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नोटिसः जस्टिस रणजीत सिंह की शिकायत पर सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया से जवाब तलबी
Thu, 21 Feb 2019 11:38 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 21 Feb 2019 11:38 AM IST
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Bikram Majithia, Sukhbir Badal
रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह की शिकायत पर पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल और पूर्व कैनिबेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया को नोटिस जारी करके जवाब तलब कर लिया गया है। अब अगली सुनवाई पर दोनों को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा। बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित रावल के सवालों का जस्टिस रणजीत सिंह ने दस्तावेजों सहित जवाब सौंपा।
इसको देखने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि वह पहले जस्टिस रणजीत सिंह द्वारा इन दोनों के खिलाफ की गई शिकायत और दिए गए सबूतों को देखने के बाद ही निर्णय करेंगे कि आगे सुनवाई होगी या नहीं। इसके बाद दोनों की प्रेस कांफ्रेंस व विधान सभा के बाहर न्यूज चैनलों को दिए गए बयानों की सीडी देखी थी।
इसके बाद जस्टिस रावल ने आयोग के गठन की नोटिफिकेशन मांगी थी। कोर्ट ने कहा था कि वह जानना चाहते हैं कि जब टिप्पणी की गई तो आयोग अस्तित्व में था या नहीं। जस्टिस रणजीत सिंह ने हाईकोर्ट को भेजी शिकायत में सुखबीर बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया द्वारा उन पर और उनकी लॉ की डिग्री पर की गई आपत्तियों और टिप्पणियों का जिक्र किया था।
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साथ ही आयोग और उनके खिलाफ विभिन्न समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर दी गई इंटरव्यू का भी हवाला दिया था। अपनी शिकायत में जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा है कि यह सीधे तौर पर कमीशंस ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-10 ए का उल्लंघन है। ऐसे में इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है जस्टिस रणजीत सिंह ने
जस्टिस रणजीत सिंह ने कमीशंस ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-10 ए के तहत यह आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई है। इस एक्ट के तहत जांच आयोग के खिलाफ ऐसी कोई भी टिप्पणी करना, जिससे आयोग या उसके सदस्य की प्रतिष्ठा आहत होती है तो उस व्यक्ति के खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है। शिकायत सही पाए जाने पर छह महीने का कारावास या जुर्माना या दोनों दोनों की सजा सुनाई जा सकती है।
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इसको देखने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि वह पहले जस्टिस रणजीत सिंह द्वारा इन दोनों के खिलाफ की गई शिकायत और दिए गए सबूतों को देखने के बाद ही निर्णय करेंगे कि आगे सुनवाई होगी या नहीं। इसके बाद दोनों की प्रेस कांफ्रेंस व विधान सभा के बाहर न्यूज चैनलों को दिए गए बयानों की सीडी देखी थी।
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इसके बाद जस्टिस रावल ने आयोग के गठन की नोटिफिकेशन मांगी थी। कोर्ट ने कहा था कि वह जानना चाहते हैं कि जब टिप्पणी की गई तो आयोग अस्तित्व में था या नहीं। जस्टिस रणजीत सिंह ने हाईकोर्ट को भेजी शिकायत में सुखबीर बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया द्वारा उन पर और उनकी लॉ की डिग्री पर की गई आपत्तियों और टिप्पणियों का जिक्र किया था।
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साथ ही आयोग और उनके खिलाफ विभिन्न समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर दी गई इंटरव्यू का भी हवाला दिया था। अपनी शिकायत में जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा है कि यह सीधे तौर पर कमीशंस ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-10 ए का उल्लंघन है। ऐसे में इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है जस्टिस रणजीत सिंह ने
जस्टिस रणजीत सिंह ने कमीशंस ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-10 ए के तहत यह आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई है। इस एक्ट के तहत जांच आयोग के खिलाफ ऐसी कोई भी टिप्पणी करना, जिससे आयोग या उसके सदस्य की प्रतिष्ठा आहत होती है तो उस व्यक्ति के खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है। शिकायत सही पाए जाने पर छह महीने का कारावास या जुर्माना या दोनों दोनों की सजा सुनाई जा सकती है।