलवार दोपहर बाद अनुपम गुप्ता ने अपना पक्ष रखना शुरू किया और अब शुक्रवार को वह पूरा दिन अपना पक्ष रखेंगे। उसके बाद हरियाणा सरकार और डेरे को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
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डेरे की दलील मुआवजे पर हाईकोर्ट नहीं कर सकता सुनवाई

केस की सुनवाई आरंभ हुई तो डेरा सच्चा सौदा की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने कहा कि दंगों और तोड़फोड़ की भरपाई डेरे से नहीं की जा सकती है। इसमें डेरे का कोई दोष नहीं है और वैसे भी सुप्रीम कोर्ट यह तय कर चुका है कि ऐसे मामले में नुकसान के आंकलन के लिए एक कमेटी गठित की जानी चाहिए जो पूरा आंकलन कर उसकी भरपाई करवाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस पर सुनवाई भी कर सकते हैं और निर्देश भी दे सकते हैं।

अनुपम गुप्ता ने कहा पूरे नुकसान के लिए सरकार जिम्मेदार
हाईकोर्ट को सहयोग दे रहे अनुपम गुप्ता ने कहा कि अगस्त 2017 में हुए दंगों के दौरान डेरा समर्थकों द्वारा की गई तोड़फोड़ और आगजनी के लिए सरकार जिम्मेदार है। अगर सरकार समय पर कार्रवाई करती तो इन दंगों को रोका जा सकता था। यह सरकार की की ढील थी कि इस मामले में हाईकोर्ट को आगे आना पड़ा और कड़े निर्देश देने के लिए मजबूर होना पड़ा। सरकार ने बाद में दंगाइयों से निपटने के लिए जो किया वह हाईकोर्ट के आदेशों पर ही किया गया।
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