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Chandigarh: एडेड कॉलेजों के शिक्षकों को हाईकोर्ट से मिली राहत, 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति पर रोक
Thu, 25 May 2023 12:14 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 25 May 2023 12:14 PM IST
सार
डा. पवन शर्मा व अन्य ने एडवोकेट समीर सचदेवा के माध्यम से याचिका दाखिल कर बताया कि वह पीयू से मान्यता प्राप्त एडेड कॉलेजों में शिक्षण का कार्य करते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने एडेड कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 60 वर्ष रखी है जबकि सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है।
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
विस्तार
चंडीगढ़ के सहायता प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति के प्रशासन के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों की तर्ज पर 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति का प्रावधान करने की मांग पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
डा. पवन शर्मा व अन्य ने एडवोकेट समीर सचदेवा के माध्यम से याचिका दाखिल कर बताया कि वह पीयू से मान्यता प्राप्त एडेड कॉलेजों में शिक्षण का कार्य करते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने एडेड कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 60 वर्ष रखी है जबकि सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है। याची ने कहा कि चंडीगढ़ सीधे तौर पर सेंट्रल सिविल सर्विस रूल के तहत आता है और उच्च शिक्षा संस्थानों के मामले में यह यूजीसी से जुड़ा है।
याची ने बताया कि केंद्र सरकार की 29 मार्च 2022 की नोटिफिकेशन के बाद यूटी प्रशासन ने सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष कर दी थी लेकिन याचिकाकर्ताओं को इसका लाभ नहीं मिला। याचिकाकर्ता एडेड कॉलेजों के शिक्षक व प्रिंसिपल हैं और उन्हें इस लाभ से वंचित करते हुए 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किया जा रहा है, जो कि गलत है। ऐसा करना न केवल केंद्र सरकार की नोटिफिकेशन के खिलाफ है बल्कि साथ ही यूजीसी की गाइड लाइन का भी उल्लंघन है।
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याची ने अपील की कि चंडीगढ़ प्रशासन के इस निर्णय को रद्द किया जाए और साथ ही याचिका लंबित रहते उनकी 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति के आदेश पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर यूटी प्रशासन सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसरे साथ ही फिलहाल 60 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट के आदेश पर रोक लगा दी है।
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डा. पवन शर्मा व अन्य ने एडवोकेट समीर सचदेवा के माध्यम से याचिका दाखिल कर बताया कि वह पीयू से मान्यता प्राप्त एडेड कॉलेजों में शिक्षण का कार्य करते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने एडेड कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 60 वर्ष रखी है जबकि सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है। याची ने कहा कि चंडीगढ़ सीधे तौर पर सेंट्रल सिविल सर्विस रूल के तहत आता है और उच्च शिक्षा संस्थानों के मामले में यह यूजीसी से जुड़ा है।
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याची ने बताया कि केंद्र सरकार की 29 मार्च 2022 की नोटिफिकेशन के बाद यूटी प्रशासन ने सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष कर दी थी लेकिन याचिकाकर्ताओं को इसका लाभ नहीं मिला। याचिकाकर्ता एडेड कॉलेजों के शिक्षक व प्रिंसिपल हैं और उन्हें इस लाभ से वंचित करते हुए 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किया जा रहा है, जो कि गलत है। ऐसा करना न केवल केंद्र सरकार की नोटिफिकेशन के खिलाफ है बल्कि साथ ही यूजीसी की गाइड लाइन का भी उल्लंघन है।
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याची ने अपील की कि चंडीगढ़ प्रशासन के इस निर्णय को रद्द किया जाए और साथ ही याचिका लंबित रहते उनकी 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति के आदेश पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर यूटी प्रशासन सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसरे साथ ही फिलहाल 60 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट के आदेश पर रोक लगा दी है।