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बच्चों की कस्टडी मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया मां के खिलाफ अहम फैसला, सिर्फ दो दिन मिल पाएगी
Wed, 16 Oct 2019 10:57 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 16 Oct 2019 10:57 AM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी मामले में मां के खिलाफ अहम फैसला सुनाया, और अब वह बच्चों से सिर्फ दो दिन के लिए मिल पाएगी। केस में आदेश सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि मां का बच्चों पर कानूनी अधिकार बच्चों की भलाई और उनकी इच्छा से ऊपर नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी हिसार की फैमिली कोर्ट द्वारा सुनाए गए आदेश के खिलाफ बच्चों की मां की याचिका को खारिज करते हुए की है। याचिका दाखिल करते हुए महिला की ओर से बताया गया कि 2005 में उसका विवाह बेहद धूमधाम से हुआ था और पर्याप्त दहेज दिया गया था।
ससुराल वाले दहेज को नाकाफी मान शादी के बाद से ही उसे परेशान करने लगे थे और अक्सर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इसके बाद 2006 में उनकी पहली बेटी हुई, जिसके बाद अत्याचार और बढ़ गया। 2007 में जब वह दोबारा गर्भवती हुई तो लिंग जांच के लिए भी दबाव बनाया गया।
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हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी हिसार की फैमिली कोर्ट द्वारा सुनाए गए आदेश के खिलाफ बच्चों की मां की याचिका को खारिज करते हुए की है। याचिका दाखिल करते हुए महिला की ओर से बताया गया कि 2005 में उसका विवाह बेहद धूमधाम से हुआ था और पर्याप्त दहेज दिया गया था।
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ससुराल वाले दहेज को नाकाफी मान शादी के बाद से ही उसे परेशान करने लगे थे और अक्सर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इसके बाद 2006 में उनकी पहली बेटी हुई, जिसके बाद अत्याचार और बढ़ गया। 2007 में जब वह दोबारा गर्भवती हुई तो लिंग जांच के लिए भी दबाव बनाया गया।
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परेशान होकर मायके चली गई
इस सब से परेशान होकर वह घर छोड़कर चली गई थी। दो साल बाद वुमन सेल में शिकायत दी गई जिसके बाद पति ने हलफनामा दिया कि वह अब कोई अत्याचार नहीं करेगा। बावजूद इसके पति का बर्ताव नहीं बदला, जिसके चलते वह 2010 में मायके चली गई। इसके बाद से ही लगातार बच्चों की कस्टडी पाने के लिए संघर्ष कर रही है।
वहीं, पति की ओर से आरोपों को सिरे से खारिज किया गया। हाईकोर्ट ने केस पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे हिसार के अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं जबकि याची भिवानी के एक गांव में रहती है। साथ ही बच्चों ने कोर्ट में पिता के साथ रहने की बात कही है जो याची के खिलाफ है। याची की सास घर पर रहती है और ऐसे में याची के पति के बाहर जाने पर वह बच्चियों का ख्याल रख सकती है।
इसलिए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याची को माह में दो दिन बच्चों से मिलने का समय दिया है।
वहीं, पति की ओर से आरोपों को सिरे से खारिज किया गया। हाईकोर्ट ने केस पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे हिसार के अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं जबकि याची भिवानी के एक गांव में रहती है। साथ ही बच्चों ने कोर्ट में पिता के साथ रहने की बात कही है जो याची के खिलाफ है। याची की सास घर पर रहती है और ऐसे में याची के पति के बाहर जाने पर वह बच्चियों का ख्याल रख सकती है।
इसलिए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याची को माह में दो दिन बच्चों से मिलने का समय दिया है।