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बड़ी पहलः अब अपनों के बीच रहकर लड़ी जाएगी नशे से जंग, पॉलिसी तैयार

Mon, 17 Jul 2017 11:05 AM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 17 Jul 2017 11:05 AM IST
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 punjab govt new policy for drug de-addiction and rehabilitation
drugs
पंजाब में युवाओं को नशे की लत से दूर करने के लिए कैप्टर सरकार ने एक नई पहल की है, जिसके लिए पॉलिसी तैयार कर ली गई है। इसके तहत नशे के आदी लोग अब अपनों के बीच रह कर नशे से जंग लड़ सकेंगे। घर पर रहकर इलाज होने से जहां उन्हें परिजनों का नैतिक समर्थन और भावनात्मक साथ मिलेगा।
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वहीं, अस्पताल में रहकर इलाज कराने पर होने वाले खर्च की भी बचत होगी। सेहत विभाग केमनो-चिकित्सकों ने ड्रग डी-एडिक्शन पर नई पॉलिसी तैयार की है, जिसे इसी माह लागू कर दिया जाएगा। पंजाब भर के डी-एडिक्शन व री-हैबिलिटेशन सेंटरों में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और डॉक्टरों से फीडबैक लेने केबाद ही नई नीति बनाई गई है। अभी तक डी-एडिक्शन सेंटरों में आने वाले ज्यादातर नशे के आदी लोगों को दाखिल कर लिया जाता था।
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इंडोर में ही उनका इलाज होता था, लेकिन अब विभाग ने नीति में बदलाव किया है। अब सिर्फ बहुत ही गंभीर मरीजों को इंडोर में रख कर इलाज किया जाएगा। उनकी हालत में भी जैसे ही सुधार दिखाई देगा, उन्हें भी घर भेज दिया जाएगा। बाकी सभी मरीजों का इलाज ओपीडी केजरिए ही होगा। मनो-चिकित्सकों का मानना है कि परिजनों के बीच रह कर इलाज से मरीजों की रिकवरी तेज होगी। वहीं, अस्पताल में रह कर इलाज करवाने वाले आर्थिक बोझ से भी निजात मिलेगी। इसी माह इस नीति को लागू कर दिया जाएगा।
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नशे छोड़ चुके लोग दिखाएंगे राह

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सेहत विभाग की ओर से तैयार की गई नई नीति में सफलतापूर्वक नशे छोड़ चुके लोगों की मदद ली जाएगी। जो लोग भी विभाग की मदद को तैयार होंगे, उनके सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए जाएंगे। फिर वे लोग इस समय उपचाराधीन लोगों केसाथ अपनी बातें सांझी करेंगे। किस हिम्मत से उन्होंने नशा छोड़ा, परिजनों और समाज ने किस तरह का सहयोग दिया, इस बारे में बता कर उन्हें भी प्रेरित करेंगे।

नशे के साथ पकड़े गए लोगों का मुफ्त इलाज
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सेहत विभाग को निर्देश दिए हैं कि जो लोग नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाते हैं, डी-एडिक्शन सेंटरों में उनका मुफ्त इलाज किया जाए। बशर्ते, वे इलाज कराने के इच्छुक हों। इनमें वही लोग होंगे, जो अपने सेवन के लिए नशा ला रहे थे। अभी तक ओपीडी में इलाज केलिए दस रुपये की मासिक परची बनती है। जबकि, इंडोर में रोजाना के दो सौ रुपये लगते हैं, जिसमें दवा और खाना भी शामिल है। हालांकि, विभाग ने पहले ही सेंटरों के संचालक मनोचिकित्सकों को निर्देश दिए हैं कि बीपीएल परिवारों के मरीजों का इलाज मुफ्त किया जाए।
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