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पंजाब सरकार को झटका: हाईकोर्ट ने दिया VIP Security की समीक्षा का आदेश, तब तक सभी को मिलेगा एक सुरक्षा अधिकारी

Tue, 23 Aug 2022 04:21 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 23 Aug 2022 04:21 PM IST
सार

सुरक्षा की समीक्षा के बाद खतरे को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार सुरक्षाकर्मियों की संख्या पर निर्णय लेगी।

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Punjab-Haryana High Court ordered review of security of 424 VIPs of Punjab
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पंजाब के 424 वीआईपी की सुरक्षा कम करने व वापस लेने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को इन सभी की सुरक्षा की नए सिरे से समीक्षा का आदेश दिया है। साथ ही वर्तमान में जो सुरक्षा कवर मौजूद है उसे समीक्षा तक जारी रखने का और जिनकी सुरक्षा पूरी तरह से वापस ली गई है, उन्हें कम से कम एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ) उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है।

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जस्टिस राज मोहन सिंह ने सुरक्षा वापस लेने के पंजाब सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली 45 याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सुरक्षा किसी का अधिकार नहीं है और न ही रुतबे और स्टेटस के लिए सुरक्षा दी जानी चाहिए। किसी व्यक्ति को करदाताओं के पैसे से सुरक्षा केवल असामान्य परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए। 
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कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा मुहैया करवाने से जुड़ा काम संबंधित प्राधिकरण का है और कोर्ट खुद को प्राधिकरण के स्थान पर रखकर सुरक्षा से जुड़ा निर्णय नहीं ले सकती है। सुरक्षा की समीक्षा करते हुए खतरे का आकलन किया जाए और जब खतरा वास्तविक हो और इंटेलिजेंस की रिपोर्ट इसे जरूरी बताती हो तो ही सुरक्षा दी जाए। साथ ही कोर्ट ने सुरक्षा से जुड़ी सूची लीक होने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि दोबारा समीक्षा होने से इस गलती को सुधारा जा सकता है।

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424 वीआईपी की सुरक्षा वापस लेने के खिलाफ विभिन्न वीआईपी लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने व अपने परिवार को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। याचिकाओं में कहा गया था कि सुरक्षा वापस लेने के चलते उनकी जान को खतरा है। पंजाब सरकार ने सुरक्षा वापस लेकर उन पर खतरे को और भी बढ़ा दिया है। साथ ही सुरक्षा वापस लेने के आदेश को सार्वजनिक कर दिया गया जिससे हर किसी को पता चल गया कि किसकी कितनी सुरक्षा वापस ली गई है। 

इसके जवाब में पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि छह जून को घल्लूघारा दिवस के चलते सुरक्षा वापस ली गई थी। सात जून से पुरानी सुरक्षा बहाल कर दी गई है। इस सूची के सार्वजनिक होने के मामले की जांच की जा रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी, बलबीर सिंह सिद्धू, गुरचरण सिंह बोपाराय, सुखविंदर सिंह, कृष्ण कुमार, देश राज दुग्गा, गुलजार सिंह रणिके, सुच्चा सिंह छोटेपुर समेत 45 ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर याचिकाएं दायर कर दी थी।

सुरक्षा में कटौती के बाद हुई थी सिद्धू मूसेवाला की हत्या
वीआईपी लोगों की सुरक्षा वापस लेने से जुड़ी जानकारी लीक होने के मामले में सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। चंडीगढ़ निवासी सतबीर सिंह वालिया ने आरोप लगाया था कि नई सरकार ने वीवीआईपी कल्चर में कटौती के नाम पर बिना तय प्रक्रिया का पालन किए कई वीआईपी लोगों की सुरक्षा में कटौती कर दी। इसके बाद कटौती से जुड़ी जानकारी लीक हो गई और इसका तत्काल प्रभाव गीतकार सिद्धू मूसेवाला की हत्या के रूप में देखा गया। हत्या के बाद आप सरकार विवादों में घिर गई थी। तब हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची की मांग पर पंजाब के डीजीपी को दो माह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश पर मिला एक पीएसओ
सुरक्षा में कटौती करते हुए पंजाब सरकार ने 2 फरवरी को हुई रिव्यू कमेटी की बैठक में 235 लोगों की सुरक्षा पूरी तरह से वापस ले ली थी। इसके बाद 29 मार्च को हुई बैठक में 174 वीआईपी की सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया था। तक हाईकोर्ट ने जिन लोगों की सुरक्षा पूरी तरह से वापस ली गई है उन सभी को एक-एक पीएसओ उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। अब यह आदेश सुरक्षा की समीक्षा तक जारी रखने का हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है। 

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