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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana High Court Judgement Regarding Marriage Photos for Security

विवाह की फोटो शादी को साबित करने का दस्तावेज नहीं, उद्योग बन रही याचिकाएं: हाईकोर्ट

Tue, 16 Jun 2020 10:48 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 16 Jun 2020 10:48 AM IST
सार

  • प्रेमी जोड़े के लिए याचिका के साथ शादी की फोटो लगाना जरूरी नहीं
  • जज ने कहा- कोर्ट और प्रेमी जोड़े की जेब पर नहीं पड़ना चाहिए बोझ
  • कई तस्वीरों में ग्रंथी या पंडित नहीं दिखता, तो इनका कोई औचित्य नहीं

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Punjab Haryana High Court Judgement Regarding Marriage Photos for Security
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विवाह की फोटो शादी को साबित करने का दस्तावेज नहीं है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान की। इसके साथ ही प्रेमी जोड़ों द्वारा घर से भागकर शादी करने के बाद सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं में विवाह की फोटो के चलते दर्ज की जाने वाली आपत्तियों को अनावश्यक करार दिया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि आयु और नागरिकता संबंधी दस्तावेजों के आधार पर ही सुरक्षा के अधिकार के तहत जोड़ों को सुरक्षा उपलब्ध करवाने के आदेश दिए जा सकते हैं। मामला पंजाब के रहने वाले एक प्रेमी जोड़े की सुरक्षा से जुड़ी याचिका का था, जिसमें हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने फोटो की वजह से ऑब्जेक्शन लगा दिया था।
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हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री से जवाब मांगा तो बताया गया कि फोटो न लगाने पर कोई ऑब्जेक्शन नहीं लगाया जाता है, लेकिन यदि फोटो धुंधली है तो उस स्थिति में ऑब्जेक्शन लगाया जाता है।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी में बताई वजह

हाईकोर्ट ने कहा कि घर से भागने वाले प्रेमी जोड़े के पास संसाधनों का अभाव होता है। विवाह को प्रमाणित करने के लिए फोटो अनिवार्य नहीं होता और न ही सुरक्षा देने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। जब इस प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता ही नहीं होती है तो इसे अनिवार्य करने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

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कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि सुरक्षा से जुड़ी याचिका के साथ विवाह की तस्वीरों को न रखा जाए। विवाह की तस्वीरें उसी स्थिति में रखी जाएं, जब एडवोकेट यह हलफनामा दे कि इस केस के लिए फोटो देना बहुत जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि घर से भागे प्रेमी जोड़े के विवाह की जो फोटो दिखाई जाती हैं, उनमें से कई में ग्रंथी या पंडित आदि कोई नजर नहीं आता।

प्रेमी जोड़े मास्क में फोटो खिंचवाते हैं, जिनका कोई औचित्य नहीं है। ज्यादातर मामलों में यह फोटो किसी स्टूडियो में खींची नजर आती हैं, जिसका सुरक्षा से जुड़ी याचिका से कोई संबंध नहीं है।

उद्योग बन रही हैं सुरक्षा से जुड़ी याचिका

घर से भाग कर शादी करने के बाद हाईकोर्ट में अपनी सुरक्षा को लेकर प्रेमी जोड़ों द्वारा दायर याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर कोर्ट ने कहा कि अब सुरक्षा की मांग को लेकर प्रेमी जोड़ों द्वारा हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर करना छोटा उद्योग बनता जा रहा है  ऐसे मामलों में हाईकोर्ट को अपना समय लगाना पड़ता है, जिसमें सुरक्षा दिया जाना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत तय ही है।

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क्यों न यह काम निचली अदालतों में ही कर लिया जाए, जिससे हाईकोर्ट का समय बच सके। याचिकाओं में हाईकोर्ट को कुछ करने की जरूरत नहीं होती। ऐसे में बेहतर हो ऐसी याचिकाओं पर निचली अदालतें सुनवाई करें। कोर्ट ने कहा कि यह कोई आदेश नहीं हैं, लेकिन विधायिका को इस पर गौर करना चाहिए।
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