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पराली पर मचा घमासान, पंजाब-हरियाणा, दिल्ली आमने-सामने, केंद्र करे समाधान

Sun, 03 Nov 2019 09:49 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 03 Nov 2019 09:49 AM IST
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Punjab-Haryana and Delhi face to face at Stubble burning Issue
सांकेतिक तस्वीर

दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति पर गहरा दुख और गुस्सा जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावपूर्ण पत्र लिखकर राजनीतिक और क्षेत्रीय भिन्नताओं से ऊपर उठकर एकमत होने पर जोर दिया है।

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अमरिंदर ने कहा कि पंजाब ने पराली जलाने के खिलाफ कानून को जहां तक संभव हुआ, लागू करने की कोशिश की। किसानों के जुर्माने भी किये। लेकिन पराली जलाने से रोकने के लिए हम किसानों की दयनीय हालत को और हाशिये पर नहीं ले जा सकते।  
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दिल्ली और हरियाणा अपने स्तर पर जो कुछ कर सकते हैं, कर रहे हैं, लेकिन इस समूचे मामले में केंद्र की भूमिका संदिग्ध है। दुर्भाग्य से सुप्रीम कोर्ट की ओर से खराब हुई स्थिति पर चिंता जाहिर करने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कैप्टन ने स्पष्ट किया कि दिल्लीवासियों इस दुखदायक स्थिति में पंजाब का जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन दिल्ली और केंद्र सरकार समेत पूरे मुल्क की विभिन्न गलतियों से ऐसे भयानक हालात पैदा हुए। 

मुख्यमंत्री ने माना कि पराली की आग जो गलत दिशा में बहने वाली हवाओं के कारण जहरीले हालात पैदा करने का कारण बनी, उससे दिल्ली में ऐसी स्थिति पैदा हुई। साथ ही विभिन्न स्वतंत्र एजेंसियों के आंकड़े इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि मौजूदा स्थिति के लिए बड़े स्तर पर औद्योगिक प्रदूषण, ट्रैफिक और दिल्ली में तेजी से चल रही निर्माण गतिविधियां भी समान रूप से दोषी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने बच्चों और पोते-पोतियों के दिल्ली में रहने का जिक्र किया, जो शहर की जहरीली हवा के कारण लाखों लोगों की दुर्दशा साझा करते हैं। 

मोदी से पूछा- बताओ कौन सा हल है
कैप्टन ने याद दिलाया कि उन्होंने अलग-अलग मौकों पर प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का सुझाव भी दिया था, ताकि किसानों को पराली के निपटारे के लिए सुविधा मुहैया करवाई जा सके।

‘‘ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार इसे सही हल नहीं समझती। जिस कारण आपने मेरी विनती पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। फिर बताओ, वह कौन सा हल है जिससे इस समस्या को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है।’’ कैप्टन ने आगे कहा,‘‘प्रधानमंत्री जी, क्या यह आपकी सरकार का काम नहीं कि पंजाब, दिल्ली और हरियाणा समेत सभी साझेदारों के साथ परामर्श करके इसका स्थायी हल ढूंढा जाए।’’ 

जावडेकर 24 घंटे के भीतर पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाएं : मनोहर 

हरियाणा के कई जिलों में बिगड़ती आबोहवा के चलते प्रदेश सरकार बहुत ज्यादा चिंतित है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर को पत्र लिखकर जल्द से जल्द और जहां तक संभव हो रविवार को ही, दिल्ली और पड़ोसी राज्यों उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है। 

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के साथ दूरभाष पर भी बातचीत में उनसे यह बैठक बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि एनसीआर में इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए विभिन्न संगठनों और सरकार के समन्वित प्रयासों से एक कारगर रणनीति तैयार की जा सके।

उन्होंने बताया कि खेतों में हरियाणा के किसान पराली न जलाएं और अन्य तरीकों से भी सूबे में वायु प्रदूषण न बढ़े, इसे लेकर सरकार की ओर से कई तरह प्रयासों व पाबंदियों का सहारा लिया जा रहा है। 

मनोहर लाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जारी जन स्वास्थ्य आपातकाल हम सब के लिए गंभीर चिंता का विषय है। लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए, इस समस्या के समाधान के लिए सभी हित धारकों द्वारा एक अति संवेदनशील और उत्तरदायी ढंग से समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से व्याप्त भयंकर प्रदूषण से पीड़ित लोगों को जल्द राहत पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार सभी मुख्यमंत्रियों और पर्यावरण मंत्रियों की बैठक से इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए कार्य योजना और संयुक्त रणनीति बनाने तथा लोगों की पीड़ा और कठिनाई को दूर करने में मदद मिलेगी।

हरियाणा में कम हुए फसल अवशेष जलाने के मामले : दुष्यंत

हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि हरियाणा में फसल अवशेष जलाने के मामलों में 34 फीसदी तक कमी आई है। राज्य सरकार का सदैव प्रयास रहेगा कि फसलों के अवशेष जलाए जाने की घटनाएं पूर्ण रूप से नियंत्रित हो सकें। 

उन्होंने कहा कि दिल्ली में कूड़ाघरों में लगातार जलने वाली आग भी एक खतरनाक प्रदूषक है और दिल्ली सरकार को इसकी लगातार मॉनिटरिंग करनी चाहिए, क्योंकि पर्यावरण लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सभी को राजनीति से हटकर कार्य करना चाहिए।

दुष्यंत ने कहा कि हरियाणा में अधिकतम अनुदान आधारित ‘वेस्ट टू एनर्जी’ विशेषकर कृषि अपशिष्ट आधारित संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।

उधर, हरियाणा सरकार ने डिप्टी सीएम का कामकाज देखने के लिए दो पीए भी नियुक्त कर दिए हैं। दुष्यंत चौटाला का कार्यालय हरियाणा सचिवालय के पांचवें फ्लोर पर होगा और सदन कुमार व राजेश कुमार उनके निजी सहायक होंगे।

 हरियाणा सचिवालय में पांचवें फ्लोर पर दुष्यंत का दफ्तर का दफ्तर तैयार किया गया है। संभावना है कि सोमवार को वे अपने कार्यालय में पदभार संभाल सकते हैं। इसके अलावा शनिवार को चंडीगढ़ में डिप्टी सीएम दुष्यंत ने हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य से भी शिष्टाचार मुलाकात की।

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