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ड्राइवर ने दरवाजा बंद किए बिना बस चलाई तो इसमें गिरने वाले की कोई गलती नहीं: हाईकोर्ट
Sun, 05 May 2019 09:28 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 05 May 2019 09:28 AM IST
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करीब दो दशक पहले सीटीयू की बस से गिरकर 100 प्रतिशत दिव्यांग हुईं सुषमा को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने ब्याज समेत मुआवजा देने के आदेश जारी किए। सुषमा को 1122072 रुपये 7 प्रतिशत ब्याज समेत मुआवजे के तौर पर मिलेंगे। हाईकोर्ट ने यह आदेश मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए दिया। याचिका दाखिल करते हुए बताया गया कि सुषमा सीटीयू बस में सवार होकर अपने घर से कॉलेज जा रही थीं।
इस दौरान एक चौक पर चालक ने अचानक तेज से गति से बस को मोड़ लिया, जिससे सुषमा नीचे गिर गईं। हादसे के बाद उन्हें पीजीआई ले जाया गया। याची ने बताया कि उन्हें डाक्टरों ने 100 प्रतिशत दिव्यांग घोषित कर दिया क्योंकि वह सिर पर लगी चोट के कारण अब कुछ भी नहीं कर सकती थीं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 1 लाख रुपये का मुआवजा तय किया और इसमें आधी कटौती इसलिए कर दी क्योंकि सुषमा बस के दरवाजे के पास खड़ी थी।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह सुषमा की लापरवाही थी इसलिए उसे केवल 50 हजार रुपये मुआवजा ही दिया जाए। इसके खिलाफ अपील पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब बस में दरवाजा था तो यह ड्राइवर की जिम्मेदारी बनती है कि बस चलने से पहले दरवाजा बंद हो। खास तौर पर सुबह के समय जब भीड़ अधिक होती है। हाईकोर्ट ने कहा कि सुषमा अब न तो नौकरी कर सकती है और न ही जीवन के अन्य आनंद उठा सकती है। इस स्थिति में कोई उससे शादी भी नहीं करेगा।
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ऐसे में हाईकोर्ट ने उसे करीब सवा 11 लाख रुपये का मुआवजा जारी करने के आदेश दिए हैं। इसमें मानसिक पीड़ा के 1 लाख, शादी के सुख से वंचित होने के लिए 3 लाख, अटेंडेंट के लिए 2 लाख रुपये शामिल हैं।
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इस दौरान एक चौक पर चालक ने अचानक तेज से गति से बस को मोड़ लिया, जिससे सुषमा नीचे गिर गईं। हादसे के बाद उन्हें पीजीआई ले जाया गया। याची ने बताया कि उन्हें डाक्टरों ने 100 प्रतिशत दिव्यांग घोषित कर दिया क्योंकि वह सिर पर लगी चोट के कारण अब कुछ भी नहीं कर सकती थीं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 1 लाख रुपये का मुआवजा तय किया और इसमें आधी कटौती इसलिए कर दी क्योंकि सुषमा बस के दरवाजे के पास खड़ी थी।
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ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह सुषमा की लापरवाही थी इसलिए उसे केवल 50 हजार रुपये मुआवजा ही दिया जाए। इसके खिलाफ अपील पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब बस में दरवाजा था तो यह ड्राइवर की जिम्मेदारी बनती है कि बस चलने से पहले दरवाजा बंद हो। खास तौर पर सुबह के समय जब भीड़ अधिक होती है। हाईकोर्ट ने कहा कि सुषमा अब न तो नौकरी कर सकती है और न ही जीवन के अन्य आनंद उठा सकती है। इस स्थिति में कोई उससे शादी भी नहीं करेगा।
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ऐसे में हाईकोर्ट ने उसे करीब सवा 11 लाख रुपये का मुआवजा जारी करने के आदेश दिए हैं। इसमें मानसिक पीड़ा के 1 लाख, शादी के सुख से वंचित होने के लिए 3 लाख, अटेंडेंट के लिए 2 लाख रुपये शामिल हैं।