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फरमानः 5 वर्ष की उम्र में पूरी तरह दिव्यांग हुए अभिमन्यु को 23 लाख दिए जाएं, ऐसे हुआ था हादसा
Mon, 27 May 2019 10:54 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 27 May 2019 10:54 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 वर्ष की आयु में 100 प्रतिशत दिव्यांग हुए चंडीगढ़ निवासी अभिमन्यु को 23 लाख मुआवजा जारी करने के आदेश दिए हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक व्हील चेयर के लिए 1 लाख की राशि देने को भी कहा गया है। याचिका दाखिल करते हुए अभिमन्यु ने बताया कि जब वह 5 साल का था तब अपने माता-पिता और दो अन्य के साथ शाहबाद से चंडीगढ़ आ रहा था। इस दौरान संपत सिंह गाड़ी चला रहा था और उसकी पत्नी उसकी साथ की सीट पर बैठी थी।
याची व उसके माता-पिता पिछली सीट पर थे। अचानक संपत ने गाड़ी से नियंत्रण खो दिया और सड़क के बहुत किनारे खड़ी ट्रॉली में मारुति भिड़ा दी। इसके चलते संपत और उसकी पत्नी की मौत हो गई। याची को बेहोशी की स्थिति में पीजीआई लाया गया, जहां तीन माह तक उसका इमरजेंसी और आईसीयू में इलाज चला। उसका आधा शरीर पक्षाघात का शिकार हो चुका है, इसलिए वह चल फिर भी नहीं सकता। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ ने 2002 में याची को मुआवजे के तौर पर 9 लाख रुपये मंजूर किए थे।
इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस दौरान याची ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और लॉ पूरी कर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस आरंभ कर दी। हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 5 साल की उम्र में इतना बड़ा हादसा झेलने के बाद याची कई सुविधाओं से महरूम रह गया, जीवन के कई सुखों वंचित रह गया इसलिए 9 लाख मुआवजा पर्याप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 23 लाख कर दिया और इसके साथ ही इलेक्ट्रिक व्हील चेयर के लिए भी 1 लाख की राशि का भुगतान करने के बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं।
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याची व उसके माता-पिता पिछली सीट पर थे। अचानक संपत ने गाड़ी से नियंत्रण खो दिया और सड़क के बहुत किनारे खड़ी ट्रॉली में मारुति भिड़ा दी। इसके चलते संपत और उसकी पत्नी की मौत हो गई। याची को बेहोशी की स्थिति में पीजीआई लाया गया, जहां तीन माह तक उसका इमरजेंसी और आईसीयू में इलाज चला। उसका आधा शरीर पक्षाघात का शिकार हो चुका है, इसलिए वह चल फिर भी नहीं सकता। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ ने 2002 में याची को मुआवजे के तौर पर 9 लाख रुपये मंजूर किए थे।
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इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस दौरान याची ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और लॉ पूरी कर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस आरंभ कर दी। हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 5 साल की उम्र में इतना बड़ा हादसा झेलने के बाद याची कई सुविधाओं से महरूम रह गया, जीवन के कई सुखों वंचित रह गया इसलिए 9 लाख मुआवजा पर्याप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 23 लाख कर दिया और इसके साथ ही इलेक्ट्रिक व्हील चेयर के लिए भी 1 लाख की राशि का भुगतान करने के बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं।
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