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हाईकोर्ट का फरमान, प्रीमियम की राशि नहीं मिली तो भी देना होगा एक्सीडेंट का मुआवजा
Mon, 28 Jan 2019 11:39 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 28 Jan 2019 11:39 AM IST
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कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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यदि बीमा पॉलिसी जारी हुई है और एक्सीडेंट की तिथि को प्रभाव में थी तो प्रीमियम की राशि न भरने की दलील देकर बीमा कंपनी मुआवजे से इनकार नहीं कर सकती है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम आदेश बीमा कंपनी द्वारा मोटर एक्सीडेंट के एक मामले में दाखिल अपील को खारिज करते हुए जारी किए हैं।
याचिका दाखिल करते हुए बीमा कंपनी ने कहा कि हिसार में सुशील को एक जीप ने टक्कर मार दी थी। जीप का बीमा करवाने के लिए जीप मालिक ने पैसा और दस्तावेजे एजेंट को सौंप दिए थे और पॉलिसी उस समय प्रभाव में थी, लेकिन एजेंट ने पैसा जमा नहीं करवाया, जिसकी आपराधिक शिकायत भी की गई है।
बीमा कंपनी ने कहा कि जब बीमा की एवज में कंपनी को प्रीमियम की राशि ही प्राप्त नहीं हुई तो उसे मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एजेंट बीमा कंपनी का था और उसने राशि और दस्तावेज लिए थे।
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बीमा कंपनी ने पॉलिसी भी जारी की थी जो एक्सीडेंट के समय प्रभाव में थी। अब एजेंट पैसा नहीं जमा कराता है तो यह बीमा कंपनी देखे कि उसे कैसे यह राशि लेनी है। एजेंट की इस गलती का खामियाजा एक्सीडेंट के पीड़ित को भुगतने नहीं दिया जा सकता। एक्सीडेंट 7 मार्च 2013 को हुआ था और पॉलिसी प्रीमियम न मिलने के कारण 15 मई को कैंसल की गई।
ऐसे में बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती और उसे मुआवजे का भुगतान करना ही होगा। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी, वाहन चालक और वाहन मालिक को मिलकर पीड़ित को 3 लाख 11 हजार रुपये 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ संयुक्त रूप से सौंपने के आदेश दिए हैं।
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याचिका दाखिल करते हुए बीमा कंपनी ने कहा कि हिसार में सुशील को एक जीप ने टक्कर मार दी थी। जीप का बीमा करवाने के लिए जीप मालिक ने पैसा और दस्तावेजे एजेंट को सौंप दिए थे और पॉलिसी उस समय प्रभाव में थी, लेकिन एजेंट ने पैसा जमा नहीं करवाया, जिसकी आपराधिक शिकायत भी की गई है।
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बीमा कंपनी ने कहा कि जब बीमा की एवज में कंपनी को प्रीमियम की राशि ही प्राप्त नहीं हुई तो उसे मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एजेंट बीमा कंपनी का था और उसने राशि और दस्तावेज लिए थे।
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बीमा कंपनी ने पॉलिसी भी जारी की थी जो एक्सीडेंट के समय प्रभाव में थी। अब एजेंट पैसा नहीं जमा कराता है तो यह बीमा कंपनी देखे कि उसे कैसे यह राशि लेनी है। एजेंट की इस गलती का खामियाजा एक्सीडेंट के पीड़ित को भुगतने नहीं दिया जा सकता। एक्सीडेंट 7 मार्च 2013 को हुआ था और पॉलिसी प्रीमियम न मिलने के कारण 15 मई को कैंसल की गई।
ऐसे में बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती और उसे मुआवजे का भुगतान करना ही होगा। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी, वाहन चालक और वाहन मालिक को मिलकर पीड़ित को 3 लाख 11 हजार रुपये 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ संयुक्त रूप से सौंपने के आदेश दिए हैं।