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फरमानः कच्चे कर्मियों से भेदभाव क्यों, पक्का करने को एक माह में पॉलिसी बनाए हरियाणा सरकार
Fri, 31 May 2019 10:03 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 31 May 2019 10:03 AM IST
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अदालत का फैसला
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दो दशकों से सेवारत कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक माह में नीति बना हाईकोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। कच्चे कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि वे करीब दो दशक से विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं।
उनके साथ के कर्मियों को पक्का कर दिया गया लेकिन याचिकाकर्ताओं को पक्का नहीं किया गया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने आदेश जारी करते हुए याचिकाकर्ताओं को जिस समय उनकी दस साल की सेवा पूरी हो तभी से रेगुलर करने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ हरियाणा सरकार ने खंडपीठ में अपील की थी।
हरियाणा सरकार ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं को राहत देने का फैसला गलत है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सिंगल बेंच के सामने याची रहे और खंडपीठ के समक्ष प्रतिवादी तीन कर्मियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न इस आदेश पर रोक लगा दी जाए।
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उनके साथ के कर्मियों को पक्का कर दिया गया लेकिन याचिकाकर्ताओं को पक्का नहीं किया गया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने आदेश जारी करते हुए याचिकाकर्ताओं को जिस समय उनकी दस साल की सेवा पूरी हो तभी से रेगुलर करने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ हरियाणा सरकार ने खंडपीठ में अपील की थी।
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हरियाणा सरकार ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं को राहत देने का फैसला गलत है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सिंगल बेंच के सामने याची रहे और खंडपीठ के समक्ष प्रतिवादी तीन कर्मियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न इस आदेश पर रोक लगा दी जाए।
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नोटिस के जवाब में प्रतिवादी पक्ष हाईकोर्ट में पेश हुआ और अपना पक्ष रखा। इस दौरान हाईकोर्ट को उमा देवी मामले का हवाला देते हुए कहा कि सेवाएं इतने लंबे समय तक दी गई हैं और उनके साथ के लोगों को रेगुलर कर दिया गया है जबकि उनको नहीं किया गया। यह न केवल उमा देवी मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है बल्कि समानता के अधिकार का भी उल्लंघन है।
इस मामले में पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को रेगुलर करने पर सरकार को उनका पक्ष रखने के आदेश दिए थे। आदेश के अनुरूप जब वीरवार को मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो हाईकोर्ट से फिर से समय मांगा गया और बताया गया कि सरकार कच्चे कर्मियों को पक्का करने के लिए नीति बना रही है।
हाईकोर्ट ने इस पर सरकार को आदेश जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर इस नीति को फाइनल कर हाईकोर्ट में सौंपने के आदेश दिए हैं। इस नीति के तहत वह मानक तय होंगे जिन्हें पूरा करने वाले कर्मियों को रेगुलर किया जाएगा।
इस मामले में पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को रेगुलर करने पर सरकार को उनका पक्ष रखने के आदेश दिए थे। आदेश के अनुरूप जब वीरवार को मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो हाईकोर्ट से फिर से समय मांगा गया और बताया गया कि सरकार कच्चे कर्मियों को पक्का करने के लिए नीति बना रही है।
हाईकोर्ट ने इस पर सरकार को आदेश जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर इस नीति को फाइनल कर हाईकोर्ट में सौंपने के आदेश दिए हैं। इस नीति के तहत वह मानक तय होंगे जिन्हें पूरा करने वाले कर्मियों को रेगुलर किया जाएगा।