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डॉक्टरों की पिटाई का मामला: एफआईआर रद्द करने की मांग हाईकोर्ट से खारिज, कहा- परेशान करोगे तो कैसे करेंगे इलाज
Thu, 14 Oct 2021 08:53 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Thu, 14 Oct 2021 08:53 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने एफआईआर देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टि में यह लगता है कि जो आरोप एफआईआर में लगाए गए हैं उनमें सत्यता है। सीसीटीवी फुटेज भी आरोपियों के खिलाफ जा रही है। ऐसे में इस मामले में याची की एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अस्पताल में अशांति फैलाने, तोड़फोड़ करने, डॉक्टरों को पीटने व जान से धमकी देने के आरोपी की एफआईआर रद्द करने की याचिका पंजाब.हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रकार डॉक्टरों को परेशान किया जाएगा तो वह कैसे मरीजों के इलाज और उनकी जान बचाने का कार्य सही ढंग से कर सकेंगे।
नरेश कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने खिलाफ नारनौल में दर्ज एफआईआर रद्द करने की अपील की। याची ने बताया कि एक मरीज ओमपति की अस्पताल में मौत हो गई थी और उसके बाद उसके रिश्तेदार अस्पताल में एकत्रित हुए थे। सिविल सर्जन एसएन शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि इन लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की तथा डॉक्टरों से मारपीट कर उनको जान से मारने की धमकी भी दी। याची ने आरोपों को नकारते हुए डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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हाईकोर्ट ने एफआईआर देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टि में यह लगता है कि जो आरोप एफआईआर में लगाए गए हैं उनमें सत्यता है। सीसीटीवी फुटेज भी आरोपियों के खिलाफ जा रही है। ऐसे में इस मामले में याची की एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को डॉक्टरों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि वह लोगों की जान बचाने का जी जान से कोशिश करते हैं। अगर डाक्टरों को परेशान किया जाएगा तो वह लोगों की जान कैसे बचाने की कोशिश करेंगे।
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नरेश कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने खिलाफ नारनौल में दर्ज एफआईआर रद्द करने की अपील की। याची ने बताया कि एक मरीज ओमपति की अस्पताल में मौत हो गई थी और उसके बाद उसके रिश्तेदार अस्पताल में एकत्रित हुए थे। सिविल सर्जन एसएन शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि इन लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की तथा डॉक्टरों से मारपीट कर उनको जान से मारने की धमकी भी दी। याची ने आरोपों को नकारते हुए डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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हाईकोर्ट ने एफआईआर देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टि में यह लगता है कि जो आरोप एफआईआर में लगाए गए हैं उनमें सत्यता है। सीसीटीवी फुटेज भी आरोपियों के खिलाफ जा रही है। ऐसे में इस मामले में याची की एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को डॉक्टरों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि वह लोगों की जान बचाने का जी जान से कोशिश करते हैं। अगर डाक्टरों को परेशान किया जाएगा तो वह लोगों की जान कैसे बचाने की कोशिश करेंगे।